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शिवहर की सियासत : अवसर कांग्रेस को मिल गया तब…!

वैसे, राजनीति में असंभव कुछ नहीं होता. इसको ध्रुव सत्य मानें तो जदयू की उम्मीदवारी (JDU Candidature) के मामले में चेतन आनंद का पलड़ा फिलहाल भारी दिखता है. उधर, महागठबंधन (Mahagathbandhan) में राजद विधायक चेतन आनंद का विकल्प क्या होगा? इसको लेकर तरह-तरह के कयास लगाये जा रहे हैं. राजद में दावेदार अनेक हैं, पर इस रूप में विधान पार्षद मो. फारूक (MLC Mohammad Farooq) के नाम की चर्चा खूब हो रही है. कहा जाता है कि वह क्षेत्र में सक्रिय भी हैं. लेकिन, 2020 से पहले के कुछ चुनावों में राजद की कोई प्रत्यक्ष भागीदारी नहीं रहने की वजह से महागठबंधन में शिवहर की सीट के इस बार कांग्रेस (Congress) में जाने की संभावना बड़ा आकार लिये हुए है.

वैसा होता है तो उम्मीदवारी शिवहर जिला कांग्रेस की अध्यक्ष नूरी बेगम (Shivhar District Congress President Noori Begum) को अवसर उपलब्ध हो जा सकता है. हालांकि, कांग्रेस नेतृत्व ने विधानसभा के चुनाव में पार्टी के किसी भी जिला अध्यक्ष को उम्मीदवार नहीं बनाने का निर्णय कर रखा है. शिवहर के मामले में भी उस पर अमल हुआ, तो नूरी बेगम नहीं तो उनके पति मोहम्मद असद कांग्रेस (Congress) के उम्मीदवार हो सकते हैं. यह भी संभव है कि चेतन आनंद को जदयू की उम्मीदवारी मिलने की स्थिति में जिला कांग्रेस के अध्यक्ष पद से मुक्त कर नूरी बेगम को ही उम्मीदवार बना दिया जाये.

शिवहर जिला कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके मोहम्मद असद (Md. Asad) दिवंगत पूर्व मंत्री मोहम्मद अनवारुल हक (Late former minister Mohammad Anwarul Haque) के पुत्र हैं. नूरी बेगम (Noori Begum) उनकी पुत्रवधू हैं. गौर करने वाली बात है कि 1999 में मोहम्मद अनवारुल हक ने ही शिवहर में विधायक चेतन आनंद के पिता पूर्व सांसद आनंद मोहन (Ex. MP Anand Mohan) को पराजित किया था. कहते हैं कि मोहम्मद अनवारुल हक का चुनाव प्रबंधन मोहम्मद असद ही देखते और संभालते थे. मतलब चुनाव लड़ने के हर गुर से वह वाकिफ हैं. ऐसे में कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर नूरी बेगम या उनके पति मोहम्म्द असद मैदान में उतरते हैं तो मुकाबला दिलचस्प हो जा सकता है. जीत-हार परिस्थितियों पर निर्भर है.

एनडीए में एक पेंच लोजपा (रामविलास) की दावेदारी का भी फंसा हुआ है. कहते हैं कि पार्टी सुप्रीमो चिराग पासवान (Chirag Paswan) शिवहर जिला लोजपा (रामविलास) के अध्यक्ष विजय कुमार पांडेय (Vijay Kumar Panday) को एनडीए में उम्मीदवारी के लिए जोर लगा रहे हैं. विजय कुमार पांडेय 2020 में लोजपा के उम्मीदवार थे. तब लोजपा किसी गठबंधन का हिस्सा नहीं थी. अकेले चुनाव में उतरी थी. विजय कुमार पांडेय ने 18 हजार 748 मत हासिल कर अपनी लोकप्रियता साबित कर दी थी. चिराग पासवान उन्हें इसलिए महत्व देते हैं कि उनके बड़े भाई संजय कुमार पांडेय (Sanjay Kumar Panday) ने कथित रूप से पार्टी के लिए शहादत दी थी. लोजपा (रामविलास) को शिवहर की सीट मिलती भी है या नहीं, यह देखना दिलचस्प होगा.