तापमान लाइव | Tapmanlive

न्यूज़ पोर्टल | Hindi News Portal

मंगनीलाल मंडल : जा बसे फिर ‘भुतहा घर’ में!

महेश कुमार सिन्हा
18 जून 2025
Patna : ‘नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने अतिपिछड़ों को धोखा दिया. उनके अखंड समर्थन-समर्पण के साथ छल किया. बीस वर्षीय सत्ता काल में अतिपिछड़ों के उत्थान के लिए कुछ नहीं किया. सिर्फ जुमलेबाजी की. एनडीए (NDA) की सरकार में उनकी भूमिका अब शिखंडी (Shikhandi) सरीखी हो गयी है. सरकार तीन-साढ़े तीन लोग चला रहे हैं.’ पूर्व सांसद मंगनीलाल मंडल (Manganilal Mandal) ने राजद (RJD) के प्रदेश अध्यक्ष (State President) का पद संभालने के बाद नयी राजनीतिक जिम्मेदारी के निर्वहन की शुरुआत इन्हीं शब्दों से की. ऐसा स्वाभाविक भी है. पर, क्यों? यह हर किसी को मालूम है कि मंगनीलाल मंडल जदयू (JDU) में थे. जदयू के अब तक के इतिहास में तीन ही ऐसे नेता हुए जिन्हें अलग-अलग समय में पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का पद मिला.

हटा दिया उपाध्यक्ष पद से

पहले प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) और फिर मंगनीलाल मंडल को उपाध्यक्ष बनाया गया. वर्तमान में यह पद पूर्व सांसद वशिष्ठ नारायण सिंह (Vashishtha Narayan Singh) को मिला हुआ है. प्रशांत किशोर की पार्टी में हनक बहुत कुछ बनी रही. यूं कहें कि उन्होंने वैसा बनाये रखा. मंगनीलाल मंडल की हैसियत गुलदस्ते में सजे फूल से अधिक तनिक भी नहीं थी. करीब के लोगों की मानें, तो निर्णय की बात छोड़िये, उनसे सलाह-मशविरा तक नहीं की जाती थी. हद यह कि नीतीश कुमार राष्ट्रीय अध्यक्ष बने तो उपाध्यक्ष के पद से हटा उन्हें महासचिवों की सूची में शामिल कर दिया गया. कहते हैं कि तब से वह कुछ ज्यादा क्षुब्ध थे. पलायन का अवसर तलाश रहे थे.

देखने-समझने वाली बात होगी

राजद के प्रदेश अध्यक्ष का पद मिला नहीं कि मंगनी लाल मंडल फट पड़े. उस कुंठा को उन्होंने तल्ख शब्दों में व्यक्त कर दिया. पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र नहीं रहने की बात कह वह जनवरी 2025 में ही जदयू से अलग हो राजद की गोद में जा गिरे. दिलचस्प बात यह कि उसी राजद की गोद में जा गिरे जिसे उन्होंने कभी अतिपिछड़ों के लिए ‘भुतहा घर’ कहा था. मतलब राजद में अतिपिछड़ा समाज का कोई मान-सम्मान नहीं, कोई महत्व नहीं. मंगनीलाल मंडल के प्रवेश के बाद मान- सम्मान और महत्व मिलता है या नहीं, यह देखने-समझने वाली बात होगी.

सांगठनिक संस्कार सुधार दिया

वैसे, इस ‘भुतहा घर’ की राजनीति का जो चरित्र है, सामान्य समझ में उसमें प्रदेश अध्यक्ष की हैसियत आमतौर पर हस्ताक्षर करने तक सीमित रहती है. निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष जगतानंद सिंह (Jagatnand Singh) ने पद की हैसियत पाने की कोशिश की तो अक्सर कोप भवन में पेटकुनिया देना पड़ा. हालांकि, तब भी उन्होंने राजद का सांगठनिक संस्कार बहुत कुछ परिष्कृत कर दिया. मंगनीलाल मंडल के साथ क्या होता है और वह क्या कुछ कर पाते हैं, यह देखने- सुनने के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा.

सामाजिक विषमता जनित कुंठा

अब थोड़ी बात मंगनीलाल मंडल की राजनीति की. मधुबनी (Madhubani) जिले के फुलपरास (Fulparas) प्रखंड क्षेत्र में है गोरगामा गांव. उसी गांव के झोटीलाल मंडल और संझा देवी के पुत्र हैं 76 वर्षीय मंगनीलाल मंडल. अतिपिछड़ा मजदूर परिवार में जन्म लेने के बावजूद काफी पढ़े-लिखे हैं, विद्वता से भरे हैं. पर, उस अनुरूप जन स्वीकार्यता नहीं है. सामाजिक विषमता जनित कुंठा कंठ भर रहने के कारण स्वीकार्यता मुख्य रूप से ऐसी ही समझ वालों के बीच सिमटी हुई है. वरिष्ठ पत्रकार विजयशंकर पांडेय का मानना है कि अतिपिछड़ा समाज के हित में खुद का हित नहीं, खुद के हित में अतिपिछड़ा समाज का हित की भावना भी इसका बड़ा कारक रहा है.

सम्मानित नेता की पहचान

अब तक के 58 वर्षीय राजनीतिक जीवन में पर्याप्त अवसर मिलने के बाद भी मंगनीलाल मंडल अतिपिछड़ा समाज, यहां तक कि स्वजातीय धानुक समाज में भी मजबूत पैठ नहीं बना पाये हैं, तो राजनीति के विश्लेषक डा. के के कौशिक की नजर में उसकी मुख्य वजह यही कुंठा है. वैसे, मंगनीलाल मंडल अतिपिछड़ों (Extremely backward) के सम्मानित नेता की पहचान रखते हैं. जदयू में रहे या राजद में, महत्वपूर्ण सांगठनिक पद पर ही विराजमान रहे हैं.

#tapmanlive