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किछौछा शरीफ दरगाह : बजा दी हाजिरी… लग गयी दुआ!

एस एन श्याम
17 जून 2026

Lucknow : शौकत अली बिहार की राजधानी पटना (Patna) के दरियापुर (Dariyapur) के रहने वाले हैं. फकीर के सुझाव पर अमल कर उन्होंने पत्नी, बेटा और बेटी को लेकर किछौछा शरीफ (Kichhaucha Sharif) पहुंच हजरत मखदूम अशरफ जहांगीर सिमनानी (Hazrat Makhdum Ashraf Jahangir Simnani) के दरबार में हाजिरी बजा दी. वहां सजदा करते ही बीमार परिजनों के हाव-भाव में परिवर्तन देख वह चकित रह गये. बेटा साजिद अली, जो चल-फिर नहीं पा रहा था वह उठकर खड़ा हो गया. शारीरिक हालात बदलते देख शौकत अली ने इस दरगाह (Dargah) पर तीन बार जाकर सबका इलाज कराया. पहली बार तीन दिन, दूसरी बार एक माह और तीसरी बार 49 दिन किछौछा शरीफ में डेरा जमा वह दुआ बटोर आये.

सभी आते हैं मन्नतें लेकर

साजिद अली के साथ-साथ सबीना और शौकत अली की पत्नी, सभी स्वस्थ हो गये. सबीना की शादी हो गयी है. साजिद अली ने एम ए की पढ़ाई के बाद कम्प्यूटर सेंटर खोल रखा है. परिवार की आर्थिक स्थिति भी पूर्व की अपेक्षा सुदृढ़ हो गयी है. शौकत अली यह बताते भावुक हो उठते हैं कि तमाम परिवर्तन किछौछा शरीफ दरगाह की दुआओं की देन है. इसे आध्यात्मिक चिकित्सा (Spiritual Healing) या रूहानी इलाज (Ruhani Ilaaj) माना जाता है जो दवाओं के बेअसर होने के बाद भी कारगर होता है. यही वह आस्था (Faith) है कि इस दरगाह पर बगैर किसी भेदभाव के मुस्लिम-हिन्दू (Muslim-Hindu) सभी संप्रदाय के लोग मन्नतें लेकर आते हैं.

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पूरी होती हैं मुरीदें

धारणा यह भी है कि वहां जो भी मांगी जाती है वह सभी मुरादें पूरी होती हैं. इतना ही नहीं, शारीरिक और मानसिक (Physical and Mental) रूप से बीमार लोग भी बड़ी संख्या में इलाज के लिए आते हैं. स्वस्थ मन से लौटते हैं. ऐसी मान्यता है कि यहां रूहों की अदालत लगती है और मजार (Majaar) के प्रति श्रद्धा रखने वाले लोग उसके फैसले को मानते हैं. खास बात यह कि इनमें ज्यादा हिन्दू जायरीन ही होते हैं.  (…जारी)

(यह आस्था और विश्वास की बात है. मानना और न मानना आप पर निर्भर है.)

(एस. एन. श्याम बिहार के वरिष्ठ पत्रकार हैं)
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