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महागठबंधन : पसर रही रार… उपमुख्यमंत्री पद के लिए

विकास कुमार
01 अगस्त 2025

PATNA : विधानसभा चुनाव में सीटों की दावेदारी को लेकर महागठबंधन में झमेला तो खड़ा है ही, ‘गाछे कटहल, ओठे तेल’ जैसी लोकोक्ति को चरितार्थ करते हुए उपमुख्यमंत्री (Deputy Chief Minister) पद के लिए भी मारामारी जैसे हालात पैदा हो गये हैं. चुनाव में क्या होगा क्या नहीं, यह वक्त के गर्भ में है. महागठबंधन (Mahagathbandhan) सत्ता में आयेगा भी या नहीं, आश्वस्ति लायक इसकी भी कोई संभावना नहीं है. इसके बाद भी घटक दलों की ओर से सीटों के साथ-साथ पदों की भी दावेदारी की जाने लगी है. विशेष कर उपमुख्यमंत्री पद की दावेदारी. महत्वपूर्ण बात यह भी है कि मुख्यमंत्री (Chief Minister) पद को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है.

असमंजस की स्थिति

हर किसी को यह मालूम है कि तेजस्वी प्रसाद यादव (Tejaswi Prasad Yadav) वर्षों पूर्व से मुख्यमंत्री पद के लिए राजद (RJD) के घोषित उम्मीदवार हैं. महागठबंधन के अन्य घटक दलों को वह स्वीकार्य हैं, पर असमंजस की स्थिति कांग्रेस (Congress) का रूख स्पष्ट नहीं होने से बनी हुई है. हालांकि, 2020 में महागठबंधन का हिस्सा रहते कांग्रेस तेजस्वी प्रसाद यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार मान चुनाव मैदान में उतरी थी. यह जानते-समझते हुए भी कि मुख्यमंत्री पद पर राजद किसी से कोई समझौता नहीं कर सकता है, इस बार कांग्रेस आनाकानी कर रही है, तो इसकेे पीछे उसका सियासी स्वार्थ है.

मिल सकता है इन्हें पद

प्रदेश कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक वह स्वार्थ और कुछ नहीं, उपमुख्यमंत्री के दो पद अपने हिस्से में लेना और उस पर दलित (Dalit) और मुस्लिम (Muslim) नेता को काबिज कराना है. विश्लेषकों का मानना है कि ऐसा संयोग बना तब प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष (State Congress President) राजेश राम (Rajesh Ram) और कांग्रेस विधायक दल के नेता शकील अहमद खान (Shakeel Ahmed Khan) को अवसर उपलब्ध कराया जा सकता है. बशर्ते कि 2025 का चुनाव जीत कर दोनों आयें. हार गये तो फिर इन्हीं दो समाज के दूसरे नेताओं की किस्मत खुल जा सकती है. कांग्रेस सुप्रीमो (Congress Chif) राहुल गांधी (Rahul Gandhi) इधर के दिनों में अत्यंत पिछड़ा वर्ग के हितों की बात भी खूब कर रहे हैं. कोशिश उनकी उस वर्ग से भी उपमुख्यमंत्री बनाने की होगी.

लालसा तो रहेगी ही

राहुल गांधी के इस प्रयास को कामयाबी मिली तो फिर वीआईपी सुप्रीमो (VIP Chif) मुकेश सहनी (Mukesh Sahani) के अरमानों पर पानी फिर जा सकता है. अत्यंत पिछड़ा वर्ग से आने वाले मुकेश सहनी की उपमुख्यमंत्री पद की लालसा बहुत लंबी है. एनडीए से अलग हो महागठबंधन का हिस्सा बनने के बाद से ही वह इस पद की रट लगा रहे हैं. लोगों ने देखा और सुना कि 2024 के संसदीय चुनाव के दौरान उन्होंने और किसी मुद्दे पर ज्यादा बात नहीं की, मुख्य रूप से उपमुख्यमंत्री पद की व्यग्रता का ही इजहार करते रहे. वैसे, निषाद समाज (Nishad Samaj) को अनुसूचित जाति की सूची (Scheduled caste) में शामिल करने का मसला भी कभी-कभी जरूर उठाते रहे. बहरहाल, मुकेश सहनी या और भी कोई राजनीति में सक्रिय हैं तो बड़ा पद पाने की लालसा रहेगी ही.

चाहिए ठोस गारंटी

लेकिन, दिलचस्प बात यहां यह है कि उपमुख्यमंत्री पद की बात वह तेजस्वी प्रसाद यादव की मौजूदगी में करते रहते हैं, पर शायद कभी उनका ऐसा कोई आश्वासन नहीं मिला है. मुकेश सहनी की 60 सीटों की दावेदारी अपनी जगह कायम है, महागठबंधन के सत्ता में आने पर उपमुख्यमंत्री पद की ठोस गारंटी नहीं मिलने पर वह 2020 की तरह पीठ में छुरा भोंकने का आरोप उछाल दूसरे सियासी शामियाने में आसन जमा ले सकते हैं. आसार कुछ-कुछ वैसा दिखने भी लगे हैं.

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