गोपाल खेमका हत्याकांड : अब भी अनसुलझा है रहस्य

विष्णुकांत मिश्र
16 जुलाई 2025
Patna : बड़ी उम्मीद थी लोगों को कि गोपाल खेमका (Gopal Khemka) हत्याकांड में पुलिस अनुसंधान के बड़े अभियान का कोई बड़ा परिणाम सामने आयेगा. तथ्य और साक्ष्य आधारित तर्कसंगत परिणाम. परिणाम आया. पुलिस उसे तथ्य और साक्ष्य आधारित मान रही है. अनुसंधान में आगे और खुलासा होने की बात कह रही है. उसके खुलासे को सिरे से खारिज नहीं किया जा सकता. संभव है यही सच हो. पर, आम लोग इसे ‘खोदा पहाड़ निकली चुहिया’ के रूप में देख और समझ रहे हैं. यह बहुप्रचलित मुहावरा है. इस प्रसंग में इसका प्रयोग पुलिस महकमे को निसन्देह तीता लग सकता है. तिलमिलाहट भी पैदा कर दे सकता है.
अनुसंधान में भटकाव
पर, संदेह आधारित इस सामान्य समझ को भी एकबारगी निरस्त नहीं किया जा सकता. इसलिए भी नहीं कि पुलिस के खुलासे के संदर्भ में एक-एक कर जो नयी बातें सामने आ रही हैं उससे जाने- अनजाने ऐसी धारणा को मजबूती मिल रही है. वैसे, ऐसा भी हो सकता है कि ऐसी बातें पुलिस के अनुसंधान में भटकाव लाने और आरोपितों को बचाने के मकसद से की जा रही हो. इससे हर कोई वाकिफ है कि बिहार (Bihar) के बड़े व्यवसायी गोपाल खेमका की 04 जुलाई 2025 की रात 11.40 बजे पटना के गांधी मैदान (Gandhi Maidan) थाना क्षेत्र में रामगुलाम चौक (Ramgulam Chowk) के समीप स्थित उनके आवास के गेट पर गोली मारकर हत्या कर दी गयी. हत्या क्यों हुई और किसने की, लाख हाथ-पांव मारने के बाद भी शहर में कोई ठोस सुराग नहीं मिला तो पुलिस पटना के बेऊर जेल (Beur Jail) में पहुंच गयी.
बेऊर जेल में छापामारी
इसे गोपाल खेमका की हत्या से हतप्रभ मुख्यमंत्री (Chief Minister) नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के कड़े तेवर का असर कहिये या लगभग तीन सौ मीटर दूर स्थित घटना स्थल पर डेढ़-दो घंटे बाद पहुंचने की पुलिस की काहिली से ध्यान हटाने की चाल, घटना के दूसरे दिन 05 जुलाई 2025 को प्रमंडलीय आयुक्त चन्द्रशेखर सिंह (Chandrashekhar Singh) और पुलिस महानिरीक्षक जितेन्द्र राणा (Jitendra Rana) के नेतृत्व में वरीय पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के शर्मा (Karthikeya K Sharma) , चार नगर पुलिस अधीक्षक, अनेक पुलिस उपाधीक्षक एवं बारह थानाध्यक्षों के अलावा भारी संख्या में पुलिसकर्मियों का काफिला सुराग तलाशने बेऊर जेल में धमक गया. सिर्फ बेऊर जेल में नहीं, फतुहा (Fatuha) औद्योगिक क्षेत्र और आरा (Ara) में भी छापेमारी हुई. दानापुर (Danapur) और हाजीपुर (Hajipur) में भी पुलिस ने बहुत कुछ खंगाला.

यह भी इतिहास बन गया
चौंकाने वाली बात यह रही कि बेऊर जेल में इतनी बड़ी छापामारी पहले शायद ही कभी हुई होगी. इस वृहत छापेमारी अभियान में पुलिस को क्या कुछ हासिल हुआ, यह नहीं कहा जा सकता. जेल में बंद अजय वर्मा (Ajay Verma), नेयाज अहमद (Neyaz Ahmed) , चांद मियां (Chand Miyan) आदि अनेक शातिरों से पूछताछ में पुलिस को सुराग संभवतः इतना भर मिला कि गोपाल खेमका की हत्या जमीन के मामले को लेकर हुई. संदेह अजय वर्मा गिरोह पर गया. मीडिया में ऐसा कुछ स्थापित भी हो रहा था. इसी बीच 07 जुलाई 2025 को पुलिस मुख्यालय (Police headquarters) में बड़ी प्रेस कान्फ्रेंस आयोजित हुई. संभवतः यह भी इतिहास बन गया कि पहली बार इतने पुलिस अधिकारियों ने एक साथ प्रेस को संबोधित किया.
हत्या जमीन के विवाद में
पुलिस महानिदेशक विनय कुमार (Vinay Kumar) , अपर पुलिस महानिदेशक (अभियान) कुन्दन कृष्णन (Kundan Krishnan) , पटना प्रक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक जितेन्द्र राणा और पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के शर्मा ने बहुत कुछ जानकारियां दी. मुकम्मल रूप में निष्कर्ष यह निकला कि गोपाल खेमका की हत्या जमीन के विवाद में हुई. हत्या कथित रूप से जमीन के कारोबारी अशोक साव (Ashok Saav) ने चार लाख रुपये की सुपारी देकर तथाकथित शूटर उमेश यादव (Umesh Yadav) के जरिये करायी. किस जमीन के विवाद में गोपाल खेमका की हत्या हुई, पुलिस महानिदेशक इसका खुलासा नहीं कर पाये.
मनगढ़ंत कहानी
प्रेस कान्फ्रेंस की बात छोड़िये, घटना के कई दिन गुजर जाने के बाद भी हत्या क्यों हुई, यह रहस्य अनसुलझा है. इस बीच जेल में बंद अशोक साव और उमेश यादव को रिमांड पर लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है. उसमें भी पुलिस महानिदेशक के खुलासे का आधार कमजोर पड़ता दिख रहा है. आगे क्या होगा यह वक्त बतायेगा, फिलहाल विश्लेषकों की नजर में पुलिस के उद्भेदन की पूरी कहानी मनगढ़ंत जैसी प्रतीत होती है. तापमान लाइव की अगली प्रस्तुति में हम उसकी भी चर्चा करेंगे.
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