पतंगबाजी : रहस्य छिपा है… सेहत का भी

डा. विजय गर्ग
13 जनवरी 2026
New Delhi: पतंग उड़ाना मकर संक्रांति के साथ जुड़ी एक ऐसी परंपरा है जो न केवल एक उत्सव का हिस्सा है, बल्कि शारीरिक और मानसिक (Physical and Mental) स्वास्थ्य (Health) के लिए भी काफी फायदेमंद है. पतंग (Kite) उड़ाने से सूर्य (Sun) की ऊर्जा मिलती है, शरीर में सक्रियता आती है और जीवन को नये दृष्टिकोण से देखने की प्रेरणा मिलती है. कई बार हम संशय में होते हैं कि हमारी पुरानी प्रथाएं और मनोरंजन के साधन वक्त के साथ गुम हो रहे हैं, मगर कुछ ऐसे भी साधन हैं जो मनोरंजन के आकाश में आज भी उड़ते दिखाई देते हैं. ऐसा ही एक पर्व है मकर संक्रांति, जिससे कई किंवदंतियां जुड़ी हैं. हर साल 14 जनवरी को मनाया जाने वाला यह त्योहार सूर्य के उत्तरायण (Uttarayan of the Sun) होने का प्रतीक है. हिंदुओं के लिए सूर्य रोशनी, ताकत और ज्ञान का प्रतीक है. मकर संक्रांति के अर्थ में मकर (Makar) शब्द राशि के नाम से ताल्लुक रखता है, वही संक्रांति का अर्थ है संक्रमण. यानी इस दिन सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है.
शारीरिक और मानसिक लाभ
पतंग उड़ाने की परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है. मकर संक्रांति (Makar Sankranti) के आसपास पतंगे उड़ना शुरू हो जाती हैं. हालांकि, ज्यादातर सर्दी के मौसम में लोग घरों में ऊनी कपड़ों में दुबके रहते हैं. लेकिन, वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार उत्तरायण में सूर्य की गर्मी ठंड के प्रकोप से होने वाली सर्दी, खांसी, फ्लू जैसे रोगों को समाप्त कर देती है. सूर्य की रोगनाशक शक्ति के बारे में अथर्ववेद (Atharvaveda) में कहा गया है कि सूर्य औषधि (Medicine) बनाता है तथा अपनी रश्मियों द्वारा सभी जीवों का स्वास्थ्य उत्तम रखता है. हाल में एक रिसर्च (Reserch) में यह तथ्य सामने आया कि भारत में करीब 80 फीसदी लोगों में विटामिन डी (Vitamin-D) की कमी है. अकेले दिल्ली में 90 से 97 फीसदी स्कूली बच्चों में विटामिन डी की कमी पायी गयी है, जबकि भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां सूर्य की पर्याप्त रोशनी आती है. ऐसे में मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने के बहाने बच्चों और बड़ों को भी पर्याप्त धूप मिल जाती है. पतंग उड़ाते समय हमारा मुंह ऊपर की ओर खुलता है. जैसे ही हम डोर खींचते हैं, तो ऑक्सीजन (Oxygen) तेजी से हमारी सांसों में पहुंचती है. ऑक्सीजन लेवल पर्याप्त होने के साथ हमारे हाथ, कंधे, कमर, आंखें सभी की अच्छी-खासी कसरत हो जाती है. डॉक्टरों (Doctors) का यह भी कहना है कि पतंग उड़ाने से शरीर स्वस्थ रहता है, मस्तिष्क भी तनाव मुक्त रहता है. त्वरित निर्णय लेने की क्षमता में इजाफा होता है. धूप से सर्दियों में होने वाली त्वचा संबंधी समस्याओं से भी मुक्ति मिल जाती है.
पर्व एक तरीके अनेक
समय के साथ पतंग उड़ाना कई देशों में उत्साह का प्रतीक बन गया है. गुजरात (Gujrat) का पतंगोत्सव (Kite Festival) बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है. 07 जनवरी से 15 जनवरी तक ‘इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल’ का आयोजन होता है, जहां जापान (Japan), मलेशिया (Maleshiya), चीन (China) और सिंगापुर (Singapur) से कई विदेशी इस पतंगबाजी का लुत्फ उठाने आते हैं. तेलंगाना (Telangana) का भी पतंग महोत्सव मशहूर है, जहां कई देशों के लोग हिस्सा लेते हैं. इस महोत्सव की खास बात यह भी है कि इसमें ‘स्वीट फेस्टिवल’ (Sweet Festival) भी आयोजित होता है, जिसमें तकरीबन एक हजार तरह की मिठाइयों का लुत्फ उठाया जा सकता है. जयपुर (Jaipur) के इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल में भी कई विदेशी पतंगबाजी का हुनर दिखाने आते हैं. पतंग उड़ाने के दीवाने भारत में ही नहीं, विदेशों में भी कम नहीं हैं. चीन के वेई फांग शहर में अप्रैल में ‘काइट फेस्टिवल’ बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है. लोग ऊंची-ऊंची पतंगों को देखने के लिए वहां आते हैं, क्योंकि वहां एक मान्यता है कि ऊंची उड़ती पतंगों को देखने से उनकी आंखें हमेशा अच्छी रहती हैं. अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, ग्वाटेमाला, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका और इटली आदि देशों में भी ‘पतंग उत्सव’ मनाया जाता है.
यह भी पढ़ें :
मकर संक्रांति 2026 : चुकना नहीं है… वर्षों बाद बन रहा महासंयोग
जीवन जीने की कला
एक डोर के सहारे उड़ने वाला यह छोटा-सा मनोरंजन (Entertainment) का साधन हमें जीवन जीने की प्रेरणा भी देता है. एक डोर पर भरोसा करके आसमान छूने की प्रेरणा पतंग से सीखी जा सकती है. पतंगबाज पतंग के नीचे आ जाने पर हवा का रुख पहचानकर फिर उड़ाता है. जैसे ही सफलता मिलती है, वह बेखौफ उड़ने लगता है. यानी एक-दो बार नाकामियों के मिलने पर भी पतंगबाज के उत्साह में कोई कमी नहीं आती. पतंग अपने सही बंधे जोतों के कारण हवा में संतुलन बना पाती है, ठीक वैसे ही मनुष्यों को अपने रिश्तों में संतुलन बनाने की प्रेरणा देती है. आसमान में उड़ रही दूसरी पतंगों से चुनौतियों का सामना करते हुए पतंग अपने अस्तित्व के लिए दिमागी लड़ाई लड़ती है. वह दूसरी पतंग को काटकर फिर से ऊंचा उड़ती है, और ऊंचा उड़ने के बाद ढेर सारी खुशियां पतंगबाज को देती है. यानी यह छोटी सी पतंग मनुष्यों को कितना कुछ सिखाती है.


