नरकटियागंज: राजन तिवारी ने दे दिया नया राजनीतिक रंग

सुनील गुप्ता
16 मई 2025
Bettiah: अनेक तरह के विवादों में घिरीं विधायक रश्मि वर्मा ( Rashmi Verma) की सिकुड़ी संभावनाओं के बीच नरकटियागंज (Narkatiyaganj) से उम्मीदवारी के लिए वर्मा घराने के लोग तो जुगत भिड़ा ही रहे हैं, घराने से बाहर भी ऐसे कई दावेदार हैं जो खुद को बेहतर विकल्प के तौर पर पेश कर रहे हैं. वैसे दावेदारों में पूर्व बाहुबली विधायक राजन तिवारी (Rajan Tiwari) भी हैं. कभी गोविंदगंज (Govindganj) से विधायक रहे राजन तिवारी कहने को तो 2019 से भाजपा (BJP) से जुड़े हुए हैं, पर पार्टी में सक्रियता उनकी नहीं के बराबर दिखती है. वैसे, उनका दावा है कि बिहार से लेकर उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) तक वह पार्टी के लिए पसीना बहाते रहे हैं.
विवादित छवि और बाहरी होने का मुद्दा
जो हो, नरकटियागंज की राजनीति की गहन जानकारी रखने वालों के मुताबिक क्षेत्र का सामाजिक और राजनीतिक समीकरण राजन तिवारी के अनुकूल नहीं है. इसके बाद भी वह ‘चंद टरे, सूरज टरे, टरे जगत व्यवहार…’ के तर्ज पर नरकटियागंज से चुनाव लड़ने की बात कर रहे हैं. तर्क यह कि इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे तो राजनीति में उनकी मौत हो जायेगी. उनकी इस व्यथा को भाजपा नेतृत्व किस नजरिये से देखता है, यह वक्त बतायेगा. विवादित छवि और बाहरी होने का मुद्दा राह रोक दे, तो वह अचरज की बात नहीं होगी. वैसे, राजद से भी उनका तार जुड़ा है.
कहीं नहीं जायेंगे भाजपा छोड़कर
इसे राजनीतिक भयादोहन मानें या फिर दबाव की राजनीति, भाजपा में बात नहीं बनी, तो वह राजद (RJD) के जरिये महागठबंधन (Grand Alliance) में संभावना टटोल सकते हैं. हालांकि, उनका कहना है कि वह भाजपा में हैं और भाजपा में ही रहेंगे. अन्यत्र कहीं नहीं जायेंगे. लेकिन, चुनाव अवश्य लड़ेंगे. क्या करते हैं क्या नहीं, यह समय बतायेगा. चुनाव लड़ने के मामले में उनके अड़ जाने से नरकटियागंज में भाजपा का भविष्य तो बिगड़ ही जा सकता है.
दावेदारी में दम नहीं
भाजपा में दूसरे दावेदार के रूप में पश्चिम चम्पारण (West Champaran) जिला परिषद की पूर्व अध्यक्ष रेणु देवी (Renu Devi) का नाम लिया जा रहा है. परन्तु, मुख्यतः दो कारणों से उनकी दावेदारी में दम नहीं दिखता है. एक तो वह चुनाव में पीटे मोहरे हैं और दूसरा भाजपा के बागी होने का भी कलंक लगा हुआ है. हालांकि, राजनीति के वर्तमान दौर में यह कोई खास मतलब नहीं रखता है. ज्यादातर उम्मीदवार ऐसे ही चरित्र के होते हैं. रेणु देवी अत्यंत पिछड़ा समाज से हैं. 2015 में सीटिंग विधायक रश्मि वर्मा को मायूसी में डाल भाजपा ने उन्हें उम्मीदवार बना दिया. उपलब्धि बेहद निराशाजनक तो रही, पर उसकी वजह रश्मि वर्मा के निर्दलीय मैदान में कूद जाना रहा.
नजर सतीश चंद्र दूबे की भी
तब भी भाजपा नेतृत्व ने चुनाव की दृष्टि से उन्हें कुछ अधिक कमजोर मान 2020 में उम्मीदवारी से वंचित कर दिया. उम्मीदवारी रश्मि वर्मा को मिल गयी. उस खुन्नस में रेणु देवी निर्दलीय मैदान में उतर गयीं. लेकिन, रश्मि वर्मा की राह नहीं रोक पायीं. 07 हजार 674 मतों में सिमट भाजपा में भविष्य खराब कर बैठीं. नवसृजित नरकटियागंज विधानसभा क्षेत्र का प्रथम विधायक बनने का सौभाग्य केन्द्रीय राज्यमंत्री सतीश चंद्र दूबे (Satish Chandra Dubey) को प्राप्त हुआ था. वर्तमान में वह राज्यसभा (Rajya Sabha) के सदस्य हैं. इसके बाद भी नजर उनकी नरकटियागंज विधानसभा क्षेत्र पर जमी है. खुद के लिए नहीं, बड़े भाई प्रदीप दूबे (Pradeep Dubey) के लिए.
बात कहीं नहीं बन पायेगी
कहा जाता है कि भाजपा में भाई – भतीजावाद की गुंजाइश कम रहने के बावजूद अंदरूनी तौर पर वह प्रदीप दूबे के लिए जोर लगा रहे हैं. नरकटियागंज नहीं, तो बगहा ही सही. पर, विश्लेषकों का मानना है कि बात कहीं नहीं बन पायेगी.एक और दावेदार हैं राजेश जायसवाल. भाजपा के समर्पित कार्यकर्त्ता हैं. फिलहाल पश्चिम चम्पारण जिला भाजपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष हैं. पार्टी ने इन्हें चनपटिया (Chanpatia) विधानसभा क्षेत्र का प्रभारी बना रखा है. भाजपा से जुड़े लोगों की मानें तो राजेश जायसवाल (Rajesh Jaiswal) की सांगठनिक कार्यों के अलावा चुनावों के दौरान उल्लेखनीय सक्रियता रहती है.
लगा रहे खुद के लिए जोर
2024 के संसदीय चुनाव में वाल्मीकिनगर (Valmikinagar) क्षेत्र में इनकी जो भूमिका रही उसकी तारीफ जदयू सांसद सुनील कुमार (Sunil Kumar) ने भी की. सुनील कुमार से पहले उनके पिता पूर्व सांसद स्वर्गीय वैजनाथ प्रसाद महतो (Vaijnath Prasad Mahato) ने भी कार्यकर्त्ता के रूप में राजेश जायसवाल की चुनावी भागीदारी को खूब सराहा था. राजेश जायसवाल की समझ है कि कथित आपत्तिजनक करतूतों के कारण रश्मि वर्मा को उम्मीदवारी शायद ही मिल पायेगी. इसी को देखते हुए वह ख़ुद के लिए जोर लगा रहे हैं.
अपनी कोई पहचान नहीं
भाजपा प्रत्याशी के रूप में नरकटियागंज से चुनाव लड़ने की घोषणा बगहा (Bagaha) के पूर्व विधायक राघव शरण पांडेय (Raghav Sharan Pandey) के पुत्र रितेश पांडेय (Ritesh Pandey) ने भी कर रखी है. रितेश पांडेय इसी विधानसभा क्षेत्र के धोबनी रमौली गांव के रहने वाले हैं. उनकी दावेदारी से दूसरे दावेदारों को परेशानी हो सकती है, पर जमीनी हकीकत यह है कि क्षेत्र में पूर्व विधायक राघव शरण पांडेय के पुत्र होने के अलावा अपनी कोई पहचान नहीं है. क्षेत्रीय लोगों से कोई खास लगाव-जुड़ाव भी नहीं है. चुनाव अभी तकरीबन चार माह दूर है. इस दरमियान रितेश पांडेय जैसे और भी कई चेहरे नजर आ सकते हैं.
#tapmanlive

