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देवेश बनाम विमल : गिर गयी गाज… रखा नहीं तनिक भी ख्याल!

विमल शुक्ला के मुताबिक लोक अभियोजक पद से उन्हें देवेश चन्द्र ठाकुर ने मुक्त करा दिया. इसके लिए उन्होंने उन्हें हृदय से बधाई दी और कहा कि वही उन्हें इस पद पर लाये थे और वही इससे हटवा भी दिये. इसके लिए धन्यवाद!

विजयशंकर पांडेय
22 जनवरी 2026

Sitamarhi: विमल शुक्ला सीतामढ़ी के लोक अभियोजक (Public Prosecutor) पद से मुक्त कर दिये गये. इसको लेकर जिला जदयू (JDU) की राजनीति में तूफान खड़ा हो गया है. आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला चल रहा है. विमल शुक्ला (Vimal Shukla) कांग्रेसी पृष्ठभूमि से हैं, पर वर्षों से जदयू से जुड़े हुए हैं. कांग्रेस (Congress) में उन्हें सीतामढ़ी जिला अध्यक्ष का पद मिला हुआ था. जदयू में कभी कोई महत्वपूर्ण पद नहीं मिला. एकाध बार जदयू प्रदेश कार्यसमिति (JDU State Working Committee) के सदस्य रूपी ‘प्रसाद’ अवश्य मिला. विमल शुक्ला की मुख्यमंत्री (Chief Minister) नीतीश कुमार (Nitish Kumar) से नजदीकी रही है, इसलिए इतने भर से भी वह संतुष्ट रहा करते थे. लेकिन, अब क्षुब्ध हैं. नीतीश कुमार से नहीं, कथित रूप से सीतामढ़ी के जदयू सांसद देवेश चन्द्र ठाकुर के राजनीतिक आचरण व व्यवहार से.

महत्वपूर्ण माना

विमल शुक्ला को दुख ज्यादा संभवतः इससे है कि 2024 के संसदीय चुनाव में सीतामढ़ी के एनडीए के लगभग सभी नेता टांग खींच रहे थे, तब उन्होंने ही पूरी ताकत से साथ दे उनका पांव जमा दिया. संसदीय चुनाव में देवेश चन्द्र ठाकुर (Devesh Chandra Thakur) की बड़ी जीत हुई. जीत के और भी कई कारण रहे. पर, राजनीति के विश्लेषकों ने विमल शुक्ला के योगदान को महत्वपूर्ण माना. सवाल यहां यह कि इतनी निकटता, घनिष्टता और आत्मीयता रहने के बाद भी विमल शुक्ला सांसद देवेश चन्द्र ठाकुर से दुखी क्यों हो गये, उनमें कटुता कैसे उत्पन्न हो गयी? यह जानने की जिज्ञासा हर किसी की होगी.

उफना उठी चुनावी चाहत

विमल शुक्ला सीतामढ़ी के वरीय अधिवक्ता हैं. विधानसभा का चुनाव (Assembly Election) लड़ने की चाहत उनकी बहुत पुरानी है. कारण जो रहा हो, पूर्व में कभी कोई परिणामदायक संभावना नहीं बनी. 2024 के संसदीय चुनाव में एनडीए (NDA) के जदयू प्रत्याशी देवेश चन्द्र ठाकुर की जीत के लिए उन्होंने खूब परिश्रम किया, पसीना बहाया. जदयू को जिस ढंग की जीत हासिल हुई, उससे विधानसभा का चुनाव लड़ने की उनकी चाहत उफना उठी. सुरसंड (Sursand) विधानसभा क्षेत्र से वह उम्मीदवारी चाहते थे. 2020 में इस क्षेत्र से दिलीप राय (Dilip Rai) जदयू प्रत्याशी के तौर पर निर्वाचित हुए थे. 2025 में भी दावा उन्हीं का बनता था.

नहीं मिली उम्मीदवारी

लेकिन, कतिपय कारणों से दिलीप राय की उम्मीदवारी के दुहराव पर तलवार लटक गयी थी. इससे विमल शुक्ला के मंसूबों को मजबूती मिल गयी थी. उम्मीदवारी की संभावना बड़ा आकार लिये हुए थी. लेकिन, अंतिम समय में सब गड़बड़ हो गया. दिलीप राय को तो हाशिये पर डाल दिया गया, पर जदयू की उम्मीदवारी विमल शुक्ला को नहीं मिली. भाग्य प्रो. नागेन्द्र राउत (Pro. Nagendra Raut) का चमक गया. उम्मीदवारी तो मिली ही, विधायक भी बन गये. विमल शुक्ला ही नहीं, सीतामढ़ी के तमाम लोग यह जानते और मानते हैं कि जिताने में तो नहीं, प्रो. नागेन्द्र राउत को उम्मीदवारी दिलवाने में सांसद देवेश चन्द्र ठाकुर की मुख्य भूमिका रही.

समझ नहीं पाये तब

वैसे, विमल शुक्ला की उम्मीदवारी की संभावना तभी समाप्त हो गयी थी, जब उन्हें सीतामढ़ी का लोक अभियोजक बना दिया गया था. पहले अरुण कुमार सिंह (Arun Kumar Singh) लोक अभियोजक हुआ करते थे. कहते हैं कि वह सांसद देवेश चन्द्र ठाकुर को ज्यादा सुहा नहीं रहे थे. 24 फरवरी 2023 को अरुण कुमार सिंह का निधन हो गया. तबसे लेकर 10 जून 2025 तक लोक अभियोजक का पद प्रभार में रहा. एक-एक कर पांच अधिवक्ताओं ने यह दायित्व संभाला. 10 जून 2025 को विमल शुक्ला लोक अभियोजक के पद पर आसीन हुए. इसके साथ ही विधानसभा चुनाव लड़ने की उनकी राह अवरुद्ध हो गयी. यूं कहें कि अवरूद्ध कर दी गयी. जदयू के ही लोग कहते हैं कि ऐसा सांसद देवेश चन्द्र ठाकुर की पहल पर हुई. विमल शुक्ला इस राजनीतिक चाल को उस वक्त समझ नहीं पाये. चुनाव करीब आया तब सुरसंड से प्रो. नागेन्द्र राउत को जदयू की उम्मीदवारी मिल गयी.

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धन्यवाद दिया

राजनीतिक चाल समझ में आयी तब विमल शुक्ला अपने स्वभाव के अनुरूप देवेश चन्द्र ठाकुर के खिलाफ मुखर हो उठे. कहते हैं कि एक कार्यक्रम में उन्होंने सार्वजनिक रूप से लोक अभियोजक का पद छोड़ देने की घोषणा कर दी. साथ में देवेश चन्द्र ठाकुर के बारे में भी ऐसी-वैसी कुछ बातें कही. फिर देवेश चन्द्र ठाकुर ने भी सार्वजनिक सभा में विमल शुक्ला के बारे में कुछ वैसी ही टिप्पणी की. विमल शुक्ला ने सोशल मीडिया (Social Media) में वीडियो जारी कर उनकी टिप्पणी की चर्चा की और जवाब दिया. तकरीबन तीन महीने तक तकरार चलती रही. अंततः 21 जनवरी 2026 को विमल शुक्ला को अचानक सीतामढ़ी के लोक अभियोजक पद से मुक्त कर दिया गया. आरोप कोरोना काल में डुमरा थाने में दर्ज एक मुकदमे के तथ्य को छिपाने का लगाया गया. विमल शुक्ला के मुताबिक लोक अभियोजक पद से उन्हें देवेश चन्द्र ठाकुर ने मुक्त करा दिया. इसके लिए उन्होंने उन्हें हृदय से बधाई दी और कहा कि वही उन्हें इस पद पर लाये थे और वही इससे हटवा भी दिये. इसके लिए धन्यवाद!

(विजयशंकर पांडेय वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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