Bollywood : तू छुपी हो कहां… घाघरा वाली !

सत्येन्द्र मिश्र
31 दिसम्बर 2025
Mumbai : खूबसूरत चेहरा, काले घने लंबे घुंघराले बाल, बड़ी आंखें और कातिल अदाएं… एक फिल्म (Film) निर्माता-निर्देशक किसी अभिनेत्री (Actress) में जो खासियत चाहता है, सब कुछ था उनमें. रुपहले पर्दे पर ‘जाओ चाहे दिल्ली, बम्बई, आगरा… कहीं न मिलेगा ऐसा घाघरा…’ गाने पर जलवा बिखेर उस हसीना ने युवा दिलों पर छुरियां चलाने की सिनेमाई काबिलियत (Capability) भी दिखायी थी. फलस्वरूप कुछ बड़ी फिल्मों में काम मिल गये थे, बड़ी पहचान उभर रही थी, बड़ा नाम हो रहा था. लेकिन, इसी बीच अचानक वह सिने परिदृश्य से ओझल हो गयीं. कौन थीं वह बिंदास हसीना और फिल्मों से उनके अचानक गायब हो जाने का रहस्य क्या है? इसका खुलासा यहां किया जा रहा है.
आज भी गुनगुनाते हैं लोग
हसीना थीं वह सुमन रंगनाथन (Suman Ranganathan). कर्नाटक (Karnataka) की रहने वाली सुमन रंगनाथन मॉडलिंग करती थीं. फिर फिल्मों में आ गयीं. उनके फिल्मी सफर की शुरुआत कन्नड़ (Kannada) और तमिल (Tamil) सिनेमा से हुई. दक्षिण की फिल्मों (South Movies) में वर्षों तक काम करने के बाद उन्होंने हिन्दी फिल्मों की ओर रुख कर मुम्बई पहुंच गयीं. 1996 में फिल्म ‘फरेब’ (Fareb) से शुरुआत हुई. उसमें फराज खान (Faraz Khan) और मिलिंद गुनाजी (Milind Gunaji) अभिनेता थे. फिल्म अच्छी थी. पर, अधिक पसंद उसके गाने ‘ये तेरी आंखें झुकीं-झुकीं’ से की गयी. वह गाना आज भी लोग गुनगुनाते हैं.
धीरे-धीरे दूर हो गयीं
उसके बाद सुमन रंगनाथन और कई हिन्दी फिल्मों में आयीं. 1999 में ‘आ अब लौट चलें’ (Aa ab laut Chalen) और 2003 में ‘बागवान’ (Bagavan) में उन्होंने काम किया. ‘आ अब लौट चलें’ में अक्षय खन्ना (Akshaye Khanna) और ऐश्वर्या राय (Aishwarya Rai) तथा ‘बागवान’ में अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) और हेमा मालिनी (Hema Malini) के साथ काम करने का अवसर प्राप्त हुआ. उसी दौरान ‘कुरुक्षेत्र’ (Kurukshetra) में उन्होंने आइटम सांग किया- ‘जाओ चाहे दिल्ली, बम्बई, आगरा… कहीं न मिलेगा ऐसा घाघरा…’ जिसे लोगों ने खूब पसंद किया. उसके बाद वह कुछ और फिल्मों में दिखीं. लेकिन, फिर धीरे-धीरे सिने जगत से दूर हो गयीं.
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