तापमान लाइव | Tapmanlive

न्यूज़ पोर्टल | Hindi News Portal

नेपाल में राजनीतिक संकट : प्रधानमंत्री ओली ने पद छोड़ा

प्रदीप कुमार नायक
09 सितम्बर 2025

Kathmandu : नेपाल में अचानक शुरू हुआ भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन ने आखिरकार प्रधानमंत्री (Prime Minister) के.पी. शर्मा ओली की कुर्सी हिला दी. मंगलवार को दोपहर के.पी. शर्मा ओली (KP Sharma Oli) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. बीते दो दिनों से चल रहे हिंसक प्रदर्शनों (Violent Demonstrations) में अब तक 25 लोगों की मृत्यु हो चुकी है और दर्जनों लोग घायल हुए हैं. आंदोलन की अगुवाई ‘जेन-ज़ेड’ ने की. मुख्य मांग प्रधानमंत्री का इस्तीफा ही था.

हो जायेगी अब विदाई

हालांकि, नेपाल की राजनीतिक व्यवस्था (Nepal’s political system) में प्रधानमंत्री का पद त्यागना सरकार का गिरना नहीं माना जाता है. इस देश में कार्यपालिका का मुखिया प्रधानमंत्री होते हैं, लेकिन सरकार का औपचारिक प्रमुख राष्ट्रपति (President) होते हैं. वर्तमान में रामचंद्र पौडेल (Ramchandra Paudel) राष्ट्रपति हैं. जानकारों के मुताबिक रामचंद्र पौडेल के इस्तीफे के बिना सरकार पूरी तरह खत्म नहीं मानी जायेगी. लेकिन, राजनीतिक हलकों में यह माना जाने लगा है कि अब सरकार की विदाई तय है.

भ्रष्टाचार विरोधी जनांदोलन

गौरतलब है कि आंदोलन की शुरुआत (Beginning of the Movement) सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स एक्स, यूट्यूब और फेसबुक पर प्रतिबंध के विरोध से हुई थी. प्रतिबंध लगाने का कदम नेपाल सरकार (Government of Nepal) ने उठाया. जेन-ज़ेड पीढ़ी ने इसका जोरदार विरोध किया. हिंसक विरोध (Violent Protest) के बाद सरकार ने प्रतिबंध हटा लिया, लेकिन तब तक आंदोलन भ्रष्टाचार विरोधी जनांदोलन (Anti Corruption Mass Movement) में बदल चुका था. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार में भारी भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद व्याप्त है.

तोड़फोड़ व आगजनी

सोमवार देर रात हालात उस समय और बिगड़ गये जब प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन (Parliament House) में आग लगा दी. काठमांडू (Kathmandu) की सड़कों पर धुएं के गुबार छा गये, जगह-जगह गाड़ियां और ट्रक जलते दिखे. प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल के निजी आवासों तक पहुंच गए और वहां भी तोड़फोड़ व आगजनी की. काठमांडू में त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (Tribhuvan International Airport) भी बंद करना पड़ा.

टूट गया सब्र का बांध

नेपाल की पुलिस (Nepal Police) हालात संभालने में नाकाम साबित हुई तब सेना को तैनात कर दिया गया. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार से जुड़े कई नेता या तो इस्तीफा दे चुके हैं या फिर उन्हें सुरक्षित जगहों पर भेज दिया गया है. आंदोलनकारियों के नारे थे ‘सोशल मीडिया पर रोक बंद करो, भ्रष्टाचार बंद करो.’ नेपाल का यह आंदोलन सिर्फ सोशल मीडिया (Social media) पर प्रतिबंध के खिलाफ युवा पीढ़ी में उफनाये गुस्से का ही परिणाम नहीं है, राजनीतिक भ्रष्टाचार से त्रस्त जनता के सब्र का बांध टूट जाना भी है.

#tapmanlive