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जल संरक्षण में उल्लेखनीय कार्य के लिए किशोर जायसवाल को मिला राष्ट्रीय सम्मान

विनय कुमार सिंह
22 नवम्बर 2025

Munger : जल संरक्षण, मृदा सुधार और सामुदायिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले किशोर जायसवाल (कल्याणपुर, मुंगेर) को भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय (Ministry of Jal Shakti, Government of India) द्वारा राष्ट्रीय जल पुरस्कार-2025 (National Water Award-2025) से सम्मानित किया गया. राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) ने उन्हें यह पुरस्कार प्रदान किया. किशोर जायसवाल ने दिल्ली यूनिवर्सिटी (Delhi University) व जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (Jawaharlal Nehru University) से उच्च शिक्षा प्राप्तकर भविष्य में होने वाले जल संकट (Water crisis) को केंद्र में रखकर इस अभियान की शुरुआत किया. पूर्व में वे नाबार्ड से जुड़े और बाद में सवार्ड (Society for Watershed and Rural Development) के निदेशक बने. इसके साथ ही कई राष्ट्रीय संगठनों में नेतृत्वकरी भूमिका निभा चुके हैं, जिनमें एनएफइआई, नई दिल्ली (NFEI, New Delhi), इंडियन फार्मर्स नेटवर्क हैदराबाद (Indian Farmers Network Hyderabad) और प्रगतिशील कृषि मंच (Progressive Agriculture Forum) आदि से जुड़े हुए हैं.

तीन दशक से हैं सक्रिय

इनका सोच है कि ‘जल ही जीवन नहीं, बल्कि जल ही भविष्य है.’ किशोर जायसवाल ने बिहार, झारखंड और विशेष रूप से अंग प्रदेश का क्षेत्र (मुंगेर व भागलपुर प्रमंडल) में वर्षा जल संचयन (Rain Water Harvesting), वाटर शेड विकास (Water shed Development) और गंगा पुनरुद्धार के लिए तीन दशकों से अधिक समय तक कार्य किया है. उन्होंने करीब 10 हजार हेक्टर से अधिक भूमि पर जल संरचनाएं (Water Structures) विकसित की, जिससे भूजल स्तर में सुधार (Improvement in Groundwater level) और कृषि उत्पादकता (Agricultural Productivity) में वृद्धि हुई. किशोर जायसवाल ने बताया कि वे क्षेत्र जो कभी नक्सल प्रभावित (Naxal affected) क्षेत्र माना जाता था. वहां के लोग पीने का पानी के लिए दूर जाकर लाया करते थे या फिर पहाड़ों से निकलने वाले स्रोतों के पानी पर निर्भर करता था. लेकिन उनके प्रयास से न सिर्फ वहां के लोगों को पीने के पानी की उपलब्धता हुई बल्कि उन क्षेत्रों में कृषि उत्पादकता में वृद्धि हुई.

हरी-भरी बनी रहे पृथ्वी

आम लोगों को दिए संदेश में उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यदि जल का समुचित प्रबंधन नहीं किया गया तो घोर जल संकट उत्पन्न होने वाला है. जल के बिना किसी भी प्राणी का जीवित रहना संभव नहीं होगा. इसलिए हमें वर्षा जल संरक्षण के लिए सतत् प्रयास करने की जरूरत है. जल की अनावश्यक बर्बादी को रोकने के लिए भी प्रयास करने की जरूरत है. इसके लिए सामुदायिक प्रयास करने की जरुरत है. ताकि हमारी पृथ्वी हरी-भरी बनी रहे.

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