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चिराग पासवान : विधि-व्यवस्था पर सवाल, एनडीए में उबाल

महेश कुमार सिन्हा
28 जुलाई 2025

PATNA : लोजपा-आर सुप्रीमो केन्द्रीय मंत्री चिराग पासवान (Chirag Paswan) का नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार (NDA government) को कटघरे में लाने का सिलसिला बना हुआ है. अलग-अलग मुद्दे को लेकर वह राज्य प्रशासन को निकम्मा बताते रहते हैं. एक तरह से कहें तो नीतीश कुमार (Nitish Kumar) को ही लक्षित कर रहे हैं. इधर के दिनों में बिहार की अनियंत्रित-सी हो गयी विधि-व्यवस्था को लेकर सरकार की खूब लानत-मलामत कर रहे हैं. सत्तारूढ़ एनडीए के सहयोगी के तौर पर हालात पर चिंता नहीं जता विपक्षी नेताओं से भी कहीं अधिक आक्रामक अंदाज में सरकार की आलोचना (Criticism of Government) कर रहे हैं, पुलिस प्रशासन को नाकाबिल और निकम्मा बता रहे हैं. हद यह कि एनडीए में रहते एनडीए की सरकार का साथ देने पर अफसोस व्यक्त कर रहे हैं.

उन्हें दुख है कि वह

चिराग पासवान ने विधि-व्यवस्था के मुद्दे पर खुले तौर पर कहा-‘बिहार में हत्या, अपहरण, लूट, डकैती, बलात्कार की शृंखला-सी बन गयी है. प्रशासन एक तरह से नतमस्तक दिख रहा है. ऐसी घटनाओं को रोकने में वह नाकाम है. अगर ऐसे ही चलता रहा तो यह प्रदेश में भयावह स्थिति उत्पन्न कर देगा. बल्कि यूं कहें, भयावह स्थिति उत्पन्न हो चुकी है. उन्हें दुख है कि वह ऐसी सरकार का समर्थन कर रहे हैं.’ हालांकि, अपराध वृद्धि को विपक्ष की साजिश बता उन्होंने खुद का बचाव भी कर लिया. चिराग पासवान के इस बयान पर एनडीए की बिहार की राजनीति (Politics of Bihar) में तूफान खड़ा हो गया है. भाजपा (BJP) पूर्व की तरह मौन है, पर जदयू ने कड़ा पलटवार किया है.

दिया करारा जवाब

जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद (Rajeev Ranjan Prasad) और प्रदेश जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार (Neeraj Kumar) ने अपने-अपने अंदाज में प्रत्यक्ष- अप्रत्यक्ष चिराग पासवान को जबर्दस्त जवाब दिया. राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि राजनेताओं को बयान देने से पहले अपने गिरेबां में झांकना चाहिये. उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिये कि वह अपनी पार्टी में अपराधियों को एंट्री न दें. राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि देश में अपराध मुक्त राज्य की कल्पना नहीं की जा सकती है. अपराध कहीं भी हो सकता है, लेकिन जरूरी यह है कि वहां की पुलिस कार्रवाई कैसे करती है. बिहार में अपराधियों पर पुलिस आज भी भारी है और आगे भी भारी रहेगी.

मांझी ने भी लिया आड़े हाथों

नीरज कुमार ने कहा अति सर्वत्र वर्जयेत. उनका शरीर कहीं है, आत्मा कहीं है. इस पीड़ा का खात्मा नहीं हो सकता है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) का भरोसा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर है… चिराग पासवान का मन विचलित हो रहा हो तो वह जानें… जनता का भरोसा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर है. केन्द्रीय मंत्री जीतनराम मांझी (Jeetanram Manjhi) ने भी चिराग पासवान को आड़े हाथों लिया. कहा कि उन्हें ख़ुशी है कि वह बिहार में एक ऐसी सरकार का समर्थन कर रहे हैं, जो अपराध और अपराधियों से कोई समझौता नहीं करती. जो हर आपराधिक घटनाओं का न केवल ख़ुलासा करती है बल्कि वारदातों में शामिल अपराधियों को सलाखों के पीछे भी भेजती है. हमें गर्व है कि बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में सुशासन की सरकार है.

राजनीतिक अपरिपक्वता

चिराग पासवान के बयान पर एनडीए के नेताओं का बिफरना स्वाभाविक है. राजनीति के निष्पक्ष विश्लेषकों का भी मानना है कि चिराग पासवान की बयानबाजी में राजनीतिक अपरिपक्वता दिखती है. नीतीश कुमार की सरकार पर गाहे-बगाहे लगाये जा रहे उनके ज्यादातर आरोप आधारहीन ही नहीं, गठबंधन धर्म के विरुद्ध होते हैं. ऐसे बयानों से एनडीए समर्थकों और सहयोगी दलों में भ्रम फैलाने की इस कोशिश को राजनीतिक अवसरवादिता ही कहा जायेगा. उनकी समझ में आसन्न विधानसभा चुनाव के परिप्रेक्ष्य में चिराग पासवान द्वारा नीतीश कुमार की आलोचना का मतलब राजनीतिक रणनीति ही नहीं, बल्कि अवसरवादिता और भ्रम फैलाने जैसा प्रतीत होता है.

एकतरफा और अतिरंजित

सामान्य समझ है कि चिराग पासवान की बयानबाजी में सरकार की नीतियों और प्रशासनिक विफलताओं (Administrative Failures) के प्रति उसे सचेत करना नहीं, सस्ती लोकप्रियता के लिए मुद्दों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की राजनीति झलकती है. विधि-व्यवस्था के मुद्दे को जिस तरह से हवा दे रहे हैं, वह एकतरफा और अतिरंजित दिखता है. जिस सरकार का साथ दे रहे हैं, उसी की आलोचना और समर्थन को लेकर ‘शर्मिंदगी’ प्रदर्शित करना बताता है कि उनका उद्देश्य जनता की चिंता नहीं, अपनी राजनीतिक में पकड़ मजबूत बनाना है. सरकार में रहते हुए मौन और चुनाव करीब आते ही तीखी आलोचना का दोहरा चरित्र उनका पाखंड दर्शाता है. एनडीए (NDA) में रहते एनडीए सरकार के मुखिया नीतीश कुमार पर विफलताओं का सारा ठीकरा फोड़ना राजनीतिक जिम्मेदारी से भागना ही माना जायेगा .

सभी होते हैं उत्तरदायी

अपराध वृद्धि (Crime Increase) या प्रशासनिक विफलताओं (Administrative Failures) के लिए सिर्फ मुख्यमंत्री ही नहीं, सरकार के सभी सहयोगी दल उत्तरदायी होते हैं. लोग बखूबी समझ रहे हैं कि चिराग पासवान अपनी कमजोरियों को छिपाने के लिए नीतीश कुमार को निशाना बना रहे हैं. यह नैतिक दृष्टिकोण से गठबंधन धर्म के सर्वथा विपरीत है. विश्लेषकों का तो यहां तक कहना है कि 2020 के चुनाव की तरह इस बार भी चिराग पासवान राजनीति का समीकरण (Equation of Politics) बिगाड़ने और एनडीए में खुद को नीतीश कुमार के विकल्प के तौर पर पेश करने के लिए एनडीए के सहयोगियों की छवि खराब कर रहे हैं.