यह रहस्य है… गिलहरी की इस मूर्ति का!

तापमान लाइव ब्यूरो
24 नवम्बर 2025
Ayodhya : अयोध्या में रामलला (Ramlala) के दर्शन-पूजन को आने वाले हर किसी को यह जिज्ञासा जरूर होती होगी कि भव्य राम मंदिर (Grand Ram Temple) के समीप अंगद टीले पर गिलहरी की मूर्ति (Squirrel Statue) क्यों? अंगद टीले (Angad mounds) पर हाल ही में गिलहरी की बड़ी मूर्ति की स्थापना श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Temple Trust) ने करायी है. बताया जाता है कि ट्रस्ट ने रामायण में गिलहरी की भूमिका (The role of the squirrel in Ramayana) को महत्व देते हुए ऐसा किया है. गिलहरी की मूर्ति ऐसी जगह पर लगायी गयी है, जहां से वह मंदिर को निहारती प्रतीत होती है. राम मंदिर के सामने गिलहरी की मूर्ति क्यों, यह जान गये. रामायण में गिलहरी की कैसी भूमिका का वर्णन है और मंदिर ट्रस्ट समिति ने उसे इतना महत्व क्यों दिया है, अब यह जानिये.

वाल्मीकि रामायण (Balmiki Ramayan) में वर्णित है कि माता सीता (Mata Sita) तक पहुंचने के लिए वानर सेना (Vanar Sena) के द्वारा जब राम सेतु (Ram Setu) का निर्माण किया जा रहा था तब एक गिलहरी भी वहां मौजूद थी. वानर जहां बड़े-बड़े पत्थर लगा रहे थे, वहीं वह गिलहरी भी कंकड़ और बालू समुद्र में गिरा रही थी. गिलहरी यह कार्य पूरे मनोयोग से कर रही थी. सेतु निर्माण (Bridge Construction) में योगदान दे रही थी. उसको ऐसा करते देख वानरों ने मजाक उड़या, कहा कि तुम बहुत छोटी हो, पत्थरों के नीचे दब जाओगी. इसलिए यहां से चली जाओ. इस बात की जानकारी भगवान श्रीराम को मिली तो उन्होंने वानरों को समझाया कि गिलहरी द्वारा गिराये जा रहे छोटे कंकड़ और बालू पुल को मजबूती दे रहे हैं. सेतु के नीचे के सुराखों को भर रहे हैं. यानी भगवान श्रीराम ने गिलहरी के योगदान (Contribution of Squirrels) को पूरा महत्व दिया. इसके बाद वानरों ने अपनी भूल केे लिए क्षमा मांग ली. माना जाता है कि इस दौरान श्रीराम ने गिलहरी को एक हाथ पर रख दूसरे हाथ की तीन अंगुलियों से उसकी पीठ सहलायी थी. उसी से गिलहरी की पीठ पर तीन रेखाएं (Three lines on the back of a squirrel) उभर आयीं. ये तीन रेखाएं भगवान श्रीराम के प्रेम व स्नेह (Love and Affection) को दर्शाती हैं. इस तरह भगवान श्रीराम ने इस रूप में यह संदेश दिया कि छोटा हो या बड़ा, हर किसी का प्रयास महत्वपूर्ण होता है. समर्पण और भक्ति में किया गया कार्य बेकार नहीं जाता है.

