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मौन हैं नीतीश… इसलिए नहीं हो रही जदयू में वापसी

‘जनसुराजी’ पूर्व केन्द्रीय मंत्री आरसीपी सिंह की जदयू से पुनर्जुड़ाव की तड़प पर आधारित आलेख की यह तीसरी और अंतिम कड़ी है. इसमें नीतीश कुमार के मौन रहने के कारणों का विश्लेषण किया गया है.

  • नीतीश कुमार को अभिभावक बताया

  • फिलहाल जनसुराज से जुड़े हैं आरसीपी सिंह

  • काबिलियत पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया

  • जी-जान से लगा है पटेल सेवा संघ

राजकिशोर सिंह
22 जून 2026

Patna: राजनीति में आरसीपी सिंह का महत्व बना रहे इसके लिए फिलहाल जदयू (JDU) ही एकमात्र विकल्प है. 11 जनवरी 2026 को ही पटना में इसका उन्हें ज्ञान हो गया था. पटेल सेवा संघ (Patel Seva Sangh) की ओर से आयोजित दही-चूड़ा भोज (Dahi-Chuṛaa Bhoj) में उन्होंने इस बावत जो कुछ कहा उससे इसकी पुष्टि भी हो गयी. उस भोज में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) और आरसीपी सिंह (RCP Singh) दोनों शामिल हुए. लेकिन, मौजूदगी का समय अलग-अलग रहा. इस कारण आमने-सामने नहीं हुए. भोज के दरमियान आरसीपी सिंह ने जो बयान दिया. उसमें जदयू से जुड़ने की व्याकुलता दिखी. मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा- ‘वह और नीतीश कुमार अलग कहां हैं, दोनों एक ही हैं. उनका पचीस वर्षों का साथ है. नीतीश कुमार उनके अभिभावक हैं.’ हालांकि, इस बातचीत में उन्होंने न तो जदयू से जुड़ने की बात कही और न ऐसी किसी संभावना से इनकार किया. लेकिन, इतना जरूर कहा कि बहुत नीला-पीला हो चुके हैं. अब कुछ अच्छा ही होगा.

अनुनय-विनय भरा भाव

विश्लेषकों के मुताबिक नीला-पीला होने से उनका तात्पर्य संभवतः जन सुराज पार्टी (Jan Suraj Party) से जुड़ाव से था. वैसे, कल क्या होगा यह वक्त बतायेगा. तकनीकी तौर पर आरसीपी सिंह फिलहाल जनसुराज पार्टी से ही जुड़े हैं. इसमें कोई दो मत नहीं कि आरसीपी सिंह जदयू से जुड़ने के लिए आकुल-व्याकुल हैं. परन्तु, सवाल यहां यह है कि जदयू में उनकी वापसी आसानी से हो जायेगी क्या? शायद नहीं. ऐसा क्यों, इसे इस रूप में समझिये. कभी नीतीश कुमार को प्रशासनिक दृष्टि से ‘निकम्मा’ बताने वाले आरसीपी सिंह का पटेल सेवा संघ द्वारा आयोजित दही-चूड़ा भोज के दिन के बयान का भाव अनुनय- विनय भरा आत्मसमर्पण सरीखा था. अकड़ एकदम से गायब थी.

जदयू में करेंगे क्या?

12 दिन बाद पटेल छात्रावास (Patel Hostel) में ही सरस्वती पूजा के दिन दिये बयान के वक्त छायी कटाक्ष भरी मुस्कान से इत्मीनान टपकती नजर आयी. जिस अंदाज में उन्होंने कहा कि जदयू उनका घर है और नीतीश कुमार उनके अभिभावक हैं, उसमें कटाक्ष केन्द्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह (Rajiv Ranjan Singh, alias Lalan Singh) समेत पार्टी के उन तमाम नेताओं पर थी, जो ‘जदयू के अंगने में आरसीपी सिंह का क्या काम है….’ जैसा राग अलाप रहे हैं. ललन सिंह ने आरसीपी सिंह की जदयू में वापसी से संबंधित सवाल पर साफ शब्दों में कहा कि जदयू में उनकी जरूरत क्या है, यहां आकर वह करेंगे क्या? 2020 के विधानसभा चुनाव के परिणाम का जिक्र कर आरसीपी सिंह की काबिलियत पर ही उन्होंने प्रश्न चिह्न लगा दिया.

वापसी संभव नहीं

ललन सिंह के ऐसा कहने के बाद नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार (Shravan Kumar) और फिर नालंदा (Nalanda) के जदयू सांसद कौशलेन्द्र कुमार (Kausalendra Kumar) ने भी आरसीपी सिंह के संदर्भ में ऐसी ही कुछ टिप्पणी की. इन सबके कहने का तात्पर्य यह कि जदयू को न आरसीपी सिंह की जरूरत है और न यहां उनकी कोई उपयोगिता है. गौर करने वाली बात यह कि श्रवण कुमार और कौशलेन्द्र कुमार, दोनों नालंदा जिले के उसी कुर्मी समाज (Kurmi Community) से हैं जिससे नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह आते हैं. श्रवण कुमार और कौशलेन्द्र कुमार के बयानों को तवज्जो नहीं भी दें, तो आज की तारीख में जदयू में बड़ी हैसियत रखने वाले ललन सिंह का बयान तो काफी महत्व रखता ही है. उनके बयान से स्पष्ट संकेत मिलता है कि आरसीपी सिंह की जदयू में वापसी फिलहाल संभव नहीं है.

नहीं हुई मुलाकात

इसके बाद भी उन्हें जदयू से जोड़ने के लिए पटेल सेवा संघ जी-जान से लगा हुआ है तो उसके पीछे जरूर कोई न कोई बड़ी ताकत है. सच हो या झूठ, चर्चा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार (Nishant Kumar) पूर्व केन्द्रीय मंत्री आरसीपी सिंह की जदयू में वापसी चाहते हैं. उनकी ही इच्छा को पटेल सेवा संघ अभिव्यक्ति दे रहा है. इसमें कोई दम है या नहीं, यह नहीं कहा जा सकता. इधर, कुछ दिनों पूर्व आरसीपी सिंह का एक पत्र नीतीश कुमार को हस्तगत कराया गया. उसमें मुलाकात की व्यग्रता थी. नीतीश कुमार ने उन्हें बुलाने के लिए कहा भी. तब भी मुलाकात नहीं हुई. ऐसा क्यों, यह बताने की नहीं समझने की बात है.

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निर्णय नीतीश लेंगे

बहरहाल, आरसीपी सिंह की वापसी के सवाल पर जदयू दो तरह के विचारों में बंटा है. एक तबका ललन सिंह जैसा विचार रखता है, तो दूसरे का मानना है कि आरसीपी सिंह की वापसी से जदयू के संगठनात्मक ढांचे और पिछड़ों की राजनीति (Politics of the Backward Classes) को मजबूती मिलेगी. जदयू के राष्ट्रीय महासचिव पूर्व मंत्री श्याम रजक (Shyam Rajak) और मंत्री शीला मंडल (Sheila Mandal) का स्पष्ट कहना रहा कि जो कोई भी नीतीश कुमार के नेतृत्व में आस्था रखता है, पार्टी के संविधान में विश्वास करता है, उसका जदयू में स्वागत है. आरसीपी सिंह की वापसी चाहने वालों का तर्क है कि नीतीश कुमार की आंत से दांत निकालने और छाती तोड़ देने की बात करने वालों की पार्टी में वापसी हो सकती है, तो फिर आरसीपी सिंह की क्यों नहीं? तर्क तो सही है, पर यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर निर्णय का एकाधिकार नीतीश कुमार को ही है. वह क्या निर्णय करते हैं, करते भी हैं या नहीं, यह जानने-समझने के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है.

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(राजकिशोर सिंह बिहार के वरिष्ठ पत्रकार हैं.)

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