हरनौत का हाल : कांग्रेस में हैं अनेक दावेदार

डा. अरुण कुमार मयंक
18 जुलाई 2025
Harnaut : मुख्यमंत्री (Chief Minister) नीतीश कुमार (Nitish Kumar) का गृह विधानसभा क्षेत्र हरनौत जदयू (JDU) का अभेद्य गढ़ है, यह प्रायः हर कोई मानता है. हरनौत नालंदा (Nalanda) संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है. इस विधानसभा क्षेत्र का इतिहास 1977 से शुरू होता है. इसी विधानसभा क्षेत्र से हार के साथ नीतीश कुमार के संसदीय जीवन की शुरुआत हुई. वह भी उस इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. हरनौत क्षेत्र से जुड़ा रोचक तथ्य यह भी है कि 1977 से 2020 तक हुए 11 चुनावों में न कभी कांग्रेस (Congress) की जीत हुई और न राजद (RJD) की. कुछ चुनावों में लोजपा (LJP) मुख्य मुकाबले में रही, पर जीत का स्वाद वह भी नहीं चख पायी.
खुद जोखिम नहीं उठाता
एक तरह से कहें तो चुनाव के दृष्टिकोण से यह क्षेत्र राजद और कांग्रेस, दोनों के लिए मरूभूमि के समान है. संभवतः इसी को दृष्टिगत रख राजद बड़ी चालाकी से इस सीट को सहयोगी दल के हिस्से में डाल देता है. खुद चुनाव मैदान में उतरने का जोखिम नहीं उठाता है. 2020 में महागठबंधन (Grand Alliance) में यह सीट कांग्रेस के हिस्से में थी. स्थानीय कोई दमदार नहीं मिला तो उसने लखीसराय (Lakhisarai) निवासी कुंदन गुप्ता (Kundan Gupta) को उम्मीदवार बना दिया. कुंदन गुप्ता उस वक्त प्रदेश कांग्रेस अत्यंत पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के अध्यक्ष थे.

दोहराव की संभावना नहीं
उल्लेख करने लायक चेहरा तो था, पर हरनौत के राजनीतिक-सामाजिक समीकरण के अनुकूल उनकी उम्मीदवारी नहीं थी. बाहरी होने का मुद्दा भी जगह बनाये हुए था. परिणाम उसी के अनुरूप आया. 21 हजार 144 मतों के साथ वह तीसरे स्थान पर अटक गये. जीत जदयू के हरिनारायण सिंह (Harinarayan Singh) की हुई. मुख्य मुकाबले में लोजपा की ममता देवी (Mamta Devi) रहीं. आसार यही दिख रहे हैं कि 2020 में फजीहत के बाद भी 2025 में भी महागठबंधन में यह सीट कांग्रेस के हिस्से में रहेगी. पर, कुंदन गुप्ता की उम्मीदवारी का दोहराव होगा, इसकी संभावना नहीं दिखती है.
अनुशासनहीनता का आरोप
कारण कि कांग्रेस में वह प्रदेश स्तरीय अनुशासनहीनता का बड़ा आरोप झेल रहे हैं. कुंदन गुप्ता की बात छोड़िये, सुकून की बात यह कि कांग्रेस के लिए मरूभूमि सरीखा रहने के बाद भी इस बार स्थानीय स्तर पर कई दावेदार अपनी संभावना संवारते नजर आ रहे हैं. वैसे दावेदारों में एक पूर्व विधायक अनिल सिंह (Anil Singh) भी हैं. कांग्रेस के बहुचर्चित व बहुप्रतिष्ठित नेता रहे पूर्व मंत्री स्वर्गीय डा. रामराज सिंह (Dr. Ramraj Singh) के पुत्र अनिल कुमार पहले जदयू में थे. एक बार विधायक भी निर्वाचित हुए थे. बाद के दिनों में जदयू में संभावना नहीं दिखी तब भाजपा (BJP) में शामिल हो गये. वर्षों जमे रहने के बाद भी कमल छाप भगवा पट्टा के अलावा और कुछ हासिल नहीं हुआ. इधर हरनौत से उम्मीदवारी की आस लिये कांग्रेस में लौट आये.

तब भी आशान्वित हैं
क्षेत्र के लोग बताते हैं कि कांग्रेस की उम्मीदवारी की चाहत 2020 में लोजपा उम्मीदवार के तौर पर 38 हजार 163 मत हासिल कर दूसरे स्थान पर रहीं ममता देवी की भी है. कहा जाता है कि उनके रणनीतिकार अपने तई खूब प्रयास भी कर रहे हैं, पर पति संजीव मुखिया (Sanjeev Mukhiya) के नीट पेपर लीक मामले में संलिप्तता के आरोपों को आधार बना जिला कांग्रेस का ही एक तबका उसमें अवरोध खड़ा कर रहा है. फलाफल क्या निकलता है, देखना दिलचस्प होगा. हालांकि, ममता देवी अब भी लोजपा-आर (LJP-R) में जमी हैं. उम्मीदवारी के दोहराव के प्रति आशान्वित भी हैं.
लगा रखी है आस
कांग्रेस में बड़ी दावेदारी पटना उच्च न्यायालय (Patna High Court) के अधिवक्ता (Advocate) सुनील कुमार सिन्हा (Sunil Kumar Sinha) की भी है. वह नालंदा जिला कांग्रेस के उपाध्यक्ष रहे हैं. इस बार अध्यक्ष पद के दावेदार थे. किसी कारणवश अवसर नहीं मिल पाया. सम्प्रति कांग्रेस विधि प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं. 13 जुलाई 2025 को केन्द्रीय पर्यवेक्षक विनोद चन्द्राकर (Vinod Chandrakar) की मौजूदगी में हरनौत में आयोजित कांग्रेस कार्यकर्ता सम्मान समारोह में सुनील कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाने की मांग उठायी गयी. उधर महागठबंधन में हरनौत की सीट के राजद के हिस्से में जाने की संभावना क्षीण रहने के बावजूद डा. अरुण कुमार बिंद (Dr. Arun Kumar Bind) और संजय सिंह (Sanjay Singh) जैसे कई नेताओं ने उम्मीदवारी की आस लगा रखी है.
जनसुराज की हवा
डा. अरुण कुमार बिंद 2010 और 2015 में हरनौत से लोजपा के उम्मीदवार थे. 2020 में राजद से जुड़ गये. कभी नालंदा जिला युवा राजद के अध्यक्ष रहे संजय सिंह की संभावना इस वजह से भी नहीं बनती है कि वह कुर्मी बिरादरी से हैं. एक-दो अपवादों को छोड़ हाल के चुनावों में राजद ने नालंदा जिले में कभी कुर्मी जाति से उम्मीदवार नहीं उतारा है. बहरहाल, अन्य क्षेत्रों की तरह यहां भी मंद-मंद ही सही, जनसुराज की बदलाव वाली हवा बह रही है. जनसुराज पार्टी के संभावित उम्मीदवार के रूप में मुन्ना सिंह (Munna Singh) के नाम से ज्यादा चर्चित चन्द्र उदय कुमार (Chandra Uday Kumar) की चर्चा खूब हो रही है. मुन्ना सिंह सेवदह गांव के रहने वाले हैं जो नीतीश कुमार के गांव कल्याण बिगहा (Kalyan Bigha) के पश्चिम में बसा है. खास बात यह कि नीतीश कुमार की ससुराल इसी सेवदह (Sevadah) गांव में है.
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