तापमान लाइव | Tapmanlive

न्यूज़ पोर्टल | Hindi News Portal

डुमरांव : ‘दादा’ की है यह अंतिम इच्छा!

राजकिशोर सिंह
09 जुलाई 2025

Patna : यह हर किसी के संज्ञान में है कि जदयू (JDU) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पूर्व सांसद वशिष्ठ नारायण सिंह (Vashishtha Narayan Singh) की मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) से सम्मान भरी घनिष्ठता है. आज से नहीं, छात्र आंदोलन के समय से ही दोनों का मन मिजाज लगभग एक सा है. इसके बावजूद इस घनिष्ठता को वशिष्ठ नारायण सिंह के पुत्र प्रशांत कुमार उर्फ सोनू सिंह (Prashant Kumar alias Sonu Singh) की विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) में जदयू की उम्मीदवारी की गारंटी नहीं मानी जा सकती है. राजनीति के गलियारे में चर्चा है कि प्रशांत कुमार उर्फ सोनू सिंह बक्सर जिले के डुमरांव विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवारी चाहते हैं.

दूर ही रखना चाहेगा

वैसे, राजनीति में असंभव कुछ भी नहीं होता. यह प्रशांत कुमार उर्फ सोनू सिंह के मामले में भी चरितार्थ हो जाये तो वह चकित करने वाली कोई बात नहीं होगी. लेकिन, विश्लेषकों का मानना है कि हाल फिलहाल कुछ बोर्डोंं और आयोगों में एनडीए के नेताओं के ‘दामादों’ को स्थापित करने को लेकर महागठबंधन (Mahagathbandhan) के नेताओं ने जो सियासी तूफान खड़ा कर रखा है उसके मद्देनजर जदयू नेतृत्व नये नेता पुत्रों को विधानसभा चुनाव से दूर ही रखना चाहेगा. उनकी उम्मीदवारी से चुनावी गणित गड़बड़ा न जाये इसका ख्याल रखेगा.

बदल गया है समीकरण

जहां तक जदयू के ‘दादा’ वशिष्ठ नारायण सिंह के पुत्र प्रशांत कुमार उर्फ सोनू सिंह की बात है तो राजनीति में गौर करने लायक उनकी कोई सार्वजनिक सक्रियता नहीं रही है. विश्लेषकों की नज़र में जदयू से विधानसभा का चुनाव लड़ने की पात्रता उनकी इतनी भर है कि वह पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह के पुत्र हैं. विधायक (MLA) बनने का सपना लंबे समय से संयो रखे हैं. उम्मीदवारी का आधार वह डुमरांव के राजपूत बहुल होने को बना सकते हैं. यह सच है कि पूर्व में राजपूत समाज के विधायक निर्वाचित होते थे. पर, सन् 2000 के चुनाव में समीकरण पूरी तरह बदल गया.

दुर्गति हो गयी

सन् 2000 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अखाड़े में उतरे ददन सिंह यादव उर्फ ददन पहलवान (Dadan Pahalwan) ने क्षत्रिय खूंटा को इस कदर उखाड़ दिया कि वह फिर जम नहीं पाया. आंकड़ों पर नजर दौड़ायें तो पिछले छह चुनावों में कभी राजपूत उम्मीदवार की जीत नहीं हुई. चार चुनावों में ददन सिंह यादव उर्फ ददन पहलवान की जीत हुई. 2010 में ददन पहलवान जदयू के दाऊद अली (Daud Ali) से मात खा गये. लेकिन, 2015 में जदयू प्रत्याशी के तौर पर चौथी जीत मिल गयी. 2020 में निर्दलीय मैदान में उतरे तो दुर्गति हो गयी. कोई हैसियत ही नहीं बची. हद यह कि दस हजार का आंकड़ा भी नहीं छू पाये.

जीत भाकपा-माले की हुई

जीत महागठबंधन के भाकपा-माले उम्मीदवार अजीत कुमार सिंह कुशवाहा (Ajit Kumar Singh kushwaha) की हुई. जदयू की उम्मीदवारी अंजुम आरा को मिली थी जो 24 हजार 415 मतों से पिछड़ गयीं. इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि डुमरांव के बदले राजनीतिक- सामाजिक समीकरण में प्रशांत कुमार उर्फ सोनू सिंह के लिए कोई संभावना नहीं बनती है.