सत्ता और सियासत : भाजपा अभी इंतजार करेगी

नीतीश कुमार का तेजस्वी प्रसाद यादव के समर्थन से सरकार चलाना सिरदर्द साबित होता रहा है. जोड़-तोड़ कर नीतीश कुमार फिर तेजस्वी प्रसाद यादव के साथ सरकार बना भी लेंगे, तो वह टिकाऊ नहीं होगी. दो बार तेजस्वी प्रसाद यादव के साथ उन्होंने सरकार बनायी, बहुत तंग किया गया. दबाव बनाया जाता था. परोक्ष रूप से ताना भी कि मुख्यमंत्री पद के हकदार तो तेजस्वी प्रसाद यादव हैं. नीतीश कुमार पर तेजस्वी प्रसाद यादव को सत्ता सौंप, राष्ट्रीय राजनीति के वियावान में खो जाने का दबाव रहा.

विभेष त्रिवेदी
07 जनवरी 2026
Patna: बिहार में तत्काल तख्तापलट की आशंका नहीं है. ऐसा करना न तो भाजपा के लिए और न ही नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के लिए मुफीद होगा. अनुभव बताते हैं कि नीतीश कुमार का तेजस्वी प्रसाद यादव (Tejaswi Prasad Yadav) के समर्थन से सरकार चलाना सिरदर्द साबित होता रहा है. जोड़-तोड़ कर नीतीश कुमार फिर तेजस्वी प्रसाद यादव के साथ सरकार बना भी लेंगे, तो वह टिकाऊ नहीं होगी. दो बार तेजस्वी प्रसाद यादव के साथ उन्होंने सरकार बनायी, बहुत तंग किया गया. दबाव बनाया जाता था. परोक्ष रूप से ताना भी कि मुख्यमंत्री (Chief Minister) पद के हकदार तो तेजस्वी प्रसाद यादव हैं. नीतीश कुमार पर तेजस्वी प्रसाद यादव को सत्ता सौंप, राष्ट्रीय राजनीति के वियावान में खो जाने का दबाव रहा.
वक्त का इंतजार करेंगे
इससे पहले जब 43 विधायकों की पार्टी के मुखिया रहते हुए नीतीश कुमार ने भाजपा (BJP) की बदौलत सत्ता संभाली थी, तो केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह (Giriraj Singh) व प्रदेश भाजपा के तब के अध्यक्ष डा. संजय जायसवाल (Dr. Sanjay Jaiswal) शब्दबाण चलाते रहे. बिहार (Bihar) विधानसभा अध्यक्ष (Assembly Speaker) विजय कुमार सिन्हा (Vijay Kumar Sinha) के नखरे उठाने पड़े. उम्मीद की जाती है कि 85 विधायकों के साथ लौटे नीतीश कुमार के साथ भाजपाई फिलहाल अदब से पेश आयेंगे और उस वक्त का इंतजार करेंगे जब नीतीश कुमार की सेहत (Health) जवाब दे देगी. सवाल उठता है कि नीतीश कुमार मानसिक (Mental) और शारीरिक (Physical) रूप से कितने कमजोर या लाचार हुए हैं. वक्त ही सिकंदर है. हाथ सिर्फ नीतीश कुमार के नहीं कांपते हैं, प्रधानमंत्री (Prime Minister) नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) के भी कांपने लगे हैं.
कुछ भी कर सकते हैं
बड़ा सवाल यह है कि क्या बिहार में एनडीए गठबंधन (NDA Alliance) में नीतीश कुमार की सरकार पांच साल निर्बाध रूप से चल पायेगी? पटना से लेकर दिल्ली तक भाजपा के चाल-चरित्र के जानकारों का दावा है कि तख्तापलट हो कर रहेगा. इनकार नहीं किया जा सकता है. दूसरी ओर अगर भाजपा ने नीतीश कुमार को परेशान किया तो वे भी कम मंझे हुए खिलाड़ी नहीं हैं. याद रहे ‘टाइगर अभी जिंदा है’. नीतीश कुमार कुछ भी कर सकते हैं. बिहार विधानसभा के चुनाव (Bihar Assembly Elections) के दौरान नीतीश कुमार एक बार भी लाचार (Helpless) या बीमार (Sick) नजर नहीं आये. खासकर सीटों के बंटवारे और प्रत्याशियों के चयन में भी पहले वाले चतुर और चौकस नीतीश कुमार नजर आये. उन्होंने सीट बंटवारे की गड़बड़ी दूर की और सीट अधिक नहीं तो बराबर की संख्या में लेकर अपनी अहमियत बरकरार रखी.
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सरकार पर नियंत्रण
यह सही है कि बढ़ती उम्र के साथ वह कभी-कभी लोगों के नाम भूल जाते हैं. संभव है कि सभी मंत्रियों को उनके नाम लेकर वह नहीं बुला सकें. लेकिन, भाजपा मुगालते में न रहे तो बेहतर होगा. नीतीश कुमार न तो खुद कुछ गड़बड़ी करेंगे और न भाजपा अथवा किसी सहयोगी दल के मंत्री को हाथ-पैर भांजने देंगे. भले ही भाजपा ने गृह मंत्री (Home Minister) की कुर्सी ले ली है, परन्तु पुलिस उपाधीक्षक (DSP) स्तर के ऊपर के अधिकारियों का तबादला मुख्यमंत्री ही करेंगे. कई राज्यों में गृह विभाग मुख्यमंत्री के पास नहीं रहता है. जदयू नेताओं ने नपे-तुले शब्दों में भाजपा को यह कहकर आईना दिखाया है कि कुल मिलाकर नीतीश कुमार का पूरी सरकार पर नियंत्रण (Control) रहेगा.
(विभेष त्रिवेदी बिहार के वरिष्ठ पत्रकार हैं.)
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