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विधानसभा चुनाव और डुमरांव : जदयू खेल सकता है फिर उन्हीं पर दांव

राजकिशोर सिंह
21 अगस्त 2025

Dumraon : बक्सर जिले का डुमरांव विधानसभा क्षेत्र राजपूत और यादव बहुल है. इतिहास बताता है कि दल जो रहा हो, इस क्षेत्र से इन्हीं दो जातियों के उम्मीदवार विजयी होते रहे हैं. लेकिन, 2010 में जदयू (JDU) के दाउद अली की जीत से यह मिथक टूट गया. फिर 2020 में कुशवाहा समाज के अजीत कुमार सिंह (Ajit Kumar Singh) भाकपा- माले (CPI-ML) के उम्मीदवार के तौर पर निर्वाचित हुए. 2010 में जदयू उम्मीदवार दाउद अली की जीत हुई तो समझने वाली बात है कि एनडीए (NDA) का वह नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) के पहले का दौर था. नरेन्द्र मोदी वाले दौर में दाउद अली जदयू के उम्मीदवार होते तो शायद ही जीत पाते. 2020 में जदयू उम्मीदवार अंजुम आरा (Anjum Ara) की हार को इस दृष्टि से भी देखा जा सकता है.

दिख रही है इधर सक्रियता

इसके बाद भी जदयू के अंदर चर्चा है कि 2025 में उम्मीदवारी अंजुम आरा को ही मिलेगी. उम्मीदवारी मिलेगी या नहीं, निर्णय जदयू नेतृत्व को करना है, क्षेत्र के लोगों का कहना है कि चुनाव परिणाम निकलने के बाद अंजुम आरा जो गयीं, डुमरांव में यदा-कदा ही दिखीं. हालांकि, इधर के दिनों में वहां उनकी खूब सक्रियता दिख रही है. इससे उनकी उम्मीदवारी के दोहराव की चर्चा को मजबूती मिल रही है. वरिष्ठ पत्रकार नरेन्द्र सिंह कहते हैं कि राजनीति के वर्तमान दौर में डुमरांव के लिए न अंजुम आरा उपयुक्त हैं और न अंजुम आरा के लिए डुमरांव. इसके बाद भी जदयू के लिए वह अपरिहार्य हैं. कारण कि स्थानीय स्तर पर दूसरा कोई मजबूत उम्मीदवार नहीं दिख रहा है.

बदल जायेगा तब परिदृश्य

वैसे, चर्चा है कि जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पूर्व सांसद वशिष्ठ नारायण सिंह (Vashishtha Narayan Singh) के पुत्र प्रशांत कुमार उर्फ सोनू सिंह (Prashant kumar Urph sonu singh) की चाहत इस क्षेत्र से चुनाव लड़ने की है. डुमरांव के ही रहने वाले वशिष्ठ नारायण सिंह भी राजनीति की अपनी विरासत उन्हें सौंपने की मंशा रखते हैं. वरिष्ठ पत्रकार एस एन श्याम कहते हैं कि जदयू की उम्मीदवारी प्रशांत कुमार उर्फ सोनू सिंह को मिलती है तो राजपूत बहुल डुमरांव में मुकाबले का परिदृश्य कुछ दूसरा हो जा सकता है. एक नाम डा. ओमप्रकाश (Dr. Omprakash) का है. वह पार्टी नेतृत्व और डुमरांव के लोगों को कितने स्वीकार्य होंगे, यह कहना मुश्किल है.