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त्रिवेणी संगम : सज रहा प्रयागराज… बड़ा महत्व है माघ मेला का

2025 में प्रयागराज की पावन धरती पर महाकुंभ आयोजित हुआ. 2026 में गंगा, यमुना और सरस्वती के उसी त्रिवेणी संगम के किनारे माघ मेला का आयोजन होगा. त्रिवेणी के तट पर हर साल लगने वाले माघ मेला से सनातन धर्मांवलंबियों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है. यही वजह है कि माघ मेले में लाखों की संख्या में श्रद्धालु एवं साधु-संत जुटते हैं.

तापमान लाइव ब्यूरो
27 दिसम्बर 2025

Allahabad : सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के बाद देवताओं और राक्षसों के बीच हुई अमृत घट की छीनाझपटी के दौरान जिन चार स्थानों- प्रयागराज (Prayagraj), उज्जैन (Ujjain), नासिक (Nasik) और हरिद्वार (Haridwar) में अमृत की बूंदें गिरी थी, वहां अलग-अलग हर बारह साल पर कुंभ मेला (Kumbh Mela) आयोजित होता था. 2025 में प्रयागराज की पावन धरती पर महाकुंभ (Mahakumbh) आयोजित हुआ. 2026 में गंगा, यमुना और सरस्वती के उसी त्रिवेणी संगम (Triveni Sangam) के किनारे माघ मेला का आयोजन होगा. त्रिवेणी के तट पर हर साल लगने वाले माघ मेला से सनातन धर्मांवलंबियों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है. यही वजह है कि माघ मेले में लाखों की संख्या में श्रद्धालु एवं साधु-संत (Sadhu-Sant) जुटते हैं. स्नान-दान कर पुण्य कमाते हैं. उनके लिए कुंभ की तरह ही माघ मेले का भी विशेष महत्व है.

कई गुणा अधिक पुण्य

प्रयागराज के संगम तट (Sangam Beach) पर माध मेला (Magh Mela) हर साल पौष पूर्णिमा से लेकर महाशिवरात्रि तक लगता है. सनातन धर्म (Sanatan Dharma) में स्नान-दान के लिए पूर्णिमा की तिथि अत्यंत महत्वपूर्ण मानी ही जाती है, इस पुण्य के लिए माघ माह का भी विशेष महत्व है. 2026 में माघ मेले की शुरुआत 03 जनवरी यानी पौष पूर्णिमा से होगी और समापन 15 फरवरी को होगा. उसी दिन महाशिवरात्रि (Mahashivratri) मनायी जायेगी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माघ माह में किये गये स्नान-दान से व्यक्ति को कई गुणा अधिक पुण्य फल की प्राप्ति होती है. हर तरह के पापों से मुक्ति मिल जाती है.

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कल्पवास का भी है महत्व

माघ मेला में संगम स्नान करने से व्यक्ति को अमृत गुण प्राप्त होते हैं. ऐसा कहा जाता है कि इस मेले में पुण्य कमा लोग अपने पाप से मुक्ति पा सकते हैं और मृत्यु उपरांत मोक्ष (Moksh) की प्राप्ति कर सकते हैं. यानी जीवन-मरण के बंधनों से मुक्त हो जा सकते हैं. 2026 में माघ मेला 44 दिनों का होगा. माघ में कल्पवास (Kalpwas) का भी खास महत्व है. प्रयागराज के संगम तट पर हर साल तम्बू डाल भक्तगण कल्पवास करते हैं. कल्पवास माघ मेले का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, जो पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी से शुरू होकर माघ माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी के दिन तक होता है. कुछ लोग मकर संक्रांति (Makar Sankranti) के दिन से भी कल्पवास आरंभ करते हैं.

शाही स्नान की प्रमुख तिथियां

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक माघ मेले में प्रमुख तिथियों पर शाही स्नान (shahee Snaan) करने से आत्मा शुद्ध होती है और पाप धुल जाते हैं. 2026 के माघ मेले की प्रमुख तिथियां इस प्रकार हैं :

(यह आस्था और विश्वास की बात है. मानना और न मानना आप पर निर्भर है.)

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