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छपरा जेल कांड : लूट लेते तब… बीएमपी के शस्त्रागार!

तथ्य उभरकर यह भी सामने आया कि कैदी सुरंग खोदकर बिहार सैन्य पुलिस (बीएमपी) के शस्त्रागार पर भी कब्जा जमाने की कोशिश में थे. ‘जेल मुक्ति अभियान’ समय पर शुरू नहीं होता तो शस्त्रागार पर कब्जे की योजना सफल हो जाती. इसलिए कि सुरंग खुदाई का काम अंतिम चरण तक पहुंच चुका था.

विष्णुकांत मिश्र
24 फरवरी 2026

Patna: हालात पर काबू पाने का जिला प्रशासन का प्रयास नाकाम रहा तब अतिरिक्त पुलिस बल मंगायी गयी और चौथे दिन ‘जेल मुक्ति अभियान’ शुरू हुआ. इस बीच कैदियों ने जो चाहा, जेल में वही सब हुआ. हालांकि, उपद्रव के बीच महाराजगंज (Maharajganj) के तत्कालीन सांसद प्रभुनाथ सिंह (Prabhunath Singh) और जिलाधिकारी (DM) पंकज कुमार (Pankaj Kumar) ने कैदियों से बातचीत की. लेकिन, उसका कोई सार्थक परिणाम नहीं निकला. तथ्य उभरकर यह भी सामने आया कि कैदी सुरंग खोदकर बिहार सैन्य पुलिस (बीएमपी) के शस्त्रागार पर भी कब्जा जमाने की कोशिश में थे. ‘जेल मुक्ति अभियान’ समय पर शुरू नहीं होता तो शस्त्रागार पर कब्जे की योजना सफल हो जाती. इसलिए कि सुरंग खुदाई का काम अंतिम चरण तक पहुंच चुका था.

दिखायी थी खूब कलाबाजी

जेल पर कब्जे के चौथे दिन यानी 30 मार्च 2002 को मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur), आरा (Ara) और सीवान (Siwan) से सशस्त्र पुलिस के अतिरिक्त जवान आये तब उनके सहयोग से कमांडो कार्रवाई (Commando Action) शुरू हुई. कहते हैं कि कमांडो कार्रवाई में विलंब इसलिए हुआ कि 29 मार्च 2002 को होली थी. छतों और पेड़ों पर चढ़े कैदियों ने जवाबी कार्रवाई में ईंट-पत्थरों से हमले के साथ गोलीबारी भी की और बम भी फोड़े. अश्रुगैस का उपयोग कर हालात को काबू में करने की पुलिस की कोशिश के दौरान विद्रोही कैदियों ने खूब कलाबाजी दिखायी. पुलिस की ओर से छोड़े गये गोले को लपककर वापस फेंक देने से पुलिसकर्मी बेबस हो गये. चार घंटे तक युद्ध जैसे हालात बने रहे.

तीनों को मिला वीरता पदक

इसी दौरान फायर ब्रिगेड (Fire Brigade) की सीढ़ी के सहारे दीवार फांद जेल की छत पर चढ़ गये पुलिस अधीक्षक (SP) कुन्दन कृष्णन (Kundan Krishnan) और उनके अंगरक्षक जितेन्द्र सिंह घायल हो गये. दीवार फांदने वालों में वहां के तत्कालीन थानाध्यक्ष अर्जुन लाल भी थे. ‘वीरता पदक’ तीनों को मिला है. गहन जानकारी रखने वालों के मुताबिक उपद्रवी कैदियों ने जेल गेट पर गैस सिलेंडर जमा कर रखा था. इरादा संभवतः सिलेंडर विस्फोट से जेल गेट और दीवार को उड़ा सभी के उड़न छू हो जाने का था. इसे नकाम करने के प्रयास में पुलिस अधीक्षक कुन्दन कृष्णन के जख्मी हो जाने के बाद पुलिस ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी.

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चली थीं 234 चक्र गोलियां

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पुलिस ने 234 राउंड गोलियां चलायी. 51 अश्रुगैस के गोले और हथगोले छोड़े. पुलिस की गोली खाकर संजय राय, वकील राय, अशोक उपाध्याय और शशिभूषण सिंह की मौके पर मौत हो गयी. जबकि अक्षयवट सिंह एवं रंजीत सिंह की मौत अस्पताल में हुई. संजय साह, जटाशंकर सिह, ऋषिमुनि सिंह, गुरु प्रसाद एवं नवीन सिंह गंभीर रूप से घायल हो गये. 25 अन्य कैदी मामूली रूप से जख्मी हुए. कैदियों के हमले में पुलिस अधीक्षक समेत 28 पुलिसकर्मी जख्मी हुए. इतने के बाद मुख्य द्वार का ताला काटकर जेल में पुलिस-प्रशासन का प्रवेश संभव हुआ. उपद्रवी कैदियों के कब्जे से जेल मुक्त हो गया.

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