नक्सलवाद : टूटती सांसें… मारे जा रहे ओहदेदार, माओवादी मांग रहे पनाह!

विष्णुकांत मिश्र
01 दिसंबर 2025
New Delhi : नक्सली आतंक (Naxalite Terror) को 31 मार्च 2026 तक समूल समाप्त कर देने के केन्द्रीय गृह मंत्रालय (Union Home Ministry) के घोषित लक्ष्य के तहत नक्सल विरोधी अभियान (Anti Naxal Campaign) को और अधिक कारगर बनाने के लिए सुरक्षा बलों ने अपनी रणनीति बदल दी है. अब नक्सलियों के शीर्ष नेतृत्व (Top Naxalite leadership) को निशाना बनाया जाने लगा है. हाल के दिनों में संगठन के महासचिव समेत लगभग एक दर्जन बड़े ‘ओहदेदारों’ को मार गिराया गया है. पोलित ब्यूरो सदस्य (Politburo member) नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू, दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (Dandakaranya Special Zonal Committee) के सचिव माडवी हिड़मा, केन्द्रीय समिति (Central Committee Member) के सदस्य मनोज उर्फ मोडेम बालाकृष्णा (Manoj alias Modem Balakrishna), जयराम उर्फ चलपति (Jayaram alias Chalapathi), सेण्ट्रल रिजनल ब्यूरो की सदस्य (Member of the Central Regional Bureau) गुमुडावेल्ली रेणुका उर्फ भानू (Gumudavelly Renuka alias Bhanu) आदि उनमें शामिल हैं.
सबसे बड़ा झटका
माओवादी संगठन (Maoist organization) को सबसे बड़ा झटका 28 नक्सलियों के साथ डेढ़ करोड़ के इनामी नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू और उसके छह माह बाद नक्सली कमांडर इन चीफ (Naxalite Commander-in-Chief) माडवी हिड़मा (Madvi Hidma) के मारे जाने से लगा है. बसवराजू संगठन का महासचिव था. 21 मई 2025 को छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ के जंगलों में (In the Forests of Abujhmad in Chhattisgarh) मारा गया. छत्तीसगढ़ में ही जून 2025 में 40 लाख के इनामी नरसिम्हा चलम उर्फ सुधाकर को मौत के मुंह में झोंक दिया गया. माडवी हिड़मा आंध्रप्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले में (Alluri Sitarama Raju district in Andhra Pradesh) 18 नवम्बर 2025 को नक्सली पत्नी मधगाम राजे उर्फ रजक्का (Naxalite wife Madhagam Raje alias Rajakka) के साथ मारा गया.
सदा के लिए आतंक का अंत
2025 में मुठभेड़ की शुरुआत 19 जनवरी को हुई . गरियाबंद में जयराम उर्फ चलपति (Jairam alias Chalpati in Gariaband) मारा गया. 21 अप्रैल को झारखंड (Jharkhand) में विवेक मांझी को मौत के मुंह में धकेल दिया गया. 05 जून को बीजापुर (Bijapur) में थेंटू लक्ष्मी उर्फ सुधाकर, 18 जून को आंध्रप्रदेश (Andhra Pradesh) में गजराला रवि उर्फ उदय, 12 सितम्बर को गरियाबंद में मोडेम बालाकृष्णा उर्फ मनोज,14 सितम्बर को झारखंड में सहदेव सोरेन, 22 सितम्बर को अबूझमाड़ के नारायणपुर (Narayanpur of Abujhmad) में गुडसा उसेंडी उर्फ काट्टा राजचन्द्र रेड्डी उर्फ राजू दादा और कोसा उर्फ कदारी सत्यनारायण रेड्डी उर्फ कासा दादा के आतंक का सदा के लिए अंत हो गया. कहते हैं कि छतीसगढ़ के बस्तर में नक्सलवाद की नींव (Foundation of Naxalism) रखनेवाले 63 वर्षीय गुडसा उसेंडी उर्फ काट्टा राजचन्द्र रेड्डी उर्फ राजू दादा पर सात राज्यों ने 07 करोड़ का इनाम घोषित कर रखा था. कदारी सत्यनारायण रेड्डी उर्फ कोसा दादा ने आईआईटी से इंजिनियरिंग (Engineering from IIT) कर रखी थीं. हथियार निर्माण (weapons manufacturing) में वह पारंगत थे. श्रीलंका के लिट्टे (Sri Lankan LTTE) से उन्होंने प्रशिक्षण ले रखा था. इन मुठभेड़ों से मौत करीब देख बड़ी संख्या में नक्सली आत्मसमर्पण (Naxalite surrender) करने लगे हैं.
अब रह गये सिर्फ छह
भाकपा (माओवादी) के महासचिव नंबाला केशव राव बसवराजू की मौत के बाद ‘टॉप-टेन’ नक्सलियों (Top-Ten Naxalites) की सूची बनायी गयी थी. उसमें बारह बड़े माओवादियों के नाम थे. मुठभेड़ में तीन मारे गये. तीन ने हथियार डाल दिये. ‘टॉप-टेन’ सूची में अब सिर्फ छह रह गये हैं. सुरक्षा बलों ने इन सभी को निशाने पर ले रखा है. शीर्ष पर भाकपा (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य तथा केन्द्रीय समिति के सलाहकार 75 वर्षीय मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति उर्फ रमन्ना उर्फ गुडसा दादा है. 2004 में भाकपा (माओवादी) का गठन हुआ था. इसी गणपति (Ganpati) को पार्टी का महासचिव बनाया गया था. उम्र अधिक हो गयी तब सलाहकार की भूमिका में समेट उसकी जगह बसवराजू को महासचिव का पद दे दिया गया.

गुरिल्ला वार में माहिर
टॉप-टेन में दूसरे स्थान पर केन्द्रीय प्रवक्ता 70 वर्षीय मल्लोजुला वेणुगोपाल उर्फ अभय उर्फ भूपति था. वह भी पोलित ब्यूरो और केन्द्रीय समिति का सदस्य था. सेंट्रल रिजनल ब्यूरो के सचिव की भी जिम्मेवारी मिली हुई थी. 14 अक्तूबर 2025 को उसने महाराष्ट्र के गढ़चिरौली (Gadchiroli in Maharashtra) में पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण (surrender) कर दिया. तिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी तीसरे स्थान पर है. गुरिल्ला वार में माहिर देवजी पोलित ब्यूरो और केन्द्रीय समिति का सदस्य तो है ही, सेण्ट्रल मिलिट्री कमीशन (Central Military Commission) का भी प्रमुख है. चर्चा है कि बसवराजू की मौत के बाद इसी देवजी को भाकपा (माओवादी) का महासचिव पद मिला है. उस दिन माडवी हिड़मा को मुठभेड़ में मार गिराने के बाद सुरक्षा बलों ने इसके ठिकाने पर भी दबिश दी थी. हाथ नहीं लग पाया. चर्चा है कि अब वह भी हथियार डालने का जुगाड़ बैठा रहा है.
छिन्न-भिन्न हो गया नेतृत्व
पोलित ब्यूरो और केन्द्रीय समिति का सदस्य मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर उर्फ सुर्निमल झारखंड के गिरिडीह जिले के संथल मधुनदी गांव (Santhal Madhunadi village in Giridih district) का है. शीर्ष के ओहदेदारों में इसका स्थान चौथा है. माओवादी संगठन के इस्टर्न रिजनल ब्यूरो (झारखंड) का प्रभारी है. मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर के बाद पुल्लुरी प्रसाद राव उर्फ चंद्रन्ना का स्थान था. वह केन्द्रीय समिति का सदस्य और तेलंगाना राज्य समिति (Telangana State Committee) का सचिव था. मल्लोजुला वेणुगोपाल उर्फ अभय के आत्मसमर्पण के कुछ ही सप्ताह बाद उसने भी तेलंगाना पुलिस (Telangana Police) के समक्ष हथियार डाल दिया. मल्लोजुला वेणुगोपाल उर्फ अभय माओवादियों में राजनीतिक चेहरा था. पुल्लुरी प्रसाद राव उर्फ चंद्रन्ना संसाधन प्रबंधन और देश के विभिन्न हिस्सों में छिपे केन्द्रीय समिति के सदस्यों के बीच संचार समन्नवय (Communication Coordination) बनाये रखता था. इन दोनों शीर्ष माओवादी नेताओं के आत्मसमर्पण के साथ ही नक्सली संगठन का राजनीतिक नेतृत्व लगभग छिन्न-भिन्न हो गया है. ओडिसा राज्य समिति के सचिव गणेश उईके उर्फ गणेश उर्फ राजेश तिवारी पांचवें स्थान पर है. वह केन्द्रीय समिति का सदस्य है. उसकी पत्नी भी नक्सली थी. गढ़चिरौली में मुठभेड़ में मारी गयी.
परिदृश्य से ओझल
बिहार-झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी (Bihar-Jharkhand Special Area Committee) का सचिव अनल दा उर्फ तूफान उर्फ पतिराम मांझी टॉप-टेन की सूची में छठे स्थान पर है. सातवां स्थान सब्यसाची गोस्वामी उर्फ अजय दा का है, जो पश्चिम बंगाल-असम एरिया कमेटी (West Bengal-Assam Area Committee) का सचिव है. इन सब के अलावा 77 वर्षीय मल्ला राजी रेड्डी उर्फ संग्राम उर्फ सागर भी पोलित ब्यूरो का सदस्य है. लेकिन, विगत कई वर्षों से वह परिदृश्य से ओझल है. कहां है और क्या कर रहा है, यह किसी को नहीं मालूम है. वैसे, कहा जाता है कि बहुत बूढ़े हो जाने के कारण उसकी सेहत ठीक नहीं रहती है. सुरक्षा बलों को दक्षिण बस्तर (South Bastar) में सक्रिय केन्द्रीय समिति के सदस्य रामधेर और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (Dandakaranya Special Zonal Committee) के सचिव माडवी हिड़मा की भी तलाश थी. झारखंड के एक करोड़ के इनामी असीम मंडल उर्फ आकाश को भी उसने लक्षित कर रखा है.
तेलंगाना में कारगर नहीं
यह सब तो है, लेकिन सुरक्षा बलों के लिए माओवादियों की तेलंगाना राज्य समिति (Telangana State Committee of Maoists) चिंता की बात बनी हुई है. इससे जुड़े नक्सली पकड़ में नहीं आ रहे हैं. वैसे तो इस समिति से जुड़े माओवादी नेतृत्व के शीर्ष स्तर में नहीं आते, तब भी छोटे समूह बना आंदोलन को जिंदा रखने में वे पूरी तरह सक्षम माने जाते हैं. तेलंगाना राज्य समिति के दस सदस्यों में बाड़े चोक्का राव उर्फ दामोदर खतरनाक है. वह नक्सलियों के आत्मसमर्पण की प्रक्रिया में बाधा बना हुआ है. वह हथियार डाल देता है तो तेलंगाना में भी माओवादी संगठन सुस्त पड़ जा सकता है.
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