मुजफ्फरपुर: साहेबगंज… ताक में है वीआईपी

विभेष त्रिवेदी
16 सितम्बर 2025
Muzaffarpur : यह बिहार के मुजफ्फरपुर जिले का साहेबगंज (Sahebganj) है. एक जमाने में व्यवसाय से जुड़े लोगों की बात छोड़ दें, इस इलाके में आम लोग भी घर से निकलने से डरते थे. तमाम तरह के कांडों- दुष्कांडों को लेकर जर्रा- जर्रा थर्राता था. देवरिया कोठी (Deoria Kothi) में दरबार सजता था. सामान्य व प्रबुद्ध जनों का नहीं, अवांछित तत्वों का. उस रूप में उस दौर की वापसी तो नहीं हुई है, पर उसकी आहट से चारो तरफ घबराहट जरूर फैली हुई है. देवरिया कोठी से कहीं अधिक चर्चा में इस समय एक कोल्ड स्टोरेज की हो रही है. आरोप उछल रहे हैं कि वहां भी प्रायः वैसे ही लोग जमते हैं जैसे कभी देवरिया कोठी में जमते थे. भाजपा (BJP) का मोह त्याग राजद (RJD) में लौटे भूपाल भारती (Bhupal Bharti) इसकी तसदीक करते हैं. कहते हैं कि साहेबगंज में पहले जंगल राज की बात होती थी, अब तो वहां महाजंगल राज है.
कार्रवाई की उम्मीद नहीं
उनके मुताबिक वहां सुबह-सुबह गोलियों की बौछार होती है. देवरिया और साहेबगंज के बीच व्यवसायी लूट लिये जाते हैं. साहेबगंज में बजाज मोटरसाइकिल की एजेंसी के मालिक हरिशंकर तिवारी (Harishankar Tiwari) से 15 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गयी. एजेंसी पर पेट्रोल फेंककर बम मारने की धमकी दी गयी. हरिशंकर तिवारी ने कुख्यात आशुतोष राणा (Ashutosh Rana) और छोटू राणा (Chhotu Rana) के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी है. पर, उन्हें निष्पक्ष पुलिस कार्रवाई की उम्मीद नहीं है. इसकी खास वजह है. साहेबगंज का बच्चा-बच्चा जानता है कि आशुतोष राणा और छोटू राणा को किस राजनीतिज्ञ का संरक्षण प्राप्त है. कोई मुंह खोलने की हिम्मत नहीं करता है. माधोपुर हजारी निवासी पुष्कर सिंह (Pushkar Singh) ने प्रतिकार किया. मोबाइल फोन पर गोलियों से छलनी कर देने की धमकी मिली. कुछ दिनों बाद पुष्कर सिंह को दिनदहाड़े गोलियों से छलनी कर भी दी गयी.
उठ रही आवाज धांधली के खिलाफ
पूरे इलाके में चर्चा का विषय यह भी बना हुआ है कि साहेबगंज नगर पंचायत के अध्यक्ष कलावती देवी (Kalavati Devi) को स्वतंत्र होकर काम करने नहीं दिया जा रहा है. संबद्ध अधिकारी और जन प्रतिनिधियों के गठजोड़ से नगर पंचायत में लूट मची है. हाईमास्ट लाइट की खरीद में कथित धांधली के खिलाफ आवाज उठ रही है. कहते हैं कि कलावती देवी को चुप रखने के लिए उनके पति जितेंद्र गुप्ता (Jitendra Gupta) को केस में फंसा दिया गया है. जितेन्द्र गुप्ता के मुताबिक गयाजी में जिस हाईमास्ट लाइट की खरीदारी साढ़े पांच लाख रुपये प्रति इकाई की गयी, उसे साहेबगंज नगर पंचायत में साढ़े आठ लाख रुपये प्रति इकाई की दर से खरीदा गया. उन्होंने 30 हाईमास्ट लाइट की खरीदारी में 90 लाख रुपये की गड़बड़ी का विरोध किया तो उन्हें अलग-थलग कर दिया गया.

नाता तोड़ लिया जदयू से
पर्यटन मंत्री (Tourism Minister) राजू कुमार सिंह राजू (Raju Kumar Singh Raju) वर्तमान में साहेबगंज के विधायक हैं. 2020 में भाजपा उम्मीदवार के तौर पर निर्वाचित हुए थे. बाद में भाजपा में शामिल हो गये. इस बार भाजपा की उम्मीदवारी मिलेगी, इसे तय समझा जा सकता है. जदयू (JDU) में सुबोध शंकर कुमार उर्फ राजकुमार (Subodh Shankar Kumar alias Rajkumar) दावेदार थे. जदयू किसान व सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव थे. कोल्ड स्टोरेज में एनडीए (NDA) कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित करने के निर्णय का विरोध करते हुए उन्होंने जदयू से नाता तोड़ लिया. संभवतः राजू कुमार सिंह राजू के खिलाफ किसी दूसरे दल के उम्मीदवार या निर्दलीय चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने ऐसा किया है. 2020 में महागठबंधन (Grand Alliance) में साहेबगंज की सीट राजद के हिस्से में थी. उम्मीदवारी पूर्व मंत्री रामविचार राय (Ramvichar Rai) को मिली थी जो राजू कुमार सिंह राजू से 15 हजार 333 मतों से पिछड़ गये थे. राजू कुमार सिंह राजू को प्राप्त 81हजार 203 मतों के मुकाबले उन्हें 65 हजार 870 मत मिले थे.
वीआईपी की दावेदारी
चुनाव के कुछ ही समय बाद रामविचार राय का निधन हो गया. 2025 में राजद की उम्मीदवारी को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है. वैसे, प्रदेश तैलिक साहू समाज के उपाध्यक्ष भूपाल भारती, पृथ्वीनाथ राय, जुझारू राजद नेता धीरज शुक्ला, जिला पार्षद तुलसी राय, भाजपा छोड़कर राजद में आयीं गीता कुमारी आदि प्रबल दावेदार हैं. धीरज शुक्ला का जन-संपर्क अभियान सुर्खियां बटोर रहा है. यहां गौर करने वाली बात है कि 2020 वीआईपी (vip) की जीत हुई थी. तब वह एनडीए में थी. कल क्या होगा यह नहीं कहा जा सकता, अभी वीआईपी महागठबंधन में है. 2020 की जीत के आधार पर अपनी दावेदारी पेश कर रही है.
आगे-आगे देखिये…
अगर यह सीट वीआईपी के हिस्से में गयी, तो मुकेश सहनी (Mukesh Sahni) कथित रूप से पार्टी से विश्वासघात करने वाले विधायक राजकुमार सिंह राजू को सबक सिखाने का पूरा प्रयास करेंगे. उन्हें धूल चटा सकने में सक्षम-समर्थ दिखने वाले नेता को ही प्रत्याशी बनायेंगे. उस लिहाज से सुबोध शंकर कुमार उर्फ राजकुमार को उपयुक्त माना जा सकता है. बहरहाल, प्रत्याशी कोई हो, साहेबगंज का परिणाम इस बार चौंकाने वाला होगा. सबको पता है कि मुकेश सहनी की पार्टी के उम्मीदवार का चयन जदयू के बहुचर्चित विधान पार्षद दिनेश प्रसाद सिंह (Dinesh Prasad Singh) करते हैं. ऐसे में आगे-आगे देखिये होता है क्या!
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