मंगनीलाल मंडल : ‘भुतहा घर’ ही था एकमात्र विकल्प!

महेश कुमार सिन्हा
21 जून 2025
Patna : मंगनीलाल मंडल राजद (RJD) का विधिवत प्रदेश अध्यक्ष हो गये. राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद (Lalu Prasad) की अध्यक्षता में गुरुवार को पटना में हुई पार्टी की राज्य परिषद की बैठक में उन्होंने पदभार संभाल लिया. बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, राजद के अघोषित सुप्रीमो तेजस्वी प्रसाद यादव, सांसद मीसा भारती आदि सभी प्रमुख नेता मौजूद थे. निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह की गैरमौजूदगी चर्चा में रही. बैठक में भरोसा दिलाया गया कि उन्हें राष्ट्रीय स्तर की कोई सांगठनिक जिम्मेदारी दी जायेगी. क्या दी जायेगी क्या नहीं, यह भविष्य की बात है.
पद के लिए दल बदल
यहां महत्वपूर्ण बात यह कि प्रदेश राजद अध्यक्ष (State President) बनाये गये मंगनीलाल मंडल (Mangnilal Mandal) की राजनीति में स्थायित्व आयेगा या शामियाना बदलने का सिलसिला बना रहेगा. मंगनीलाल मंडल से जुड़ीं और बातें अपनी जगह हैं, समाजवादी धारा के दूसरे कई नेताओं की तरह अतिपिछड़ा समाज के इस तथाकथित सम्मानित नेता का भी पद के लिए दल बदल का शर्मनाक इतिहास रहा है. लेकिन, इस मामले में गौर करने वाली बात यह है कि वह राजद और जदयू (JDU) के बीच ही छलांग लगाते रहे हैं. किसी तीसरे दल से नहीं जुड़े हैं.
करीबी थे कर्पूरी ठाकुर के
अतीत में चलें, तो युवाकाल की दहलीज पर वह वामपंथी मिजाज के थे. जुड़ाव एआईएसएफ से था. बाद में समाजवादी नेता राममनोहर लोहिया और मधु लिमये से प्रभावित हो समाजवाद की धारा में बह गये.1967 में उनका जुड़ाव संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से हुआ. 1977 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी संपूर्ण क्रांति की कोख से निकली जनता पार्टी में मिल गयी. जनता पार्टी के बिखर जाने के बाद 1979 में चौधरी चरण सिंह के भारतीय क्रांति दल के साथ लोकदल में विलीन हो गयी. बिहार में लोकदल की कमान समाजवादी नेता कर्पूरी ठाकुर के हाथ में थी. मंगनीलाल मंडल उनके करीबी थे.

सौभाग्य ऐसा कि…
कर्पूरी ठाकुर के प्रभुत्व काल में ही वह 1986 में विधान पार्षद बने. कर्पूरी ठाकुर के गुजर जाने के बाद दुहराव और तिहराव भी हुआ. यानी विधान पार्षद का तीन कार्यकाल मिल गया. लालू प्रसाद और राबड़ी देवी की सरकार में मंगनीलाल मंडल मंत्री भी रहे. बाद में लालू प्रसाद से मोहभंग हुआ तब नीतीश कुमार के साथ हो गये. सौभाग्य ऐसा कि विधान पार्षद का 18 साल का कार्यकाल खत्म होते ही जदयू के सौजन्य से 2004 में राज्यसभा की सदस्यता मिल गयी. 2009 के संसदीय चुनाव में जदयू उम्मीदवार के रूप में झंझारपुर से उनकी जीत हुई.
राजद से जुड़ गये
लेकिन, चुनाव के कुछ ही दिनों बाद बगावत की राह बढ़ गये. यह कहते हुए कि देश में दो ही नेता के पक्ष में हवा है. नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) के पक्ष में या फिर लालू प्रसाद के पक्ष में. फिर 2014 के चुनाव में राजद से जुड़ उसका उम्मीदवार बन गये. दांव खाली चला गया, मुंह की खा गये. 2019 के चुनाव में राजद ने बड़ी बेरुखी से उन्हें मायूसी में डाल तत्कालीन विधायक गुलाब यादव (Gulab Yadav) को उम्मीदवार बना दिया. तब पलटी मारने के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं था. मंगनीलाल मंडल राजद के उपाध्यक्ष थे.
दांव खाली रह गया
उम्मीदवारी नहीं मिलने के खुन्नस में राजद को अतिपिछड़ों के लिए ‘भुतहा घर’ बता जदयू में शामिल हो गये. लेकिन, उम्मीदवारी वहां भी नहीं मिली. दल बदल का उनका यह दांव पहली बार इस वजह से खाली रह गया कि झंझारपुर (Jhanjarpur) के लिए जदयू के उम्मीदवार पहले ही घोषित हो गये थे. बाद में राज्यसभा (Rajaysabha) और विधानपरिषद (legislative council) की सदस्यता के लिए तो जुगाड़ नहीं ही बैठा, 2024 के संसदीय चुनाव में भी उन्हें हाशिये पर छोड़ दिया गया. उससे पहले जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद से चलता कर दिया गया. ऐसी स्थिति में ‘भुतहा घर’ में शरण पाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा तब वह राजद के हो गये और प्रदेश अध्यक्ष का पद मिल गया.

