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एएमयू किशनगंज: खोखली बुनियाद पर सपनों की मीनार!

किशनगंज में एएमयू की विस्तारित शाखा स्थापित करने के निर्णय के 15-16 साल और शिलान्यास के लगभग 12 साल हो गये. स्थिति ‘नौ दिन चले अढ़ाई कोस’ से कुछ अलग नहीं है. आम धारणा है कि क्षेत्रीय मुस्लिम नेताओं की आपसी खींचतान से प्रारंभिक काल में ही इस पर अनिश्चितता की जो धुंध छायी थी, इतने वर्षों के बाद भी छंट नहीं पायी है.

राजकिशोर सिंह
20 जनवरी 2026

Kishanganj: प्रथम ग्रासे मक्षिका पातः यानी कार्य शुरू होते ही व्यवधान खड़ा हो जाना. काफी चर्चित मुहावरा है यह. लोग अक्सर इसे प्रयोग में लाते हैं. किशनगंज में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) की विस्तारित शाखा की स्थापना के मामले में भी यह मुहावरा सटीक बैठता है. इस रूप में कि इसके लिए पहल हुई नहीं कि अड़ंगा डालने का सिलसिला चल पड़ा. अंततः ‘पानी में मछली, नौ कुटिया बखरा’ की सोच वाले नेताओं की श्रेय लेने की होड़ ने शैक्षणिक एवं आर्थिक विकास से संबंधित सीमांचल (Seemanchal) के इस सपने को साकार नहीं होने दिया. विश्वविद्यालय प्रशासन की अकर्मण्यता तो बड़ी वजह है ही.

नौ दिन चले अढ़ाई कोस!

किशनगंज में एएमयू की विस्तारित शाखा स्थापित करने के निर्णय के 15-16 साल और शिलान्यास के लगभग 12 साल हो गये. स्थिति ‘नौ दिन चले अढ़ाई कोस’ से कुछ अलग नहीं है. आम धारणा है कि क्षेत्रीय मुस्लिम नेताओं (Muslim Leaders) की आपसी खींचतान से प्रारंभिक काल में ही इस पर अनिश्चितता की जो धुंध छायी थी, इतने वर्षों के बाद भी छंट नहीं पायी है. ‘किशनगंज एजुकेशन मूवमेंट’ भी इसकी तकदीर नहीं बदल पायी. इस बीच कुछ हुआ है, तो सिर्फ यह कि केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री (Union Minister for Human Resource Development) धर्मेन्द्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) के बयान से इसके अधर में ही अटके रहने की आशंका गहरा गयी है. हालांकि, इधर के दिनों में हल्की-फुल्की उम्मीदें जगती दिख रही हैं.

कपिल सिब्बल ने कहा था

वैसे, इसके अधर में अटके रहने की आशंका मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) ने उसी वक्त जता दी थी जब इसकी स्थापना की पहल हो रही थी. स्पष्ट शब्दों में उन्होंने कहा था कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (Aligarh Muslim University) से संबद्ध कानून में संशोधन के बगैर किशनगंज में उसकी विस्तारित शाखा खोलना संभव नहीं है. कानून में संशोधन संसद ही कर सकती है. संशोधन के लिए पहल कांग्रेस (Congress) अपने शासन काल में कर सकती थी. जब उसने ऐसा नहीं किया, तो फिर भाजपा (BJP) की सरकार से उम्मीद कैसे और क्यों की जा सकती है? कपिल सिब्बल देश के बड़े कानूनविद भी हैं. उनके उक्त बयान को उस दृष्टि से भी समझा जा सकता है.

इसलिए गया अटक

केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने इधर-उधर नहीं, लोकसभा (Loksabha) में बताया कि किशनगंज में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की विस्तारित शाखा के लिए जरूरी प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी किये बिना ही स्थापना की पहल शुरू कर दी गयी थी. मतलब कि खोखली बुनियाद पर सपनों की मीनार खड़ी कर दी गयी. धर्मेन्द्र प्रधान का बयान लोकसभा में आया इसलिए इसकी विश्वसनीयता और प्रामाणिकता पर संदेह की गुंजाइश नहीं बनती. वैसे भी उनके इस कथन की पुष्टि इससे भी होती है कि एक ही साथ हुई घोषणा के तहत पश्चिम बंगाल (West Bangal) के मुर्शिदाबाद (Mursidabad) और केरल (Kerla) के मल्लपुरम (Mallpuram) में तमाम सुविधाओं और संरचनाओं के साथ अलीगढ़ विश्वविद्यालय की विस्तारित शाखा विधिवत काम कर रही है. हालांकि, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का दावा है कि राष्ट्रपति से अनुमोदन मिलने के बाद ही किशनगंज विस्तारित शाखा को मंजूरी मिली थी.

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नहीं अपनायी गयी प्रक्रिया

किशनगंज में यह बाधित है तो निश्चय ही कोई न कोई तकनीकी कारण है. वह कारण संभवतः यह है कि सरकार के कागजात में इसकी कहीं कोई जड़ ही नहीं है. धर्मेन्द्र प्रधान ने सदन में किशनगंज के ही कांग्रेस सांसद डा. जावेद आजाद (Dr. Javed Azad) के प्रश्न के उत्तर में बताया कि इससे संबंधित कोई प्रस्ताव या संचिका केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय में उपलब्ध नहीं है. इससे स्पष्ट है कि इसके लिए बिहित प्रक्रिया नहीं अपनायी गयी. इसलिए कि कोई वैधानिक आधार नहीं बन रहा था. सब हवा हवाई था और उसी ‘हवाई निर्णय’ के आधार पर मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली केन्द्र की कांग्रेस सरकार ने इसके लिए 135.4 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत कर दी.10 करोड़ रुपये आवंटित भी हो गये.

जोर संसद का था

बिहार के मुख्यमंत्री (Chief Minister) नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने सीमांचल में सियासी पांव जमाने की ख्वाहिश में बगैर तकनीकी पक्ष जाने-समझे 31 दिसम्बर 2011 को किशनगंज के चकला में 224 एकड़ जमीन उपलब्ध करा दी. दिलचस्प बात यह रही कि अपनी ही सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्री के विधि सम्मत मंतव्य को ताक पर रख मनमोहन सिंह की सरकार ने तब की कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी (Soniya Gandhi) से इसका शिलान्यास करा दिया. समारोह में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी मौजूद थे. शिलान्यास के लिए जोर मरहूम क्षेत्रीय कांग्रेस सांसद मौलाना असरारुल हक कासमी (Maulana Asrarul Haq Qasmi) ने लगाया था. मकसद चार-पांच माह बाद होने वाले संसदीय चुनाव में लाभ उठाना था.

(राजकिशोर सिंह पटना के वरिष्ठ पत्रकार हैं.)

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