हसनपुर : तेजप्रताप को वनवास… मुकेश सहनी का खुल जायेगा भाग्य

विकास कुमार
29 मई 2025
Hasanpur : राजनीति संभावनाओं का खेल है. कब करवट बदल लेगी, इसकी कोई गांरटी नहीं. समस्तीपुर (Samastipur) जिले के हसनपुर विधानसभा क्षेत्र के मामले को भी इसी नजरिये से देखा जा सकता है. हाल के बड़े राजनीतिक घटनाक्रम में राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद (Lalu Prasad) द्वारा पार्टी और परिवार से अलग कर दिये जाने के बाद यह तय हो गया कि तेजप्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) 2025 का चुनाव हसनपुर से नहीं लड़ेंगे. तेजप्रताप यादव राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद के बड़े पुत्र हैं. अनुष्का यादव (Anushka Yadav) प्रकरण को लेकर उनके खिलाफ मौखिक अनुशासनिक कार्रवाई हुई है. इस आधार पर उनकी विधानसभा की सदस्यता भी खत्म हो जा सकती है.
किसे मिलेगी उम्मीदवारी
पार्टी और परिवार से निकाल दिये जाने के बाद तेजप्रताप यादव किस दल से और कहां से 2025 का चुनाव लड़ेंगे, किसी दल से लड़ेंगे या निर्दलीय मैदान में उतरेंगे, यह एक अलग विषय है. हसनपुर से संबंधित विषय यह है कि तेजप्रताप यादव का अध्याय समाप्त हो जाने के बाद वहां राजद (RJD) की उम्मीदवारी किसे मिलेगी? क्षेत्र में फिलहाल यही सवाल राजनीति में रुचि रखने वालों के लिए माथापच्ची का विषय बना हुआ है. यह खुला सच है कि स्थानीय स्तर पर राजद सीधे तौर पर दो खेमों में विभक्त है. आज से नहीं, लम्बे समय से.
गला काट प्रतिद्वंद्विता
एक खेमा पूर्व विधायक सुनील कुमार पुष्पम (Sunil Kumar Puspam) का है तो दूसरा बाहुबली अशोक यादव (Ashok Yadav) का. दोनों में गला काट प्रतिद्वंद्विता है. असर चुनाव पर पड़ता रहा है. राजद उम्मीदवार की हार का बड़ा कारण भी यही रहा है. राजद उम्मीदवार को एक खेमे का साथ मिलता है तो दूसरा पांव खींच लेता है. 2020 में भी तेजप्रताप यादव की जगह राजद का कोई दूसरा उम्मीदवार होता तो उसे भी हार का ही मुंह देखना पड़ जाता. ऐसे में हसनपुर में तेजप्रताप यादव का तटस्थ विकल्प तलाशना राजद नेतृत्व के लिए बहुत कठिन होगा. ऐसा इसलिए भी कि उम्मीदवारी चाहने वालों की फेहरिस्त बहुत लंबी है.
शामिल हैं सभी चरित्र के लोग
राजद की उम्मीदवारी चाहने वालों में धनबली, बाहुबली एवं रसूखदार, सभी चरित्र के लोग शामिल हैं. कुछ दिनों पहले तक राजद के संभावित उम्मीदवार के तौर पर बिथान (Bithan) की प्रखंड प्रमुख विभा देवी (Vibha Devi) का नाम खूब चर्चा में था. तब वह विधायक प्रतिनिधि थीं और राजनीतिक रूप से तेजप्रताप यादव की करीबी मानी जाती थीं. आरोप उछलते थे कि निर्वाचन क्षेत्र से आमतौर पर दूर- दूर रहने वाले तेजप्रताप यादव ने हसनपुर को इनके ही रहमोकरम पर छोड़ रखा है. एक तरह से वह विधायक सरीखी हैसियत में रहती थीं. आचरण भी वैसा ही दिखता था.
दावेदारी में दम नहीं
इससे राजद समर्थकों में गहरी नाराजगी थी. हालांकि, हकीकत का अहसास हुआ तब तेजप्रताप यादव ने विभा देवी को विधायक प्रतिनिधि के दायित्व से मुक्त कर दिया. 23 अप्रैल 2025 की तारीख से शिवनारायण यादव उर्फ बऊआ यादव (Shivnarayan Yadav Alias Baua Yadav) को विधायक प्रतिनिधि बना दिया. इस बदलाव के बाद विभा देवी की दावेदारी में कितना दम बच गया है, यह बताने की शायद जरुरत नहीं. राजद में दूसरे दावेदार विभा देवी के बाहुबली पति अशोक यादव हैं. वैसे तो संभावना तनिक भी नहीं है, तब भी इन दोनों में से किसी को राजद की उम्मीदवारी मिली तो फिर पूर्व विधायक सुनील कुमार पुष्पम के खेमे की भूमिका क्या होगी, यह बड़ी सरलता से समझा जा सकता है.

गुटनिरपेक्ष नेता की तलाश
हसनपुर से तीन बार विधायक रहे सुनील कुमार पुष्पम कानूनी अड़चनों की वजह से खुद चुनाव नहीं लड़ सकते हैं. उनकी कोशिश पत्नी माला पुष्पम (Mala Puspam) या पुत्र अमन पुष्पम (Aman Puspam) को उम्मीदवारी दिलाने की हो रही है. कामयाबी मिली तो स्वाभाविक रूप से विभा देवी और अशोक यादव के खेमे का कोपभाजन बनना पड़ जायेगा. 2020 में भी ऐसी ही विकट स्थिति थी. तेजप्रताप यादव की उम्मीदवारी से राजद की हार का खतरा टल गया. विश्लेषकों की समझ है कि इस बार राजद नेता रामनारायण मंडल उर्फ बच्ची मंडल (Ramnarayan Mandal Alias Bachhi Mandal) या फिर किसी ‘गुटनिरपेक्ष’ नेता को मैदान में उतार संतुलन बनाये रखने का प्रयास किया जा सकता है.
लड़ सकते हैं मुकेश सहनी
‘गुटनिरपेक्ष’ नेता कोई नया युवा चेहरा हो सकता है. वैसे, दावेदारी ललन यादव (Lalan Yadav) और शंभू भूषण यादव (Shambhu Bhushan Yadav) की भी मजबूत मानी जा रही है. राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि ‘गुटनिरपेक्ष’ नेता की विकल्पहीनता की स्थिति में महागठबंधन में यह सीट विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के हवाले कर दी जा सकती है. दूसरा कोई नहीं, वीआईपी सुप्रीमो मुकेश सहनी (Mukesh Sahni) खुद इस क्षेत्र से चुनाव लड़ सकते हैं. आधार यह भी कि हसनपुर में सहनी मतों की भी अच्छी खासी संख्या है.
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