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मुकाबला महनार का : जीतेंगे नहीं, तो जीतने भी नहीं देंगे…!

तापमान लाइव ब्यूरो
04 नवम्बर 2025

Mahnar : सत्तारूढ़ एनडीए (NDA) के घटक दल जदयू (JDU) की प्रतिष्ठा वैशाली (Vaishali) जिले के महनार विधानसभा क्षेत्र में भी दांव पर है. इस रूप में कि प्रदेश जदयू के अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा (Umesh Singh Kushwaha) वहीं किस्मत आजमा रहे हैं. हालांकि, महनार से वह पहले भी चुनाव लड़ते रहे हैं. एक बार निर्वाचित भी हुए हैं. लेकिन, तब वह जदयू के सिर्फ उम्मीदवार होते थे. इस बार उम्मीदवार के साथ प्रदेश अध्यक्ष भी हैं. इस कारण महनार के मुकाबले का खास महत्व है. यहां के मैदान में वह पहली बार 2010 में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर उतरे थे. चतुष्कोणीय मुकाबले में 18 हजार 397 मत ही बटोर पाये थे. जीत भाजपा (BJP) के डा. अच्युतानंद (Dr. Achyutananda) की हुई थी. 2015 में उमेश सिंह कुशवाहा की बड़ी जीत हुई. तब वह महागठबंधन (Mahagathbandhan) में जदयू के उम्मीदवार थे. भाजपा के डा. अच्युतानंद के जीत के दुहराव के मंसूबे को उन्होंने 26 हजार 455 मतों से धो दिया था.

परन्तु, 2020 में उमेश सिंह कुशवाहा जीत का सिलसिला बनाये नहीं रख पाये. राजद प्रत्याशी वीणा देवी (RJD candidate Veena Devi) से 07 हजार 977 मतों से मात खा गये. वीणा देवी वैशाली के पूर्व सांसद और महनार के पूर्व विधायक बाहुबली रामकिशोर सिंह उर्फ रामा सिंह (Ramkishore Singh alias Rama Singh) की पत्नी हैं. संसदीय चुनाव से ठीक पहले 01 मई 2024 को रामा सिंह लोजपा (आर) से जुड़ गये. संभवतः इसी वजह से 2025 में वीणा देवी (Veena Devi) को राजद की उम्मीदवारी नहीं मिली. उनकी जगह राजपूत समाज (Rajput Society) के ही ईं. रवीन्द्र कुमार सिंह (Engr. Ravindra Kumar Singh) को उम्मीदवार बना दिया गया. मजबूत दावेदारी वैशाली जिला राजद के प्रधान महासचिव (Principal General Secretary of RJD) संजय कुमार राय (Sanjay Kumar Rai) की थी. अनदेखी कर दी गयी तो वह निर्दलीय ताल ठोक रहे हैं.

2020 में ईं. रवीन्द्र कुमार सिंह को लोजपा की उम्मीदवारी मिली थी. अप्रत्याशित ढंग से 31 हजार 315 मत उनकी झोली में गिर गये. संभवतः वही राजद की उनकी उम्मीदवारी के आधार बन गये. वैसे, चर्चा है कि उन्हें उम्मीदवारी दिलवाने में हाजीपुर (Hajipur) के उस चर्चित शख्स ने अहम भूमिका निभायी जिसकी राजद के अघोषित सुप्रीमो तेजस्वी प्रसाद यादव (Tejaswi Prasad Yadav) से निकटता है. लोग यह भी कह रहे हैं कि पूर्व सांसद रामा सिंह (Former MP Rama Singh) फिर से राजद के करीब दिख रहे हैं, तो उसके पीछे भी वही शख्स है. वैसे, रामा सिंह की पत्नी वीणा देवी तकनीकी तौर पर अभी राजद में ही हैं. उम्मीदवारी भले नहीं मिली, न तो उन्होंने राजद छोड़ा है और न राजद ने उन्हें दल से निकाला है.

महनार विधानसभा क्षेत्र में यादव, राजपूत और कुशवाहा समाज के मतों की बहुतायत है. इनमें ज्यादा संख्या यादव मतों की है. कुशवाहा मत (Kushwaha Vote) अपेक्षाकृत कम हैं. मुसलमानों की बड़ी आबादी (large population of Muslims) नहीं रहने से ‘माय’ की हैसियत अपने बूते जीत हासिल करने की नहीं है. यही कारण है कि राजद नेतृत्व महनार में यादव उम्मीदवार उतारने से परहेज करता है. इसलिए भी कि राजद का यादव उम्मीदवार रहने की स्थिति में सामाजिक समूहों की गोलबंदी आमतौर पर यादव बनाम अन्य के रूप में हो जाती है. कहते हैं कि संजय कुमार राय की चाहत राजद नेतृत्व की इसी समझ की भेंट चढ़ गयी. पार्टी नेतृत्व के निर्णय को नकार निर्दलीय चुनाव लड़ रहे संजय कुमार राय सरमस्तपुर पंचायत (Sarmastpur Panchayat) के मक्कनपुर गांव के रहने वाले हैं. यह गांव वासुदेवपुर से उत्तर है. स्वजातीय समाज में उनकी अच्छी पकड़ है. वोट कितना बटोर पाते हैं, देखना दिलचस्प होगा. बहरहाल, राजद ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया है.

पूर्व विधायक डा. अच्युतानंद (Dr. Achyutananda) रालोजपा के उम्मीदवार हैं. मुख्य संघर्ष राजद के ईं. रवीन्द्र कुमार सिंह और जदयू के उमेश सिंह कुशवाहा के बीच परिलक्षित है. वैसे, संजय कुमार राय और डा. अच्युतानंद भी खुद को मुख्य मुकाबले (Main Matches) में मान रहे हैं. आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) के विपिन कुमार (Vipin Kumar) और जनशक्ति जनता दल (Janshakti Janata Dal) के जय सिंह (Jai Singh) की भी मौजूदगी उल्लेख करने लायक है. विपिन कुमार लावापुर (Lavapur) के तो जय सिंह हसनपुर नया टोला (Hasanpur Naya Tola) के रहने वाले हैं. पूर्व वार्ड पार्षद सहदेव साह की पत्नी शीतल गुप्ता भी चुनाव मैदान में उतरी थीं. बाद में नामांकन वापस ले उन्होंने एनडीए के जदयू उम्मीदवार उमेश सिंह कुशवाहा का समर्थन कर दिया.

एनडीए, महागठबंधन और अन्य दलों के चुनावी मुद्दे और वादे अपनी जगह हैं, थोड़ा उलटफेर के साथ सामाजिक समूहों यानी समर्थक जातियों की गोलबंदी 2020 के चुनाव की तरह ही है. उलटफेर इस रूप में कि उस चुनाव में लोजपा स्वतंत्र चुनाव लड़ रही थी, इस बार एनडीए के साथ है. वीआईपी (VIP) एनडीए में थी, वर्तमान में महागठबंधन का हिस्सा है. दोनो दलों के आधार मत इधर-उधर हो सकते हैं. 2020 में बतौर लोजपा उम्मीदवार ईं. रवीन्द्र कुमार सिंह स्वजातीय क्षत्रिय मतों के हिस्सेदार हो गये थे. इस बार रालोजपा उम्मीदवार डा. अच्युतानंद उस भूमिका में दिख रहे हैं. डा. अच्युतानंद और निर्दलीय संजय कुमार राय जीत के लिए जितना जोर लगायेंगे, राजद की राह उतनी ही कठिन हो जा सकती है.