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अचंभित मुजफ्फरपुर : अपनो का चक्रव्यूह, कठिन राह से निकली जीत

उम्मीदवारी से वंचित सुरेश शर्मा घर में बंद हो गये. खबरें छन-छन कर आती रहीं कि उनके लड़के पर्दे के पीछे से अपने लोगों को भाजपा का सहयोग नहीं करने की हिदायत दे रहे हैं. इधर आरोप लगा कि रंजन कुमार पार्टी के नेताओं-कार्यकर्त्ताओं को नहीं पूछ रहे हैं. भाजपा के कुछ नेताओं और संघ के एक खेमे को छोड़कर सब की जुबान पर एक ही भविष्यवाणी थी, रंजन कुमार हार रहे हैं.

अक्षय आकाश
11 जनवरी 2026

Muzaffarpur: विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) के दौरान मुजफ्फरपुर में भाजपा (BJP) के मठाधीशों के सिपाही आपस में तलवारबाजी कर रहे थे. दूसरी ओर कांग्रेस (Congress) विधायक विजेन्द्र चौधरी (Vijendra Chaudhary) जातीय जनाधार और निगम पार्षदों की मदद से चुपचाप मोर्चाबंदी कर रहे थे. रंजन कुमार (Ranjan Kumar) को कमजोर प्रत्याशी बताया जा रहा था. लोग यह भूल गये कि रंजन कुमार सिर्फ एक चेहरा मात्र हैं. विजेन्द्र चौधरी को भाजपा के अंतर्कलह से बहुत उम्मीद थी. प्रदेश संगठन महामंत्री भीखूभाई दलसानिया, केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डा. दिलीप जायसवाल (Dr. Dilip Jaiswal), पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. संजय जायसवाल (Dr. Sanjay Jaiswal) के कमांडर मुजफ्फरपुर में एक-दूसरे पर निशाने साध रहे थे. चुनावी वर्ष में संजय-दिलीप की जोड़ी ने मुजफ्फरपुर पूर्वी में पूर्व उपमहापौर (Vice Mayor) विवेक कुमार और पश्चिमी में हरिमोहन चौधरी को भाजपा का जिला अध्यक्ष बनवाया, जबकि दोनों क्रमशः मुजफ्फरपुर और कांटी से उम्मीदवारी के प्रबल दावेदार थे.

पैंतरा बदलते रहे नेता

ऐसी चर्चा हुई कि भीखूभाई दलसानिया (Bhikhubhai Dalsania) के खास माने जानेवाले मुजफ्फरपुर से दूसरे दावेदार प्रदेश महामंत्री राजेश वर्मा ने अपना रास्ता साफ करने के लिए विवेक कुमार (Vivek Kumar) को जिला अध्यक्ष (District President) बनाने में मदद की. हरिमोहन चौधरी (Harimohan Choudhary) ने कांटी से पूर्व मंत्री अजीत कुमार (Ajit Kumar) की उम्मीदवारी का और राजेश वर्मा-विवेक कुमार ने अपनी दावेदारी मजबूत बनाने के लिए मुजफ्फरपुर से पूर्व मंत्री सुरेश शर्मा की उम्मीदवारी का विरोध शुरू किया. जब संकेत मिल गया कि बढ़ी उम्र के आधार पर सुरेश शर्मा को मार्गदर्शक मंडल में डाला जा सकता है और नित्यानंद राय (Nityanand Ray) हर हाल में रंजन कुमार को उम्मीदवार बनाना चाहते हैं, तब कथित रूप से राजेश वर्मा-विवेक कुमार ने सुरेश शर्मा से हाथ मिला लिया.

इस तरह खुद को उबार लिया

भाजपा के ही लोग कहते हैं कि भीखूभाई दलसानिया के संरक्षण में राजेश वर्मा (Rajesh Verma) की संगठन में तूती बोलती है. मुजफ्फरपुर में तो मूल संगठन के साथ सभी मंच-मोर्चा में भी राजेश वर्मा के समर्थक भरे पड़े हैं. मुजफ्फरपुर में तमाम चुनावी बैठकों में एकाधिकार जमा चुकी राजेश वर्मा-विवेक कुमार की जोड़ी से रंजन कुमार की कड़वाहट चरम पर पहुंच गयी. हालात को भांप चुके रंजन कुमार ने समानांतर बैठकें आयोजित कर अपनी टीम को बूथ स्तर पर लामबंद किया. अब इस बहस में फंसना बेकार है कि दोनो गुटों में कौन ज्यादा दोषी था. रंजन कुमार को टिकट मिला, तो अनेक भाजपाइयों के सीने पर सांप लोट गया. भाजपाई ही रंजन कुमार के कथित दंभ, घमंड को उजागर करने वाले वीडियो फुटेज वायरल करने-कराने लगे.

नाम सबसे ऊपर था

उम्मीदवारी से वंचित सुरेश शर्मा (Suresh Sharma) घर में बंद हो गये. खबरें छन-छन कर आती रहीं कि उनके लड़के पर्दे के पीछे से अपने लोगों को भाजपा का सहयोग नहीं करने की हिदायत दे रहे हैं. इधर आरोप लगा कि रंजन कुमार पार्टी के नेताओं-कार्यकर्त्ताओं को नहीं पूछ रहे हैं. भाजपा के कुछ नेताओं और संघ के एक खेमे को छोड़कर सब की जुबान पर एक ही भविष्यवाणी थी, रंजन कुमार हार रहे हैं. राजेश वर्मा-विवेक कुमार के समर्थक खुश थे कि रंजन कुमार के हारने के बाद अगले चुनाव में उनके नेता को उम्मीदवारी मिलेगी. भाजपा के हार रहे प्रत्याशियों की सूची में मुजफ्फरपुर के रंजन कुमार का नाम सबसे ऊपर था.

मोदी-नीतीश के साथ

इन पंक्तियों के लेखक से एक दिन मोबाइल फोन पर भाजपा महिला मोर्चा (BJP Mahila Morcha) की पूर्व जिला अध्यक्ष डा. रागिनी रानी (Dr. Ragini Rani) ने पूछा, शहर की क्या स्थिति है? मैंने दो टूक बताया, भाजपा नेता खुला विरोध कर रहे हैं, मतदाता एनडीए के साथ हैं. उन्होंने राहत की सांस लेते हुए आश्वस्त होना चाहा, सचमुच मतदाता रंजन कुमार के साथ हैं? रंजन कुमार के नहीं, मोदी-नीतीश के साथ हैं. अगर कोई भाजपा नेता मतदाताओं को बरगलाने भी जाये तो उसकी बात अनसुनी कर दी जायेगी. यही हुआ, मतदाताओं (Voters) ने बिना शोरगुल के एनडीए (NDA) के पक्ष में मतदान किया. डा. रागिनी रानी ने प्रवासी महिला कार्यकर्ताओं की जगह-जगह मीटिंग करायी. जब जीविका दीदियों ने मोर्चा संभाला, मुकाबला टर्निंग प्वाइंट पर आ गया.

कांटी में रची गयी साजिश

जीत-हार की भविष्यवाणी में सबकी जुबान पर एक ही बात थी, कांटी से पूर्व मंत्री अजीत कुमार जीतेंगे. इधर, भाजपा के पश्चिमी जिला अध्यक्ष हरिमोहन चौधरी कथित रूप से अजीत कुमार के खिलाफ घटक दलों के जिला अध्यक्षों को गोलबंद कर चुके थे. गनीमत थी कि जदयू (JDU) ने कांटी (Kante) सीट सुनिश्चित करने के लिए पूर्व मंत्री अजीत कुमार को भाजपा से बुलाकर अपना चुनाव चिह्न सौंप दिया. पहले से निर्णय ले चुके मतदाता अजीत कुमार के खिलाफ भाजपा के किसी भी नेता की बात सुनने को तैयार नहीं थे. हरिमोहन चौधरी की शिकायत है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सभा में उन्हें मंच पर बैठने नहीं दिया गया.

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यह सब भी खूब हुआ

सालों भर जनता के बीच रहने वाले अजीत कुमार कांटी में अपनी जमीन तैयार कर चुके थे और ऊपर से नीतीश-मोदी (Nitish-Modi) लहर चल रही थी. असंतुष्ट नेताओं की नहीं चली. विरोधी उम्मीदवार ने एक घिनौना खेल शुरू किया. पुराने वीडियो को एडिट कर वायरल कराया. वीडियो का उद्देश्य जातीय जहर फैलाकर एनडीए समर्थकों (NDA Supporters) में विभाजन कराना था, लेकिन जनता समझ चुकी थी. आत्मघाती दस्ते की तरह दो-चार ऐसे लड़कों को तैयार किया, जो अजीत कुमार के काफिले के सामने आ जाते थे. आपत्तिजनक बातें करने लगते थे, ताकि अजीत कुमार आपा खो बैठें. जवाबी हमले का वीडियो बनाकर वायरल किया जाये. अजीत कुमार इस बार सतर्क थे. संयमित रहे.

(अक्षय आकाश प्रतिभाशाली युवा पत्रकार हैं)

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