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पप्पू यादव और कन्हैया कुमार : इस कारण चढ़ने नहीं दिया

महेश कुमार सिन्हा
10 जुलाई 2025

Patna : यह सर्वविदित है कि निर्वाचन आयोग (Election Commission) द्वारा बिहार में चलाये जा रहे मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण पर विपक्षी महागठबंधन (Mahagathbandhan) को गहरी आपत्ति है. आपत्ति इस आशंका को लेकर है कि गहन पुनरीक्षण में पिछड़ा, अतिपिछड़ा, दलित और मुस्लिम समुदाय के अधिसंख्य मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से निकाल दिये जा सकते हैं. उन्हें मताधिकार से वंचित कर दिया जा सकता है. ऐसे मतदाताओं को वह महगठबंधन समर्थक सामाजिक समूह मानता है.

आशंका आधारहीन नहीं

निर्वाचन आयोग इस आशंका को लगातार आधारहीन बता रहा है. भारत के किसी भी नागरिक का नाम मतदाता सूची (Voter list) से बाहर नहीं होने का भरोसा दिला रहा है. पर, विपक्षी महागठबंधन को उस पर भरोसा नहीं जम रहा है. क्यों नहीं जम रहा है, उसके पास अनेक तर्क हैं. इस बीच मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण के विरोध में महागठबंधन ने 09 जुलाई 2025 को बिहार बंद (Bihar Band) का आयोजन किया. बंद की सफलता और विफलता को लेकर पक्ष और विपक्ष के अपने- अपने दावे हैं.

सब गुड़ गोबड़ कर दिया

वैसे, तटस्थ नजरों में बिहार बंद का मिलाजुला असर रहा. बंद के दौरान पटना में कांग्रेस (Congress) नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और राजद नेता तेजस्वी प्रसाद यादव (Tejaswi Prasad Yadav) की जुगलबंदी चर्चा में रही. महागठबंधन के अन्य घटक दलों के नेताओं के साथ इन दोनों ने सुसज्जित मंचनुमा खुले ट्रक पर सवार हो आयकर गोलम्बर से निर्वाचन आयुक्त कार्यालय तक प्रतिकार मार्च निकाला. विश्लेषकों की नजर में बिहार बंद का उल्लेख करने लायक हिस्सा राहुल गांधी और तेजस्वी प्रसाद यादव के संयुक्त नेतृत्व वाला यही प्रतिकार मार्च था. लेकिन, उसी क्रम में सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव (Pappu Yadav) और राहुल गांधी के करीबी कन्हैया कुमार (Kahaniya Kumar) के साथ हुए कथित अपमानजनक व्यवहार ने सब गुड़ गोबर कर दिया.

बन गये भीड़ का हिस्सा

सामान्य समझ में राहुल गांधी और तेजस्वी प्रसाद यादव की जुगलबंदी का आकर्षण उसी अपमानजनक व्यवहार में लुप्त हो गया. अपमानजनक व्यवहार इस रूप में दिखा कि जिस सुसज्जित खुले ट्रक पर राहुल गांधी, तेजस्वी प्रसाद यादव, दीपंकर भट्टाचार्य, मुकेश सहनी आदि मंचासीन थे उस पर सांसद पप्पू यादव और कन्हैया कुमार को चढ़ने नहीं दिया गया. दोनों ने खूब कोशिश की. सुरक्षाकर्मियों ने रोक दिया. संबंधित वायरल वीडियो (Viral Vedio) में बिल्कुल साफ नजर आ रहा है कि पप्पू यादव ने कोशिशें तीन बार की. शरीर भारी रहने की वजह से चढ़ नहीं पा रहे थे, फिसल जा रहे थे. तभी सुरक्षाकर्मियों ने रोक दिया. कन्हैया कुमार ने एक प्रयास किया. सुरक्षाकर्मियों ने रोक दिया. बगैर किसी प्रतिक्रिया के वह भीड़ का हिस्सा बन गये.

हैरान रह गये लोग

यहां गौर करने वाली बात है कि पप्पू यादव और कन्हैया कुमार को तो रोक दिया गया, पर उनके बाद पहुंचे राजेश राम और शकील अहमद खान को ससम्मान चढ़ने दे दिया गया. लोग हैरान रह गये कि निर्दलीय सांसद रहने के बाद भी दिन-रात कांग्रेस-कांग्रेस की रट लगाने वाले पप्पू यादव और बिहार में कांग्रेस की जड़ें फिर से जमाने में जी जान से जुटे कन्हैया कुमार के साथ ऐसा सलूक क्यों हुआ? मामला राजनीति के लिए गर्म मुद्दा बन गया तब मीडिया में पप्पू यादव का बयान आया. उनका कहना रहा कि अपमान और स्वाभिमान क्या होता है वह नहीं जानते. कांग्रेस और राहुल गांधी से उनका वैचारिक संबंध है और रहेगा. मंच पर चढ़ने वालों में उनका नाम नहीं था, वह नहीं चढ़े.

चाल थी राजद की

पप्पू यादव जो कहें, इस प्रकरण पर राजनीति की समझ यही बनी कि राजद के अघोषित सुप्रीमो तेजस्वी प्रसाद यादव के अहं को ठेस नहीं पहुंचे इसी को दृष्टिगत रख प्रतिकार मार्च में पप्पू यादव और कन्हैया कुमार को महत्व नहीं मिला. कहते हैं कि चाल यह राजद की थी. साथ प्रदेश कांग्रेस के उन नेताओं का भी मिला जिनके लिए पप्पू यादव और कन्हैया कुमार राजनीतिक रूप से अपच माने जाते हैं. बहरहाल, इस प्रकरण का राज्य की राजनीति पर क्या असर पड़ता है, पड़ता भी है या नहीं, यह जानने- समझने के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा.