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बिंदु गुलाब यादव : झंझारपुर में है बहुत झमेला !

विजयशंकर पांडेय
26 जून 2025

Patna : बिंदु गुलाब यादव अब संभवतः सियासत में संसदीय जीवन की शुरुआत करेंगी. विधानसभा का चुनाव लड़ेंगी. इसी सीमित मकसद से विकासशील इंसान पार्टी से उनका जुड़ाव हुआ है. यह जिज्ञासा हर किसी की होगी कि आखिर बिंदु गुलाब यादव (Bindu Gulab Yadav) हैं क्या कि उन्हें बेशुमार सुर्खियां मिल रही हैं? सामान्य परिचय में बिंदु गुलाब यादव मधुबनी (Madhubani) जिला परिषद की अध्यक्ष (District Council Chairperson) हैं. लोग कहते हैं कि काबिल भी हैं. उनकी मां अम्बिका गुलाब यादव (Ambika Gulab Yadav) विधान पार्षद हैं. अब उनका विशिष्ट परिचय जानिये. वह जेल की काल कोठरी में अपनी किस्मत को कोस रहे झंझारपुर के पूर्व राजद विधायक गुलाब यादव (Gulab Yadav) की पुत्री हैं. आरोप अनेक हैं, पर गिरफ्तारी उनकी धन दोहन के मामले में हुई है.

प्रवर्तन निदेशालय का मानना है कि शराफती आवरण में शरारती आईएएस अधिकारी संजीव हंस (Sanjeev Hans) के साथ गुलाब यादव ने वैध-अवैध करोड़ों की कमाई की. संजीव हंस भी जेल की काल कोठरी में अपने गुनाहों को गिन और गुन रहे हैं. गुलाब यादव का परिचय यह है कि 2015 में वह राजद उम्मीदवार के तौर पर झंझारपुर (Jhanjarpur) से विधायक निर्वाचित हुए थे. आम चर्चा है कि करोड़ों की छप्पर फाड़ कमाई ही राजद की उनकी उम्मीदवारी की पात्रता थी. इसके अलावा कुछ नहीं. विश्लेषकों की समझ में उस वक्त जदयू (JDU) महागठबंधन का हिस्सा था इसलिए गुलाब यादव जीत गये. जदयू एनडीए (NDA) में रहता, तो शायद धन धरा रह जाता और वह मुंह की खा जाते. खैर, जीत गये तो पूरे पांच साल तक विधायक रहे.

विधायक रहते 2019 के संसदीय चुनाव में छप्पर फाड़ कमाई की ही पात्रता पर ही झंझारपुर से राजद की उम्मीदवारी मिल गयी. जीत नहीं पाये. वजह जो रही हो, 2020 के विधानसभा चुनाव में राजद नेतृत्व ने उन्हें हाशिये पर डाल झंझारपुर की सीट भाकपा के हिस्से में दे दी. भाकपा की उम्मीदवारी रामनारायण यादव (Ramnarayan Yadav) को मिली. गुलाब यादव दर्शक की भूमिका में रहे. जीत भाजपा के नीतीश मिश्र की हुई, जो वर्तमान में उद्योग मंत्री हैं. गुलाब यादव ने 2022 में बिहार विधान परिषद के मधुबनी स्थानीय प्राधिकार निर्वाचन क्षेत्र से राजद की उम्मीदवारी के लिए जोर लगाया, महत्व नहीं मिला. इस खुन्नस में पत्नी अम्बिका गुलाब यादव को मैदान में उतार परिणाम को अपने अनुकूल मोड़ दिया. एक साथ एनडीए और महागठबंधन दोनों को चित कर दिया.

उसके बाद गुलाब यादव ने 2024 के संसदीय चुनाव में बसपा उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतर राजद के अघोषित सुप्रीमो तेजस्वी प्रसाद यादव के समक्ष खुली चुनौती पेश कर दी. साध पूरी हुई. इस रूप में कि महागठबंधन के ‘वीआईपी’ उम्मीदवार सुमन कुमार महासेठ चारो खाने चित हो गये. हालांकि, 73 हजार 884 मतों में सिमट गुलाब यादव खुद की भी जमानत गंवा बैठे. ऐसा माना जा रहा है कि बिंदु गुलाब यादव पिता की झंझारपुर विधानसभा क्षेत्र की विरासत संभालने के लिए वीआईपी से जुड़ी हैं. वीआईपी महागठबंधन का हिस्सा है. उनके इस जुड़ाव को तेजस्वी प्रसाद यादव की सहमति है या नहीं, यह नहीं मालूम.

सहमति है तो इसे गुलाब यादव का उनके समक्ष ‘समर्पण’ माना जायेगा. नहीं है तो फिर बिंदु गुलाब यादव की उम्मीदवारी की संभावना क्षीण ही रहेगी. महागठबंधन में यह सीट भाकपा के हिस्से में है. वैसे, 2020 में उसके उम्मीदवार रामनारायण यादव की हुई 41 हजार 788 मतों के बड़े अंतर वाली हार के मद्देनजर उसे बेदखल कर झंझारपुर वीआईपी के हवाले कर दिया जाये तो वह चौंकने-चौंकाने वाली बात नहीं होगी. उस स्थिति में बिंदु गुलाब यादव को वीआईपी की उम्मीदवारी मिलती है या नहीं, यह देखना दिलचस्प होगा.