अंधविश्वास : आज भी है वहां… रूहों का वास!

तापमान लाइव ब्यूरो
11 दिसंबर 2025
New Delhi : पुराने किले, मौत, हादसों, अतीत और रूहों का अपना एक अलग ही सबंध और संयोग होता है. ऐसी किसी जगह जहां मौत का साया बनकर रूहें घुमती हों उन जगहों पर इंसान अपने डर पर काबू नहीं रख पाता है और एक अजीब दुनिया के सामने, जिसके बारे में उसे कोई अंदाजा नहीं होता, घुटने टेक देता है. दुनिया भर में कई ऐसे पुराने किले (Old Fort) हैं जिनका अपना एक अलग भयावह अतीत है और वहां आज भी रूहों का वास है. ऐसी जगहों के बारे में लोग जानते हैं, लेकिन बहुत कम ही लोग होते हैं, जो इनसे रूबरू होने की हिम्मत रखते हैं. जैसे हम दुनिया में अपने होने या न होने की बात पर विश्वास करते हैं वैसे ही हमारे दिमाग के एक कोने में इन रूहों की दुनिया के होने का भी आभास होता है.
शानदार अतीत
यह दीगर बात है कि कई लोग दुनिया के सामने इसे मानने से इनकार करते हों, लेकिन अपने तर्कों से सिर्फ खुद के दिल को तसल्ली दे सकते हैं, दुनिया की हकीकत को नहीं बदल सकते है. कुछ ऐसी ही कहानी है उस किले की जो अपने सीने में कलात्मक बनावट के साथ-साथ शानदार अतीत भी छुपाये हुए है. हालांकि, आधिकारिक तौर पर इसे बकवास बताया गया है, पर आम धारणा है कि इस किले पर शाम ढलते ही रूहों का कब्जा हो जाता है और शुरू हो जाता है उन सबका खौफनाक तांडव. राजस्थान (Rajasthan) में स्थित इस किले को भानगढ़ के किले (Bhangarh Fort) के नाम से जाना जाता है. यह किला सत्रहवीं शताब्दी में बनवाया गया था. निर्माण मान सिंह (Man Singh) के छोटे भाई राजा माधो सिंह (Madho Singh) ने करावाया था.
बेहतरीन शिल्पकला
राजा माधो सिंह मुगल सम्राट (Mughal Samrat) अकबर (Akbar) के सेना में जनरल थे. उस समय भानगढ़ की जनसंख्या तकरीबन 10 हजार थी. भानगढ़ किला अल्वर (Alvar) जिले में है. चारो तरफ से पहाड़ों से घिरे इस किले में बेहतरीन शिल्पकलाओं का प्रयोग किया गया है. इसके अलावा यहां भगवान शिव (Shiv), हनुमान (Hanuman) आदि के बेहतरीन और अतिप्राचीन मंदिर (Tample) हैं. किले में कुल पांच द्वार हैं और साथ-साथ एक मुख्य दीवार है. इसके निर्माण में मजबूत पत्थरों का प्रयोग किया गया है जो अतिप्राचीन काल से यथास्थिति में हैं. भानगढ़ किला देखने में जितना आकर्षक है उसका अतीत उतना ही खौफनाक है.
होती है चर्चा इस कहानी की
इस किले के बारे में एक कहानी प्रसिद्ध है कि भानगढ़ की राजकुमारी रत्नावती (Princess Ratnavati) नाम के अनुरूप बेहद खूबसूरत थी, उस समय उनके रूप की चर्चा पूरे राज में थी. देश के कोने-कोने के राजकुमार उनसे विवाह करने के इच्छुक थे. उस समय उनकी उम्र महज 18 वर्ष ही थी और उनका यौवन उनके रूप में और निखार ला चुका था. कई राज्यों से उनके लिए विवाह के प्रस्ताव (Marriage Proposal) आ रहे थे. उसी दौरान वह एक दिन सखियों के साथ बाजार निकली थी. राजकुमारी रत्नावती इत्र की एक दुकान पर पहुंची और इत्रों को हाथों में ले उसकी खुशबू ले रही थी. उस दुकान से कुछ ही दूरी से सिंघिया नामक व्यक्ति उन्हें काफी गौर से देख रहा था. वह उसी राज में रहता था और काले जादू (Black Magic) का महारथी था.

तांत्रिक और काला जादू
ऐसा बताया जाता है कि वह राजकुमारी के रूप का दीवाना था और उनसे प्रगाढ़ प्रेम करता था. वह किसी भी तरह राजकुमारी को हासिल करना चाहता था. इसलिए उसने उस दुकान के पास आकर इत्र के एक बोतल, जिसे रानी पसंद कर रही थी, पर काला जादू कर दिया. ऐसा उसने राजकुमारी के वशीकरण (Spell) के लिए किया था. राजकुमारी रत्नावती ने इत्र के उस बोतल को उठाया और वहीं पास के एक पत्थर पर पटक दिया. पत्थर पर पटकते ही वह बोतल टूट गया और सारा इत्र पत्थर पर बिखर गया. फिर वह पत्थर फिसलते हुए उस तांत्रिक सिंघिया के पीछे चल पड़ा और उसे कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गयी.
मारे गये सारे लोग
मरने से पहले तांत्रिक ने शाप दिया कि इस किले में रहनेवाले सभी लोग जल्द ही मर जायेंगे और दोबारा जन्म नहीं ले सकेंगे. ताउम्र उनकी आत्माएं इस किले में भटकती रहेंगी. तांत्रिक की मौत के कुछ दिनों के बाद ही भानगढ़ और अजबगढ़ (Ajabgrah) के बीच युद्ध हुआ जिसमें किले में रहनेवाले सारे लोग मारे गये. यहां तक कि राजकुमारी रत्नावती भी उस शाप से नहीं बच सकी और उसकी भी मौत हो गयी. एक ही किले में एक साथ इतने बड़े कत्लेआम के बाद वहां मौत की चीखें गूंज गयीं और आज भी उस किले में उनकी रूहें घुमती हैं.
नहीं जाता कोई सूर्यास्त के बाद
फिलहाल इस किले की देखरेख भारत सरकार द्वारा की जाती है. किले के चारो तरफ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India) विभाग की टीम मौजूद रहती है. विभाग के निर्देशानुसार सूर्यास्त के बाद इस इलाके में किसी भी व्यक्ति के रुकने की मनाही है. बताया जाता है कि इस किले में जो भी सूर्यास्त के बाद गया आमतौर पर वापस नहीं आया. कई बार लोगों को रूहों ने परेशान किया और कुछ लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा. आसपास के लोग बताते हैं कि इस किले में कत्लेआम किये गये लोगों की रूहें आज भी भटकती हैं. कई बार इस समस्या से रूबरू हुआ गया है.
चूड़ियां खनकने की आवाज
एक बार भारत सरकार ने अर्धसैनिक बलों की एक टुकड़ी यहां लगायी थी ताकि इस बात की सच्चाई जानी जा सके. लेकिन, वह भी असफल रही. कई सैनिकों ने रूहों के इस इलाके में होने की पुष्टि की थी. किले में आज भी तलवारों की टनकार और लोगों की चीख को महसूस किया जाता है. इसके अलावा इस किले के भीतर कमरों में महिलाओं के रोने या फिर चूड़ियों के खनकने की भी आवाजें भी साफ सुनी जाती है. किले के पिछले हिस्से में एक छोटा-सा दरवाजा है. उस दरवाजे के पास बहुत ही अंधेरा रहता है. कई बार वहां किसी के बात करने या एक विशेष प्रकार की गंध को महसूस किया गया है. किले में शाम के वक्त सन्नाटा पसरा रहता है और अचानक ही किसी के चिखने की भयानक आवाज गूंज जाती है.

