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रेणु कुशवाहा : छूटा जदयू का साथ, फूट गया सियासी भाग्य!

विकास कुमार
26 जून 2025

Patna : बिहार के राजनीतिक पटल पर शून्य में भटकती कई ऐसी शख्सियतें भी हैं जिनकी मूल राजनीतिक दल में रहते काफी वकअत थी, रुतबा-रुआब था. दुर्भाग्यवश वह डाल छूटी नहीं कि सब कुछ लुप्त हो गया. अन्यत्र हाथ-पांव मारने, दल-दल खाक छानने का भी कोई लाभ नहीं मिला. मिला भी तो दलबदलू का नाम और पहचान! बुधवार को राजद (RJD) में शामिल हुईं रेणु कुमारी कुशवाहा (Renu Kumari Kushwaha) को वैसी शख्सियतों में एक माना जा सकता है. यह मालूम होना चाहिये कि रेणु कुमारी कुशवाहा सांसद (MP) और विधायक (MLA) ही नहीं, नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की सरकार के दूसरे और तीसरे सोपान में मंत्री भी रही हैं.

2014 के संसदीय चुनाव के वक्त वह जदयू से अलग हुईं नहीं कि राजनीति में लगभग अस्तित्वविहीन हो गयीं. नीतीश कुमार से नजदीकी के बाद भी जदयू से अलग हो जाने का तात्कालिक कारण जो रहा हो, उसे संसदीय चुनाव से जोड़ कर देखा गया. हुआ यह कि जदयू में संभावना नहीं देख रेणु कुमारी कुशवाहा के पति विजय कुमार सिंह कुशवाहा (Vijay Kumar Singh Kushwaha) 2014 में नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) के पूर्णिया के सभा मंच पर अचानक अवतरित हो गये. यह देख राजनीति अचंभित रह गयी. हैरानी दल विरोधी गतिविधियों के आरोपों में घिरीं रेणु कुमारी कुशवाहा को भी हुई. बिना देर किये नैतिकता के आधार पर उन्होंने मंत्री का पद त्याग दिया.

पर, उस वक्त विधानसभा और पार्टी की सदस्यता नहीं छोड़ी. इस मामले में शायद नैतिकता का ख्याल नहीं रहा. विजय कुमार सिंह कुशवाहा को मधेपुरा (Madhepura) संसदीय क्षेत्र से भाजपा की उम्मीदवारी मिली. पति को लोकसभा में कदम रखने का मौका तो नहीं ही मिला, रेणु कुमारी कुशवाहा को मंत्री के पद से हाथ धोना पड़ गया. वह तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से लंबे राजनीतिक जुड़ाव का परिणाम रहा कि विधानसभा की उनकी सदस्यता 2015 के चुनाव तक बची रह गयी. रेणु कुमारी कुशवाहा के संसदीय जीवन की शुरूआत 1999 में खगड़िया (Khagariya) के सांसद के तौर पर हुई थी. लेकिन, 2004 में वह उसी क्षेत्र में मात खा गयीं.

नीतीश कुमार से राजनीतिक निकटता का सुफल था कि 2005 के दोनो चुनावों में उन्हें मधेपुरा जिले के उदाकिशुनगंज विधानसभा क्षेत्र से जदयू की उम्मीदवारी मिल गयी और उन्होंने दोनो ही बार राजद के कद्दावर नेता डा. रवीन्द्र चरण यादव को धूल चटा दी. नये परिसीमन के बाद 2010 में रेणु कुमारी कुशवाहा बिहारीगंज (Bihariganj) से विधायक निर्वाचित हुईं. 2009 और 2010 में मंत्री का पद मिला. 2014 में जदयू का साथ छूट जाने के बाद से वह दल-दल भटक रही हैं. सदन की सदस्यता के लिए तरस रही हैं.

वैसे, पति विजय सिंह कुशवाहा की मधेपुरा की जमानत गंवाऊ हार के बावजूद उन्हें 2015 के विधानसभा चुनाव में समस्तीपुर से भाजपा की उम्मीदवारी मिली. हश्र पति सरीखा ही हुआ. 2019 के संसदीय चुनाव में वह खगड़िया से दावेदार बन गयीं. दाल नहीं गली तब अप्रैल 2019 में भाजपा से अलग हो गयीं. बाद में जुड़ाव लोजपा (LJP) से हो गया. 2020 में खगड़िया विधानसभा क्षेत्र से लोजपा की उम्मीदवारी मिल गयी. खुद तो निर्वाचित नहीं हुईं, 20 हजार 719 मत झटक जदयू उम्मीदवार पूनम देवी यादव की राह का रोड़ा जरूर बन गयीं.

पूनम देवी यादव (Punam Devi Yadav) की हार मात्र 03 हजार मतों के अंतर से हुई थी. उस चुनाव में रेणु कुमारी कुशवाहा के पति विजय कुमार सिंह कुशवाहा भी बिहारीगंज से लोजपा के उम्मीदवार थे. 08 हजार 764 मतों में सिमट गये थे. 2024 के संसदीय चुनाव में रेणु कुमारी कुशवाहा खगड़िया से लोजपा की उम्मीदवारी चाहती थीं. नजरंदाज कर दी गयीं तब उससे भी अलग हो गयीं. राजद अब उनका नया ठिकाना बना है. विधायक बनने का ख्वाब यहां भी अधूरा रह गया तो अपने राजनीतिक चरित्र के अनुरूप अगला चुनाव आते-आते वह किसी दूसरी सियासी डाल पर फुदकती दिख जायें तो वह अचरज की कोई बात नहीं होगी.