सत्ता और सियासत : असंतोष गहरा जायेगा तब

भाजपा ऐसी स्थिति में नहीं है कि सरकार को आदेश-निर्देश दे. यह तभी संभव होगा जब वह सीधे जदयू को तोड़ेगी. जैसे ही ऐसा प्रयास करेगी, नीतीश कुमार पहले की तरह पाला बदल ले सकते हैं. वैसे, उनकी पलटी परिस्थितियों पर निर्भर करेगी. तत्काल कोई कारण नहीं दिख रहा है.

विभेष त्रिवेदी
09 जनवरी 2026
PATNA : राजनीति के लिए महत्वपूर्ण बात यहां यह भी है कि नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने दूसरे दलों से विधायकों को लाकर मंत्री (Minister) बनाते हैं तो जदयू (JDU) में असंतोष गहरा जा सकता है. अनेक कद्दावर विधायकों को मंत्रिमंडल (Cabinet) विस्तार का इंतजार है. जदयू के 85 विधायकों में से सिर्फ 08 को मंत्रिमंडल में शामिल कर चट्टानी एकता की उम्मीद नहीं की जा सकती है. विश्लेषकों की समझ में जदयू ने बाहर से विधायकों को ला उन्हें मंत्री बनाया तो भाजपा (BJP) की राह आसान हो जायेगी. जदयू के असंतुष्ट विधायकों को भाजपा आसानी से तोड़ अकेले बहुमत जुटाने की रणनीति पर अमल कर सकती है. फिलहाल भाजपा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सेहत में और गिरावट का इंतजार करेगी ताकि नेतृत्वविहीन होकर जदयू स्वतः टूट जाये. ऐसे में भाजपा पर दल तोड़ने का इल्जाम नहीं लगेगा और पार्टी की झोली भर जायेगी. पर, अगले छह महीने तक ऐसा कुछ नहीं होने जा रहा है. इस बीच भाजपा और जदयू के शीर्ष नेता धीरे-धीरे शतरंज के मोहरे सजा सकते हैं.
मिल सकता है साथ
एआईएमआईएम (AIMIM) नीतीश कुमार का समर्थन करेगा. मुस्लिम (Muslim) समाज नहीं चाहता है कि सीधे भाजपा के हाथों में सत्ता चली जाये. नीतीश कुमार के शासनकाल में मुस्लिम समाज के साथ भेदभाव नहीं किया गया. कहीं बड़ा दंगा नहीं हुआ. सरकारी योजनाओं में मुस्लिम बराबर के हकदार हैं. मुस्लिम समाज देख रहा है कि जब महागठबंधन (Mahagathbandhan) की सरकार नहीं बन सकती है तो किसी भी हालत में नीतीश कुमार के हाथों से निकल कर सत्ता भाजपा के पास नहीं चली जाये. फिलहाल भाजपा ऐसी स्थिति में नहीं है कि सरकार को आदेश-निर्देश दे. यह तभी संभव होगा जब वह सीधे जदयू को तोड़ेगी. जैसे ही ऐसा प्रयास करेगी, नीतीश कुमार पहले की तरह पाला बदल ले सकते हैं.
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भाजपा को भरोसा नहीं
वैसे, उनकी पलटी परिस्थितियों पर निर्भर करेगी. तत्काल कोई कारण नहीं दिख रहा है. भाजपा ने बेताबी दिखाई या किसी नेता की बेतुकी बातों से नीतीश कुमार आहत हो बिदक गये तो विपक्ष रेड कार्पेट बिछाने को तैयार बैठा है. हालांकि, विश्लेषकों की समझ है कि अमित शाह (Amit Shah) का शातिर दिमाग इस बार पश्चिम बंगाल (West Bangal) के चुनाव के बाद न तो तेजस्वी प्रसाद यादव (Tejaswi Prasad Yadav) को रेड कार्पेट बिछाने लायक छोड़ेगा और न नीतीश कुमार को पलटी मारने की मोहलत देगा. नीतीश कुमार पच्चीस बार दोहरा चुके हैं कि अब कहीं नहीं जायेंगे, लेकिन भाजपा उन पर भरोसा नहीं कर सकती. राजनीति संभावनाओं का खेल है, कुछ भी हो सकता है.
(विभेष त्रिवेदी बिहार के वरिष्ठ पत्रकार हैं.)
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