बेगूसराय: मुकाबला मटिहानी का… मुश्किलें दोनों ओर हैं

विनोद कर्ण
18 सितम्बर 2025
Begusarai : बिहार विधानसभा 2025 का चुनाव अब ज्यादा दूर नहीं है. चुनावी मुकाबले (Election Contests) के लिए तमाम राजनीतिक दल (Poltical Party) तरकश में ‘तीर’ सहेज रहे हैं. पर, बड़े दलों के लिए परेशानी की बात यह बनी हुई है कि तमाम प्रयत्नों के बावजूद सीटों को लेकर छायी अनिश्चितता की धुंध छंट नहीं रही है. घटक दलों की बेहिसाब दावेदारी ने दोनों मुख्य गठबंधनों में इस मुद्दे को कुछ अधिक जटिल बना दिया है. एक-दो नहीं, ऐसे अनेक निर्वाचन क्षेत्र हैं जहां एक ही गठबंधन के दो से अधिक दलों ने दावेदारी पेश कर रखी है. उन्हें निपटाना नेतृत्व के लिए भारी मुश्किल हो गया है. वैसे निर्वाचन क्षेत्रों में एक बेगूसराय जिले का मटिहानी (Matihani) भी है. दिलचस्प बात यह कि इस पर महागठबंधन (Mahagathbandhan) के तीन और एनडीए (NDA) के दो दलों ने नजर जमा रखी है.
चुनाव लड़ेंगी ही इंद्रा देवी
बात एनडीए की, तो मटिहानी में जो तस्वीर उभर रही है उसमें बंटवारे पर निर्णय क्या होता है, सीटों की हिस्सेदारी के मामले में लोजपा (रामविलास) LJP (Ramvilesh) का रुख क्या रहता है इससे मतलब नहीं, पार्टी की महिला नेता बेगूसराय जिला परिषद (Begusarai District Council) की पूर्व अध्यक्ष इंद्रा देवी (Indra Devi) इस क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगी. लोजपा (रामविलास) की उम्मीदवारी मिल गयी तो ठीक, अन्यथा निर्दलीय भाग्य आजमायेंगी. इंद्रा देवी के समर्थक सीना ठोक कर ऐसा कहते हुए क्षेत्र में घूम रहे हैं, पक्ष में माहौल बना रहे हैं.
उम्मीदवारी उन्हें ही मिलेगी
कल क्या होगा यह नहीं कहा जा सकता, अभी जो हालात हैं उसमें एनडीए में यह सीट किसी भी सूरत में लोजपा-रामविलास के हिस्से में जाती नहीं दिख रही है. यह जदयू के हिस्से में रहेगी और तमाम तरह के अगर-मगर के बावजूद उम्मीदवारी मौजूदा विधायक राजकुमार सिंह (MLA Rajkumar Singh) को ही मिलेगी. इसलिए भी कि जदयू में उम्मीदवारी चाहने वाले तो कई हैं, पर मटिहानी के लिए उनके जैसा दूसरा कोई मजबूत दावेदार नहीं है. 2020 में पूर्व विधायक नरेन्द्र सिंह उर्फ बोगो सिंह (Narendra Singh alias Bogo Singh) इस पार्टी के उम्मीदवार थे. जिस राजकुमार सिंह से बोगो सिंह पराजित हुए थे, बदले हालात में वही ‘तीर चलाने लग गये. वैसी स्थिति में उनके समक्ष महागठबंधन की ओर मुखातिब होने के सिवा दूसरा कोई चारा नहीं बचा.

कन्नी काट रही लोजपा
एनडीए में संभावना समाप्त समझ 2024 के संसदीय चुनाव (Parliamentary Elections) में उन्होंने महागठबंधन के भाकपा उम्मीदवार अवधेश राय का खुला साथ दे दिया. परन्तु, जदयू नेतृत्व ने उस पर तनिक भी ध्यान नहीं दिया. यानी महत्वहीन समझा. मटिहानी विधानसभा क्षेत्र (Matihani Assembly Constituency) से भाजपा को फिलहाल सीधे तौर पर मतलब नहीं है. लेकिन, जदयू की चुनाव से संबंधित बैठकों में उसकी मजबूत मौजूदगी रहती है. जबकि लोजपा (रामविलास) के नेता प्रायः कन्नी काट ले रहे हैं. एनडीए की बैठक से भी दूर-दूर रह रहे हैं. बेगूसराय में हाल में हुई एनडीए की प्रेस कांफ्रेंस में जिला लोजपा (रामविलास) के अध्यक्ष प्रेम कुमार पासवान (Prem Kumar Paswan) ने भाग नहीं लिया.
गड़बड़ा जायेगा गणित
इस पार्टी की ऐसी बेरुखी संभवतः मटिहानी पर दावेदारी को लेकर है. लोजपा (रामविलास) मटिहानी को अपनी सीटिंग सीट मान रही है. तर्क यह कि 2020 में राजकुमार सिंह की जीत लोजपा प्रत्याशी के तौर पर हुई थी. लेकिन, उसके दावे में एक पेंच यह फंसा हुआ है कि उस वक्त लोजपा एक थी. चुनाव के बहुत बाद रालोजपा और लोजपा (रामविलास) के रूप में दो हो गयी. ऐसे में यह कैसे कहा जा सकता है कि 2020 में जीत रालोजपा (Rljp) की हुई थी या लोजपा (रामविलास) की? इस अनसुलझे सवाल के बीच चिराग पासवान ने बहुत पहले मटिहानी विधानसभा क्षेत्र में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में इशारों-इशारों में इंद्रा देवी को लोजपा (रामविलास) का उम्मीदवार घोषित कर दिया. तब से इंद्रा देवी व उनके पति बालमुकुंद सिंह (Balmukund Singh) ही नहीं, पार्टी के प्रमुख कार्यकर्ता भी क्षेत्र में उनके लिए अलख जगा रहे हैं. इंद्रा देवी 2020 में बछवाड़ा विधानसभा क्षेत्र (Bachhwara Assembly Constituency) से निर्दलीय उम्मीदवार थीं. 09 हजार 704 मतों में सिमट गयी थीं. यह जानने वाली बात है कि वह मूल रूप से मटिहानी क्षेत्र की वाशिंदा हैं. कभी भाजपा से जुड़े रहे उनके जेठ अरविंद सिंह ने बछवाड़ा को अपनी कर्मभूमि बना रखी है. बछवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से वह भी दो बार किस्मत आजमा चुके हैं. हर बार निराशा ही हाथ लगी. इस बार इंद्रा देवी एनडीए से अलग मटिहानी के मैदान में उतरती हैं, तो बछवाड़ा जैसे परिणाम का दुहराव भले हो जाये, जीत-हार का गणित तो वह गड़बड़ा ही दे सकती हैं.
इस वजह से है बड़ा खतरा
इस रूप में बिगड़ा गणित किसकी किस्मत बिगाड़ देगा, यह अभी नहीं कहा जा सकता. वैसे, बड़ा खतरा राजकुमार सिंह के भविष्य पर ही मंडराता नजर आ रहा है. जदयू (JDU) विधायक राजकुमार सिंह के बारे में आम धारणा है कि बाकी सब तो करीब-करीब ठीक है, पर नौकरशाह जैसा व्यवहार और अहंकार उनकी संभावनाओं को समेट दे, तो वह हैरान करने वाली कोई बात नहीं होगी.
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