तापमान लाइव | Tapmanlive

न्यूज़ पोर्टल | Hindi News Portal

बिहार विधानसभा चुनाव : नालंदा में दिखेगा दिलचस्प नजारा

डा. अरुण कुमार मयंक
21 अगस्त 2025

Nalanda : बिहार विधानसभा का 2025 का चुनाव अब ज्यादा दूर नहीं है. कोई संवैधानिक अड़चन नहीं हुई तब दो-ढ़ाई माह बाद अक्तूबर-नवम्बर में इसे होना है. इसको देखते हुए चुनाव लड़ने और लड़ाने वाले कील-कांटे दुरुस्त करने में भिड़े हैं. बात नालंदा विधानसभा (Nalanda Assembly) क्षेत्र की करें तो यह जानकर आश्चर्य होगा कि इस क्षेत्र पर बीते तीस वर्षों से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) के अतिविश्वस्तों में शुमार ग्रामीण विकास मंत्री (Rural Development Minister) श्रवण कुमार (Shravan Kumar) काबिज हैं. सात चुनावों से अंगद की तरह जमे उनके पांव को कोई पुरुष प्रतिद्वंद्वी नहीं उखाड़ पाया तो चर्चा है कि इस बार वह जिम्मा नारी शक्ति उठाने जा रही हैं.

जुड़ी हैं जनसुराज से

कहते हैं कि एक नहीं, दो महिला नेता नालंदा से चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटी हैं. उनमें एक रानी सिंह (Rani Singh) हैं तो दूसरी पूनम सिन्हा (Poonam Sinha). रानी सिंह राजनीतिक रूप से लंबे समय से सुस्त पड़े पूर्व बाहुबली विधायक रामनरेश सिंह (Ramnaresh Singh) की पुत्रवधू हैं. राजनीति में उनका प्रवेश 2021 में पंचायत चुनाव के जरिये हुआ. नालंदा जिला परिषद (Nalanda District Board) के बेन निर्वाचन क्षेत्र से वह जिला परिषद का उम्मीदवार बन गयीं. बेन ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार का गृह क्षेत्र है. दिलचस्प किस्सा यह है कि जिला परिषद के चुनाव में इस क्षेत्र से जीत श्रवण कुमार समर्थित उम्मीदवार की नहीं, प्रतिद्वंद्वी खेमे के उम्मीदवार की ही होती रही है. लेकिन, इस परिपाटी का लाभ 2021 में रानी सिंह को नहीं मिल पाया. जीत पूनम सिन्हा की हो गयी जो वर्तमान में नालंदा जिला महिला जनसुराज (Jansuraj) की अध्यक्ष हैं.

तैयार बैठी हैं पूनम सिन्हा

पूनम सिन्हा नालंदा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने को तैयार बैठी हैं. 2016 के चुनाव में राजद (RJD) नेता अनिल कुमार की पत्नी चन्द्रकला कुमारी की जीत हुई थी. 2021 में वह तीसरे स्थान पर अटक गयीं. जिला परिषद के चुनाव में रानी सिंह की उपलब्धि उल्लेख करने लायक नहीं रही. तब भी चर्चा है कि 2025 के चुनाव में वह श्रवण कुमार के खिलाफ नालंदा विधानसभा क्षेत्र से किस्मत आजमा सकती हैं. गौरतलब है कि इस क्षेत्र से कभी उनके ससुर रामनरेश सिंह चुनाव लड़ते थे.1980 और 1990 में निर्वाचित भी हुए थे. 1995 में उन्हीं को पछाड़ श्रवण कुमार विधायक बन गये. तब से नालंदा पर वही काबिज हैं. यानी 1995 से 2020 तक के सात चुनावों में लगातार उन्हीं की जीत हुई है.

शगुन सिंह भी हैं सक्रिय

पिता की राजनीतिक विरासत संभालने के मकसद से 2020 में रामनरेश सिंह की पुत्री शगुन सिंह (Sagun Singh) सक्रिय हुई थीं. पर, उनकी सक्रियता नालंदा में नहीं, पटना के बाढ़ विधानसभा क्षेत्र में दिखी थी. प्रयास उनका राजद की उम्मीदवारी पानेे का हुआ था. शायद लालू-राबड़ी (Lalu-Rabri) परिवार से घनिष्ठता रखने वाले बिस्कोमान (Biscoman) के तब के अध्यक्ष और राजद के विधान पार्षद सुनील सिंह (Mlc Sunil Singh) ने आश्वासन दे रखा था. राजनीतिक हलकों में अपने सिमटे प्रभाव के बूते रामनरेश सिंह ने भी हाथ-पांव चलाया था. राजद में बाढ़ के लिए दावेदार कई थे. किसको हां और किसको ना कहा जाता. विश्लेषकों की मानें, तो इसी विवशता के कारण महागठबंधन (Mahagathbandhan) में बाढ़ (Barh) की सीट कांग्रेस (Congress) को दे दी गयी. राजद के तमाम दावेदार शांत पड़ गये.

खुद-ब-खुद मिल गया जवाब

इधर, 2025 के चुनाव की बाबत सभी फिर से सक्रिय हो उठे हैं. यह तो रही बाढ़ से राजद की उम्मीदवारी मिलने न मिलने की बात, शगुन सिंह की अचरज भरी दावेदारी पर लोगों के दिमाग में तब कई तरह के सवाल उठे थे. रामनरेश सिंह की राजनीतिक विरासत संभालने के लिए पुत्री शगुन सिंह ही मैदान में क्यों कूदीं? पुत्र राजा प्रियतम या फिर पुत्रवधू रानी सिंह क्यों नहीं? शगुन सिंह पैतृक विधानसभा क्षेत्र नालंदा की बजाय बाढ़ से क्यों लड़ना चाहती हैं? नालंदा में उनकी सियासी सक्रियता के सवाल पर मायके में कोई विवाद तो नहीं खड़ा हो गया था? इन तमाम सवालों का जवाब रानी सिंह के जिला परिषद के चुनाव के जरिये राजनीति में उतरने से खुद-ब-खुद मिल गया.

देखना दिलचस्प होगा

परन्तु, इसके बाद भी एक सवाल यह उठता है कि रामनरेश सिंह के इकलौते पुत्र राजा प्रियतम क्यों नहीं? इस संदर्भ में उनके करीब रहने वालों का कहना है कि राजा प्रियतम में राजनीति के तिकड़मों को समझने और उनसे जूझने की क्षमता शायद नहीं है. इस दृष्टिकोण से रानी सिंह को उपयुक्त माना जा रहा है. राजनीति में नारी सशक्तीकरण का दौर भी तो चल रहा है! अब रानी सिंह नालंदा विधानसभा क्षेत्र के चुनाव में उतरती हैं या नहीं, यह देखना दिलचस्प होगा. उधर, पूनम सिन्हा का चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है.