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दरिन्दे दंपत्ति को दंड: नरमी समाज के लिए खतरनाक

तापमान लाइव ब्यूरो
26 फरवरी 2026

Lucknow : उत्तर प्रदेश के बांदा (Banda) की विशेष पॉक्सो अदालत (Poxo Court) ने एक अधर्मी-कुकर्मी दंपत्ति को मौत की सजा दी है. अदालत का फैसला 20 फरवरी 2026 को आया. दरिन्दे दंपत्ति ने 33 नाबालिग लड़कों का यौन शोषण (Sexual Exploitation) और उनके वीडियो बनाकर डार्क वेब (Dark Web) पर बेचने का घिनौना जुर्म किया था, जो बच्चों के खिलाफ क्रूरतम अपराधों में एक है. यह अपराध 50 वर्षीय राम भवन (Ram Bahwan) एवं उसकी 47 वर्षीया पत्नी दुर्गावती (Durgawati) ने किया था. अदालत ने इसे ‘दुर्लभतम अपराध’ मान दोनों को फांसी की सजा सुनाई. राम भवन उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग में कनीय अभियंता था. अदालत ने कहा कि इन अपराधों में असाधारण क्रूरता और व्यवस्थित तरीका अपनाया गया था. जिससे बच्चों की जिंदगी बर्बाद हो गयी, समाज की नींव हिल गयी.

किराये के मकान में कुकर्म

न्यायाधीश (Judge) प्रदीप कुमार मिश्र ने अपने फैसले में कहा कि ऐसे अपराधों में कोई सुधार की गुंजाइश नहीं है. नरमी बरतना समाज के लिए खतरनाक संदेश होगा. यह अपराध 2010 से 2020 तक यानी करीब 10 वर्षों तक हुआ. बांदा जिले के नरैनी कस्बे के रहने वाले राम भवन और दुर्गावती ने चित्रकूट में किराये का मकान ले रखा था. कुकर्म इन्हीं दोनों जगहों पर हुआ. इलाके के गरीब एवं कमजोर परिवारों के छोटे-छोटे लड़कों को निशाना बनाया गया. दरिंदगी के शिकार कुछ बच्चे सिर्फ तीन साल के थे. ज्यादातर पांच से सोलह साल के बीच के थे. बच्चों को ऑनलाइन वीडियो गेम खेलने, पैसे, खिलौने या मिठाई देकर वह मायावी महापापी लुभाता था. फिर अपने घर ले जाकर यौन शोषण करता था. पत्नी दुर्गावती भी उसमें शामिल रहती थी.

दो लाख वीडियो बनाये गये

हर बार शोषण का वीडियो (Vedio) और फोटो (Photo) बना डार्क वेब पर बेचता था. सीबीआई जांच में पता चला कि लगभग दो लाख ऐसे वीडियो और फोटो बनाये गये, जो 47 देशों में बेचे गये. अदालत ने कहा कि अपराध की संख्या, लंबे समय तक चलना, बच्चों पर शारीरिक और मानसिक चोट, ब्लैकमेल करना और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सामग्री बेचना, ये सब इसे दुर्लभतम अपराध बनाते हैं. बच्चों को इतनी बुरी चोट लगी कि कई के प्राइवेट पार्ट्स में गंभीर चोटें आयी. कुछ अस्पताल में भर्ती रहे, कुछ की आंखें तिरछी हो गयीं. कई बच्चे आज भी गंभीर मानसिक आघात से जूझ रहे हैं.

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मुआवजा और पुनर्वास

अदालत (Court) ने पहचाने गये ऐसे 33 बच्चों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने का आदेश राज्य सरकार को दिया. यह भी कहा कि बच्चों के पुनर्वास, मनोवैज्ञानिक इलाज और सुरक्षित भविष्य के लिए ठोस कदम उठाये जायें. विशेष पॉक्सो अदालत (Pasco Court) के इस फैसले को बच्चों की सुरक्षा की दृष्टि से बड़ा कदम माना जा रहा है. समझा जा रहा है कि यह समाज में ऐसे अपराधों पर सख्ती की मिसाल बनेगा.

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