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औराई : नहीं बदले मोहरे तो बदल जायेंगे चेहरे !

तापमान लाइव ब्यूरो
3 जून 2025
Muzaffarpur : बिहार विधानसभा का चुनाव (Election) अभी तकरीबन पांच माह दूर है. इसके बाद भी चुनावी सरगर्मियां परवान चढ़ने लगी हैं. चौक-चौराहों पर चर्चाएं होने लगी हैं. तापमान लाइव की इस प्रस्तुति में बात मुजफ्फरपुर जिले में उभर रही चुनावी तस्वीर की . इस जिले में चुनाव में क्या होगा, क्या नहीं इसका अंदाज वहां बह रही बदलाव की बयार से आसानी से लगाया जा सकता है. हवा का रूख स्पष्ट संकेत दे रहा है कि परिवर्तन अवश्यंभावी है. हालात ऐसे हैं कि समय रहते मोहरे नहीं बदले गये तब विधायक (MLA) के रूप में चेहरे बदल जा सकते हैं.

हर तरफ है बेचैनी

राजनीति महसूस कर रही है कि बदलाव की बयार से हर तरफ बेचैनी, रस्साकसी और घात- प्रतिघात की आशंका पसरी हुई है. ऐसे में अधिकतर विधायकों का दुबारा जीतकर आना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन दिख रहा है. बदलाव की बयार औराई (Aurai) विधानसभा क्षेत्र में भी बह रही है. पूर्व मंत्री रामसूरत राय (Ramsurat Rai) इस क्षेत्र से भाजपा के विधायक हैं. सामान्य समझ में रामसूरत राय ने उन्हीं मतदाताओं की भावनाओं को ठेस पहुंचायी है, जिनकी बदौलत वह औराई से दो बार विधायक निर्वाचित हुए हैं.

नहीं है कोई जनाधार

2020 में रामसूरत राय की हार तय मानी जा रही थी, लेकिन महागठबंधन (Grand Alliance) के उम्मीदवार चयन में हुई चूक से वह जीत गये. राजनीति तब हैरान रह गयी जब राजद (RJD) के सीटिंग विधायक डा. सुरेन्द्र कुमार यादव (Dr. Surendra Kumar Yadav) को हाशिये पर डाल भाकपा-माले (CPI-ML) के आफताब आलम (Aftab Alam) को महागठबंधन का उम्मीदवार बना दिया गया. औराई क्षेत्र में भाकपा-माले और आफताब आलम का अपना कोई जनाधार नहीं है. 47 हजार 866 मतों के विशाल अंतर से हुई उनकी हार से इसकी पुष्टि खुद-ब-खुद हो जाती है. भाजपा (BJP) उम्मीदवार रामसूरत राय को मिले 90 हजार 479 मतों के मुकाबले आफताब आलम को 42 हजार 613 मत ही मिल पाये.

बंट गये यादव समाज के मत

औराई की चुनावी राजनीति की गहन जानकारी रखने वालों के मुताबिक उनकी ऐसी दुर्गति इस कारण हुई कि डा. सुरेन्द्र कुमार यादव को नाउम्मीद किये जाने से आहत यादव समाज के एक हिस्से ने रामसूरत राय और दूसरे ने निर्दलीय अखिलेश कुमार (Akhilesh Kumar) का समर्थन कर दिया. रामसूरत राय पहले राजद में थे. वहां चुनावी संभावना नहीं देख जदयू से जुड़ गये. अक्तूबर 2005 में औराई से जदयू उम्मीदवार के तौर पर अर्जुन राय (Arjun Rai) निर्वाचित हुए थे. 2009 में वह सीतामढ़ी (Sitamarhi) का सांसद बन गये. औराई विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव (by-election) हुआ. नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने रामसूरत राय को जदयू का प्रत्याशी बना दिया. पर, यादव समाज को वह स्वीकार्य नहीं हुए.

नेता नहीं स्वीकार किया

मुंह की खा गये. राजद के डा. सुरेन्द्र कुमार यादव विधायक निर्वाचित हो गये. 2010 के चुनाव में ‘सीट तुम्हारी, उम्मीदवार हमारा’ नीति के तहत रामसूरत राय को रातोरात भाजपा में शामिल कर औराई से प्रत्याशी बना दिया गया. औराई भूमिहार बहुल क्षेत्र है. रामसूरत राय को भूमिहारों का साथ मिला और वह विधायक बन गये. लेकिन, औराई के यादव समाज ने रामसूरत राय को सहजता से नेता नहीं स्वीकार किया. दूसरी ओर विधायक बनने के बाद कथित रूप से वह भूमिहारों को भी आहत करते रहे. यह कहा जा सकता है कि जिस डाल पर बैठे थे उसी को काटते रहे. परिणामतः 2015 में भी राजद उम्मीदवार डा. सुरेन्द्र कुमार यादव से मात खा गये.

डूब जायेगा भविष्य

विश्लेषकों का मानना है कि 2020 में औराई से राजद का यादव उम्मीदवार होता तो रामसूरत राय 2015 जैसी गति को ही प्राप्त होते. इस चुनाव में मैदान खुला मिल गया. महागठबंधन के कमजोर उम्मीदवार भाकपा-माले के आफताब आलम को हराकर वह विधायक ही नहीं, एनडीए (NDA) की सरकार में मंत्री (Minister) भी बन गये. यह सब तो हुआ, पर चुनाव के बाद बागमती-लखनदेई (Bagmati-Lakhandei) नदियों में परस्पर विश्वास का पानी उतरता चला गया. अब असंतोष, प्रतिशोध का सैलाब बह रहा है. इस सैलाब में रामसूरत राय का भविष्य डूब जाये तो वह अचरज की कोई बात नहीं होगी.

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