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किछौछा शरीफ दरगाह : सर्वधर्मीय आस्था का मरकज

एस एन श्याम
16 जून 2026

Lucknow: सामाजिक कार्यकर्त्ता शौकत अली का बेटा साजिद अली गंभीर रूप से बीमार था. पटना मेडिकल कालेज अस्पताल (PMCH) में मौत से जूझ रहा था. शौकत अली उसकी सलामती के लिए परेशान हाल थे कि इसी बीच उनकी बेटी सबीना भी अचानक अजीबोगरीब हरकतें करने लग गयी. देखते-देखते बेहोश हो जाना, घर-परिवार के सदस्यों को भी नहीं पहचानना तथा आंखें लाल कर घर के सामान को बेवजह इधर-उधर करते रहना उसकी आदत में शुमार हो गयी. बेटा-बेटी की इस दशा से शौकत अली चिंता में डूबे थे ही कि उनकी पत्नी भी बेटी सबीना की तरह असामान्य स्थिति में आ गयीं. यानी वह भी अजब-गजब हरकतें करने लगीं.

टूट गये इलाज कराते-कराते

कमजोर आर्थिक स्थिति में किसी तरह परिवार चला रहे शौकत अली पर दुखों का बोझ आ पड़ा. एक साथ तीन बीमार परिवारजनों के इलाज पर देखते-देखते तकरीबन 10 लाख रुपये खर्च हो गये, लेकिन हालात में कोई सुधार नहीं आया. सरकारी स्वास्थ्य केन्द्र (Government Health Centre) से लेकर निजी अस्पताल तक में इलाज कराते-कराते वह पूरी तरह टूट गये. इलाज के नाम पर पुत्र साजिद अली की रीढ़ की हड्डी से पानी निकाला गया. कोई फर्क नहीं आया, बल्कि मर्ज और बढ़ ही गया. शौकत अली को समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें? कहां जायें? इसी उधेड़बुन में दुख भरे वक्त गुजार रहे थे कि एक दिन दरवाजे पर अचानक एक फकीर (Fakir) आ गया.

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फकीर ने जगा दी उम्मीद

शौकत अली ने उसकी झोली में चंद सिक्के डाल अपनी व्यथा सुनायी. उनकी पीड़ा को सुन-समझ फकीर मुस्कुरा उठा. कहा-‘बेटा, दुखी क्यों होता है? तेरे परिवार पर कोई शैतानी साया सवार हो गया है. घबराओ नहीं, सब ठीक हो जायेगा. बस एक बार किछौछा शरीफ (Kichhaucha Sharif) में प्रसिद्ध सूफी संत सैयद मखदूम अशरफ जहांगीर सिमनानी रहमतुल्लाह अलैह (Saiyad Makhdoom Ashraf Jahangir Simnani Rahmatullah Alaih) के मजार पर हाजिरी लगा दो.’ फकीर की बातों से अच्छे दिन आने की जगी उम्मीद से शौकत अली का रोम-रोम पुलकित हो उठा, चेहरे पर अजीब किस्म की चमक छा गयी.  (…जारी)

(यह आस्था और विश्वास की बात है. मानना और न मानना आप पर निर्भर है.)

(एस. एन. श्याम बिहार के वरिष्ठ पत्रकार हैं)
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