सत्ता और सियासत : जदयू बढ़ायेगा आंकड़ा

सियासी गलियारों में इस सवाल का भी जवाब ढूंढ़ा जा रहा है कि जदयू कोटे से सिर्फ आठ मंत्रियों को शपथ क्यों दिलायी गयी? नीतीश कुमार ने सोची-समझी रणनीति के तहत छह मत्रियों के पद खाली रखे हैं. इसके पीछे की रणनीति है, कांग्रेस को तोड़ना. कांग्रेस के छह में से चार हिन्दू विधायकों और बसपा-आईआईपी के एक-एक विधायक को तोड़ते समय उन्हें मंत्री पद दिये जा सकते हैं. इस प्रकार जदयू का आंकड़ा 91 तक पहुंच जा सकता है.

विभेष त्रिवेदी
08 जनवरी 2026
Patna: इसमें दो मत नहीं कि नीतीश कुमार (Nitish Kumar) मानसिक और शारीरिक रूप से पहले जैसा सक्षम नहीं हैं. इसलिए उन्होंने स्वेच्छा से अपना बोझ कुछ हल्का करने के लिए गृह विभाग (Home Ministry) छोड दिया है. बिहार (Bihar) के कई जिले अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर हैं. बंगलादेश (Bangladesh) में उथल-पुथल और दिल्ली (Delhi) में आतंकी विस्फोट (Terrorist Visfot) के कारण अंतर्राष्ट्रीय सीमा एक बार फिर से संवेदनशील (Sensitive) हो गयी है. नियमित निगरानी और केन्द्रीय गृह मंत्रालय (Union Home Ministry) से समन्वय में सम्राट चौधरी की परीक्षा होनी है. नीतीश कुमार इतने ढीले नहीं हुए हैं कि भाजपा (BJP) का कोई मंत्री कुछ ऐसा-वैसा करने की हिमाकत कर ले.अनुचित और अनुपयुक्त कदम बढ़ाने की छूट नहीं होगी. खासकर, प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) ने जिस तरह सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary), मंगल पाण्डेय (Mangal Panday), डा. दिलीप जायसवाल (Dr. Dilip Jaiswal) और अशोक चौधरी (Ashok Choudhary) पर गंभीर आरोप लगाये, सभी मंत्रियों को अपनी कार्य संस्कृति में सुधार लाना पड़ेगा.
यह है रणनीति
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने उपमुख्यमंत्री (Deputy Chief Minister) सम्राट चौधरी को दिल्ली बुलाकर समझाया है कि उनकी प्राथमिकताएं क्या होंगी. उतावलेपन में अगर गठबंधन (Alliance) धर्म की सीमाएं लांघ बैठे तो नीतीश कुमार बर्दाश्त नहीं करेंगे. सियासी गलियारों में इस सवाल का भी जवाब ढूंढ़ा जा रहा है कि जदयू (JDU) कोटे से सिर्फ आठ मंत्रियों को शपथ क्यों दिलायी गयी? नीतीश कुमार ने सोची-समझी रणनीति के तहत छह मत्रियों के पद खाली रखे हैं. इसके पीछे की रणनीति है, कांग्रेस (Congress) को तोड़ना. कांग्रेस के छह में से चार हिन्दू (Hindu) विधायकों और बसपा (BSP)-आईआईपी (IIP) के एक-एक विधायक को तोड़ते समय उन्हें मंत्री पद दिये जा सकते हैं. इस प्रकार जदयू का आंकड़ा 91 तक पहुंच जा सकता है. ऐसी चर्चा है कि ललन सिंह (Lalan Singh) ने इस ऑपरेशन में ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी को लगा रखा है, इसलिए उन्हें मंत्रिमंडल (Cabinet) में वापसी करायी गयी है.
तब तमाशा नहीं देखेगी
कांग्रेस के दो मुस्लिम विधायकों को तोड़ना आसान नहीं होगा. मनिहारी (Manishari) से तीन बार कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर निर्वाचित मनोहर प्रसाद सिंह (Manohar Prasad Singh) 2010 में पहली बार जदयू उम्मीदवार के रूप में विजयी हुए थे. 2015 में जदयू महागठबंधन (Mahagathbandhan) का हिस्सा था. सीटों के बंटवारे में मनिहारी कांगेेस के हिस्से में गया. मनोहर प्रसाद सिंह उस चुनाव में भी जीत गये. पुराने घर जदयू में उनकी वापसी सहज मानी जाती है. सवाल उठता है कि क्या भाजपा हाथ पर हाथ डालकर तमाशा देखेगी? जदयू को सबसे बड़ी पार्टी बनने देगी या दूसरे दलों के विधायकों को तोड़कर अपनी बढ़त बनाये रखेगी? यह सामान्य समझ की बात है कि जदयू सबसे बड़ा दल बन गया तो अपनी शर्तों पर सरकार चलाना चाहेगा. भाजपा का हाथ ऊपर नहीं रहेगा.
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अध्यक्ष की भूमिका
सूत्रों की मानें तो जदयू की ऐसी कोई पहल होती है तब विधायकों को तोड़ने-खरीदने का ऑपरेशन भाजपा भी शुरू कर दे सकती है. ऐसे मौके पर विधानसभा के अध्यक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण हो जायेगी. भाजपा की पहली रणनीति अध्यक्ष का चयन परस्पर विश्वास के साथ सुगमता से करा लेने का था. इसमें वह कामयाब रही. संसदीय जीवन का लंबा अनुभव रखने वाले भाजपा के पूर्व मंत्री डा. प्रेम कुमार (Dr. Prem Kumar) बिहार विधसानसभा (Bihar Legislative Assembly) के अध्यक्ष (Speaker) पद पर आसीन हो गये हैं. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विधायकों को तोड़ने-जोड़ने में कौन बाजी मारता है? अगले तीन-चार महीने में पर्दा उठने लग जायेगा.
(विभेष त्रिवेदी बिहार के वरिष्ठ पत्रकार हैं.)
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