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अचंभित मुजफ्फरपुर :  महंगा पड़ गया जातीय जहर उगलना

औराई में पहले यादव बनाम भूमिहार की लड़ाई होती थी. बीच में तीन दशकों तक यादव से यादव टकराते रहे. इस बार मुजफ्फरपुर लोकसभा क्षेत्र की तर्ज पर मल्लाह से मल्लाह की लड़ाई हुई. औराई में भाजपा उम्मीदवार रमा निषाद की बड़ी जीत में महागठबंधन का भी योगदान रहा.

अक्षय आकाश
12 जनवरी 2026

Muzaffarpur: भाजपा पारू में निवर्तमान विधायक अशोक कुमार सिंह (Ashok Kumar Singh) को हाशिये पर नहीं डाली होती, तो इस जिले में महागठबंधन (Mahagathbandhan) का खाता नहीं खुल पाता. राजद के शंकर प्रसाद यादव (Shankar Prasad Yadav) 28 हजार 827 मतों के अंतर से जीत गये. चुनाव के पहले कहा जा रहा था कि बरुराज (Baruraj) में भाजपा विधायक अरुण कुमार सिंह की स्थिति नाजुक है और साहेबगंज में भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह राजू (Raju Kumar Singh Raju) आसानी से जीत रहे हैं. मतगणना के दौरान तस्वीर दूसरी थी. बरुराज में अरुण कुमार सिंह (Arun Kumar Singh) 29 हजार 052 मतों से जीते, जबकि साहेबगंज (Sahebganj) में राजू कुमार सिंह राजू हारते-हारते बच गये. कई चक्रों में राजद के पृथ्वीनाथ राय आगे रहे और अंततः 13 हजार 522 मतों से राजू कुमार सिंह राजू जीत गये. मीनापुर (Meenapur) के राजद विधायक राजीव कुमार उर्फ मुन्ना यादव (Rajiv Kumar alias Munna Yadav) को जातीय जहर उगलना बहुत महंगा पड़ा. जदयू (JDU) के अजय कुशवाहा (Ajay Kushwaha) ने उन्हें 34 हजार 238 मतों से धूल चटा दी. कांटी और मीनापुर के चुनाव परिणाम को लोकसभा चुनाव के दौरान राजद प्रत्याशी के साथ गद्दारी से भी जोड़कर देखा जा रहा है.

मल्लाह बनाम मल्लाह

औराई में पहले यादव बनाम भूमिहार की लड़ाई होती थी. बीच में तीन दशकों तक यादव से यादव टकराते रहे. इस बार मुजफ्फरपुर लोकसभा क्षेत्र की तर्ज पर मल्लाह से मल्लाह की लड़ाई हुई. औराई में भाजपा उम्मीदवार रमा निषाद (Rama Nishad) की बड़ी जीत में महागठबंधन का भी योगदान रहा. 2020 में भाकपा-माले (CPI-ML) प्रत्याशी आफताब आलम (Aftab Alam) को 42 हजार 613 मत मिले. इस बार महागठबंधन से वीआईपी के भोगेन्द्र सहनी (Bhogendra Sahani) प्रत्याशी बनाये गये. आफताब आलम को उम्मीदवार नहीं बनाये जाने से मुसलमान और माले कार्यकर्त्ता आहत हुए. उदासीन यादवों के वोट तितर-बितर हो गये.

राह रोक दी वीआईपी की

आफताब आलम बगावत कर आजाद समता पार्टी (कांशीराम) के प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरे और 31 हजार 363 मत लेकर वीआईपी प्रत्याशी भोगेन्द्र सहनी की राह रोक दी. भोगेन्द्र सहनी को मिले 46 हजार 691 मतों के मुकाबले रमा निषाद ने 01 लाख 04 हजार 085 मत हासिल कर 57 हजार 202 मतों के अंतर से जीत का रिकार्ड बना दिया. रमा निषाद पूर्व सांसद अजय निषाद (Ajay Nishad) की पत्नी हैं. 2024 के संसदीय चुनाव में मुजफ्फरपुर से उम्मीदवारी के लिए अजय निषाद कांग्रेस (Congress) में चले गये थे. 2025 के विधानसभा चुनाव में रमा निषाद की उम्मीदवारी के लिए भाजपा में लौट आये.

खूब समां बांधा

जदयू के विधान पार्षद दिनेश प्रसाद सिंह (Dinesh Prasad Singh) ने फिर साबित किया कि वह उम्मीदवारी लेना भी जानते हैं और चुनाव जीतने का भी माद्दा रखते हैं. पूर्व विधायक महेश्वर प्रसाद यादव (Maheshwar Prasad Yadav) अपने पुत्र प्रभात किरण (Prabhat Kiran) को जदयू की उम्मीदवारी दिलाने के लिए पूरी ताकत झोंक रखे थे. भाजपा में अशोक सिंह आश्वस्त थे. लोजपा सांसद वीणा देवी (Veena Devi) के पति दिनेश प्रसाद सिंह को पता है कि लोहा और सोना का गलनांक क्या है. उन्होंने केंद्रीय मंत्री ललन सिंह (Lalan Singh) और जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा (Sanjay Jha) से मिलकर कोमल सिंह (Komal Singh) की उम्मीदवारी पक्की कर ली. बागी अशोक सिंह ने जन सुराज के उम्मीदवार के रूप में मैदान में कूद खूब समां बांधा.

असरहीन रहा बाहरी का नारा

भितरघात के आरोप में जदयू से निष्कासित महेश्वर प्रसाद यादव बेटे के साथ फिर से राजद (RJD) में लौट गये. विधान परिषद चुनाव में मुखिया, सरपंच, जिला पार्षद और वार्ड सदस्यों को गोलबंद करने वाले दिनेश प्रसाद सिंह जानते थे कि वोट कैसे मिलता है. ऊपर से एनडीए की सुनामी ने कोमल सिंह को राजद विधायक निरंजन राय (Niranjan Rai) पर 23 हजार 417 मतों की निर्णायक बढ़त दिला दी. दिनेश प्रसाद सिंह की शैली में ही सकरा (सु.) में जदयू के निवर्तमान विधायक अशोक कुमार चौधरी ने भी बेटे आदित्य कुमार (Aditya Kumar) को जदयू का प्रत्याशी बनवाया और मुखिया, पंसस और पैक्स अध्यक्षों को अपने पाले में ले आये. अशोक कुमार चौधरी के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी थी, बाहरी का नारा था. परन्तु, मोदी-नीतीश (Modi-Nitish) की लहर में अंततः आदित्य कुमार 15 हजार 050 मतों के अंतर से जीत गये.

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वह भी जीत गये

बोचहां (सु.) उपचुनाव में जिन लोगों ने राजद विधायक अमर पासवान (Amar Paswan) को रिकार्ड मतों से जिताया था, उनके उनसे मोहभंग हो गये. काम करना तो दूर की बात थी, अमर पासवान जीतने के बाद कभी आभार जताने भी नहीं पहुंचे. दूसरी तरफ हारने के बाद भी पूर्व विधायक बेबी कुमारी (Baby Kumari) विनम्रता से लोगों के बीच बैठती रहीं. बोचहां ने एक बार फिर बेबी कुमारी को 20 हजार 316 मतों के अंतर से जीताकर विधानसभा में भेजा है. बेबी कुमारी भाजपा में थीं. प्रदेश उपाध्यक्ष का पद संभाल रही थीं. एनडीए में बोचहां की सीट उनकी ही उम्मीदवारी की शर्त पर लोजपा (आर) के हिस्से में दी गयी. कुढ़नी में तत्कालीन पंचायती राज मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता के खिलाफ एंटीइनकंबेंसी थी. जगह-जगह उनका विरोध भी हो रहा था. एनडीए की सुनामी आयी तो, जिले में सबसे छोटे अंतर से ही सही, वह भी जीत गये.

(अक्षय आकाश प्रतिभाशाली युवा पत्रकार हैं)

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