गोपाल खेमका प्रकरण : तो यह है मास्टरमाइंड !

तापमान लाइव ब्यूरो
09 जुलाई 2025
Patna : तारीख 20 दिसम्बर 2018… बिहार के बड़े व्यवसायियों में एक गोपाल खेमका (Gopal Khemka) के बड़े पुत्र गुंजन खेमका हाजीपुर औद्योगिक क्षेत्र (Hajipur Industrial Area) स्थित अपनी कॉटन फैक्ट्री के गेट पर पहुंचे ही थे कि उन्हें गोली मार दी गयी. गेट खुलने से पहले ही शीशा बंद गाड़ी में उन पर तीन गोलियां चलायी गयी. तत्क्षण उनकी मौत हो गयी. गुंजन खेमका (Gunjan Khemka) को छेदते हुए एक गोली कार चालक की जांघ में घुस गयी. जान बच गयी. घटना को अंजाम सिर्फ एक शूटर ने दिया, जो उनके आने के इंतजार में बाइक लिये फैक्ट्री के गेट के समीप खड़ा था. गुंजन खेमका की गाड़ी रुकी नहीं कि लक्ष्य भेद इत्मीनान से निकल गया. वक्त साढ़े ग्यारह बजे दिन का था. गुंजन खेमका की हत्या किसने की और क्यों की, इसका खुलासा बाद में.
फर्क सिर्फ इतना
साढ़े छह साल बाद…तारीख 4 जुलाई 2025… गुंजन खेमका के पिता गोपाल खेमका रोज की तरह पटना के बहुचर्चित बांकीपुर क्लब से गांधी मैदान के दक्षिण रामगुलाम चौक स्थित अपने आवास के लिए निकले. चर्चित पनाश होटल के समीप कटारूका निवास में उनका आवास है. कटारूका निवास के गेट पर वह पहुंचे नहीं कि उनका भी काम तमाम कर दिया गया. बिल्कुल उसी अंदाज में जैसे गुंजन खेमका को हाजीपुर में ढेर किया गया था. फर्क सिर्फ इतना कि हाजीपुर में शूटर को तीन गोलियां खपानी पड़ी थी, पटना में एक से ही काम चल गया.
गेट खुलने से पहले ही
इकलौता शूटर कटारूका निवास (Kataruka Residence) के गेट के बाहर पार्किंग में इंतजार कर रहा था. गोपाल खेमका की गाड़ी जैसे ही पहुंची, गेट खुलने से पहले करीब पहुंच उसने गोली चला दी. सधे अंदाज में सिर्फ एक गोली. कार का शीशा छेदते हुए वह गोली गोपाल खेमका के सिर में धंस गयी. फिर जो होना था वह हो गया. वक्त 11.40 बजे रात का था. सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage) में दिख रहा है कि गोली दागने के बाद शूटर इत्मीनान से पीछे मुड़ा और कुछ ही कदम दूर खड़ी स्कूटी पर सवार हो जेपी गोलम्बर होते हुए निकल गया. कैसे और किस रास्ते से गया यह स्पष्ट नहीं है,
एक और रक्तरंजित अध्याय
पुलिस के मुताबिक उसका अंतिम लोकेशन हाजीपुर में मिला. वैसे, सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव का कहना रहा कि शूटर कहीं और नहीं, पटना सिटी (Patna City) में ही छिपा हुआ है. गुंजन खेमका और गोपाल खेमका की हत्या से जुड़ा एक और रक्तरंजित अध्याय है. यह कि 20 दिसम्बर 2018 और 04 जुलाई 2025 के बीच एक तारीख और चर्चा में आयी. 18 दिसम्बर 2021 की तारीख. उस तारीख को पटना बायपास पर कसेरा धर्मकांटा के समीप शातिर अपराधी अभिषेक वर्मा उर्फ मस्तु (Abhishek Verma aka Mastu) को ठीक उसी अंदाज में ठोक दिया गया जैसे पहले गुंजन खेमका और बाद में गोपाल खेमका को ठोका गया. अंतर इतना कि इस वारदात में शूटर को गोलियां कुछ अधिक खपानी पड़ी और मौत एक नहीं, दो हुई.

वहां भी शूटर एक था
मीडिया में जो बातें आयीं उसके मुताबिक अभिषेक वर्मा उर्फ मस्तु उस दिन कारोबारी करीबी सुनील कुमार के साथ कार से कहीं जा रहा था. कार सुनील कुमार चला रहा था. भीषण सड़क जाम की वजह से कसेरा धर्मकांटा के समीप कार रुक गयी. उसी दौरान बाइक सवार शूटर ने बिल्कुल करीब से शीशा बंद गाड़ी में गोली दाग अभिषेक वर्मा उर्फ मस्तु को मौत की नींद सुला दी. हत्यारे का लक्ष्य सिर्फ वही था. सुनील कुमार ने हस्तक्षेप किया तो वह भी मारा गया. वहां भी शूटर एक था. भीषण सड़क जाम में भी आराम से निकल गया.
इसलिए मारा गया
यहां यह सवाल हर दिमाग में कौंध रहा होगा कि गुंजन खेमका और गोपाल खेमका की हत्या से अभिषेक वर्मा उर्फ मस्तु की हत्या का क्या संबंध है? संबंध है. गोपाल खेमका की हत्या से नहीं, गुंजन खेमका की हत्या से. अभिषेक वर्मा उर्फ मस्तु तीन अन्य लोगों के साथ गुंजन खेमका हत्याकांड में आरोपित था. पुलिस के अनुसार हत्या में मुख्य भूमिका उसी की थी. संभवतः गुनाह भी कबूल कर लिया था. हत्याकांड के सूत्रधार को वह बखूबी जानता था. पुलिस के समक्ष मुंह खुलता उससे पहले उसे मौत के मुंह में झोंक दिया गया. मामले में चार लोगों की गिरफ्तारी हुई थी.
सभी अजय वर्मा से जुड़े थे
मीडिया में बातें आयीं कि सभी अजय वर्मा (Ajay Verma) से जुड़े थे. कहते हैं कि अभिषेक वर्मा उर्फ मस्तु का जुड़ाव भी अजय वर्मा से था. गोपाल खेमका की हत्या के मामले में भी पुलिस अजय वर्मा को भी केन्द्र में रख अनुसंधान कर रही है. सांसद पप्पू यादव भी उसकी भूमिका की बात करते हैं. पर, साथ में यह भी जोड़ते हैं कि वह महज मोहरा है. सूत्रधार बहुत ताकतवर है. बड़े पद पर रहते हुए अप्रत्यक्ष रूप से अपने संरक्षण में जमीन का गोरखधंधा करा रहा है. आज से नहीं, वर्षों से.
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