कलह का कुनबा : महागठबंधन में महाझमेला…!

राजकिशोर सिंह
21 जुलाई 2025
Patna : बिहार (Bihar) विधानसभा के 2025 के चुनाव की सरगर्मी धीरे-धीरे रंग पकड़ रही है. इसी क्रम में महागठबंधन (Grand Alliance) में घटक दलों की संख्या बढ़ रही है, तो सीटों के बंटवारे को लेकर कलह भी विस्तारित हो रहा है. गौर तलब है कि 2020 के चुनाव के वक्त महागठबंधन के पांच घटक दल थे. राजद (RJD) और कांग्रेस (Congress) के अलावा तीन वामपंथी दल. भाकपा-माले (CPI-ML) , भाकपा (CPI) और माकपा (CPI(M)) . सीटों के बंटवारे में कोई खास खिचखिच नहीं हुई थी. उस चुनाव के बाद महागठबंधन से तीन और दलों का जुड़ाव हुआ. वीआईपी (VIP) , रालोजपा (RLJP) और झामुमो (JMM) का. वीआईपी 2024 के संसदीय चुनाव के पहले से जुड़ी हुई है.
तय होना अभी बाकी है
बिहार में नहीं, झारखंड (Jharkhand) में झामुमो का महागठबंधन से पुराना रिश्ता रहा है. नये दल के तौर पर रालोजपा को शामिल किया गया है. हालांकि, झामुमो और रालोजपा की महागठबंधन में हैसियत क्या रहेगी, स्थायी सदस्य की मान्यता मिलेगी या विशेष आमंत्रित सदस्य की, यह तय होना अभी बाकी है. विश्लेषकों की समझ में महागठबंधन में तीन और दलों के जुड़ाव से सीट बंटवारे का मामला कुछ अधिक उलझ गया प्रतीत हो रहा है. और जो है सो तो है ही, गौर करने वाली बात यह है कि घटक दलों की बेहिसाब दावेदारी से राजद के अघोषित सुप्रीमो तेजस्वी प्रसाद यादव (Tejashwi Prasad Yadav) की पेशानी पर बल पड़ गये हैं.
सर्वमान्य समाधान संभव नहीं
उनके लिए ज्यादा मुश्किल कांग्रेस के 2020 की तरह 70 सीटों पर दावा जताने से खड़ी हो गयी है. 2020 में 70 में से सिर्फ 19 पर ही कामयाब रहने के आधार पर ज्यादा दबाव पड़ा तब कांग्रेस पांच-दस सीटें छोड़ने पर सहमत हो भी जाती है तब भी सर्वमान्य समाधान शायद ही निकल पायेगा. इसलिए कि वीआईपी की मांग कथित रूप से 60 सीटों की है. पूर्व से जुड़े घटक दलों की हैसियत से बड़ी दावेदारी से उलझनें तो थी हीं, वीआईपी की बड़ी दावेदारी ने नयी मुसीबत खड़ी कर दी है.

बेहतर स्ट्राइक रेट
2020 में 19 सीटों पर चुनाव लड़ 12 पर जीत हासिल करने वाली भाकपा-माले की दावेदारी 40 सीटों पर है. इतनी बड़ी दावेदारी का आधार यह कि अन्य घटक दलों की तुलना में 2020 में उसका स्ट्राइक रेट काफी बेहतर रहा था. भाकपा और माकपा के हिस्से में क्रमशः छह और चार सीटें थीं. जीत दो-दो पर हुई थी. दोनों पार्टियां भी सीटों में बढ़ोतरी की चाहत रखती हैं. परन्तु, खुले तौर पर कोई दावा नहीं जता रही हैं. रालोजपा (RLJP) की भी कोई दावेदारी नहीं है. जो मिल जायेगा उसे स्वीकार कर लेगी. उधर झामुमो ने 12 सीटों का दावा पेश कर रखा है.
राजद के लिए 48 सीटें
जहां तक महागठबंधन के मुख्य घटक राजद की बात है तो 2020 में उसके 144 उम्मीदवार थे. 75 पर जीत हुई थी. इस बार दूसरे घटक दलों के दावों के अनुरूप सीटें बांट दी गयीं तब राजद के हिस्से में कांग्रेस और वीआईपी से भी कम सिर्फ 48 सीटें रह जायेंगी. इस दावे से अलग लोकसभा चुनाव (Lok Sabha elections) की हिस्सेदारी आधारित फार्मूला बना तो 23 निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ने वाले राजद को 138, 09 क्षेत्रों में लड़ने वाली कांग्रेस को 54, तीन-तीन सीटों पर लड़ने वाली भाकपा-माले और वीआईपी को 18-18 सीटें तथा एक-एक सीट पर लड़ने वाली भाकपा और माकपा को 06-06 सीटें मिल सकती हैं.
रालोजपा का क्या होगा?
इस रूप में बंटवारे के बाद दो सीटें बचेंगी उन दो को झामुमो के हिस्से में डाला जा सकता है. फिर रालोजपा का क्या होगा? इस सवाल और घटक दलों की दावेदारी के बीच सीट बंटवारे को लेकर हो रहे मंथन में जो फार्मूला निकला है उसके मुताबिक कांग्रेस को 55, भाकपा-माले को 20, भाकपा को 06, माकपा को 04, वीआईपी को 12, रालोजपा को 03 और झामुमो को 02 सीटें मिल सकती हैं. इन दलों को देने के बाद राजद के लिए 141 सीटें बचती हैं. थोड़ा बहुत उलटफेर के साथ महागठबंधन में सीटों का बंटवारा इसी हिसाब से हो जाये तो वह चौंकने वाली कोई बात नहीं होगी.
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