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जमीन की बिक्री : जमाबंदी की बाध्यता खत्म

तापमान लाइव ब्यूरो
17 नवम्बर 2025

New Delhi : सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने बिहार सरकार (Bihar Government) द्वारा निबंधन से संबंधित नियमावलि में किये गये उस संशोधन को निरस्त कर दिया है जिसके तहत बिना जमाबंदी (Settlement) या होल्डिंग नंबर के जमीन की रजिस्ट्री (Land Registry) नहीं की जा सकती थी. सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि बिहार निबंधन नियमावली में 2019 में किया गया संशोधन अवैध है. यह निबंधन अधिनियम, 1908 में प्रदत्त अधिकार क्षेत्र से बाहर है.

सर्वोच्च अदालत के इस फैसले के बाद बिहार में अब जमीन की खरीद-बिक्री (Buying and Selling of Land) के लिए जमाबंदी या होल्डिंग नंबर (Jamabandi or Holding Number) प्रस्तुत करना अनिवार्य नहीं रह गया है. न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जायमाल्या बागची की खंडपीठ ने समीउल्लाह की ओर से दायर एसएलपी (सिविल) पर यह फैसला सुनाया. बिहार सरकार ने 10 अक्तूबर 2019 को निबंधन नियमावली में संशोधन कर शर्त जोड़ दी थी कि भूमि की बिक्री या दान (Sale or Donation of Land) केवल तभी संभव होगा जब विक्रेता या दानदाता (Seller or Donor) के नाम से संबद्ध भूमि की जमाबंदी या होल्डिंग नंबर हो. मामला पटना उच्च न्यायालय (Patna High Court) में गया. उच्च न्यायालय ने संशोधन को वैध करार दिया. तब सर्वोच्च अदालत में एसएलपी दायर की गयी. सुनवाई के उपरांत सर्वोच्च अदालत ने पटना उच्च न्यायालय के निर्णय और बिहार सरकार के संशोधन, दोनों को निरस्त कर दिया. साथ में विधि आयोग (Law Commission) से अनुरोध किया कि वह इस मुद्दे की व्यापक समीक्षा करे. केन्द्र सरकार राज्य सरकारों, हितधारकों और सूचना प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों से परामर्श कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करे.

सर्वोच्च अदालत ने इससे पहले 13 मई 2024 को उक्त संशोधन पर अंतरिम रोक लगा दी थी. उसने तब कहा था कि संशोधन के बाद हुए जमीन के सभी निबंधन अंतिम फैसले के परिणाम पर निर्भर रहेंगे. सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति का अचल संपत्ति रखने, खरीदने और बेचने का अधिकार संवैधानिक रूप से संरक्षित है. बिहार सरकार द्वारा किया गया संशोधन उस अधिकार पर अनुचित प्रतिबंध लगाता है. उसने यह भी कहा कि जब तक जमाबंदी और विशेष सर्वेक्षण (Jamabandi and Special Survey) की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती तब तक इसे निबंधन की पूर्व शर्त बनाना मनमाना और असंवैधानिक है.