डा. बैद्यनाथ मिश्र : जयंती पर स्मृति व्याख्यानमाला
डा. सी पी ठाकुर ने कहा कि डा. बैद्यनाथ मिश्र का जीवन नयी पीढ़ी के चिकित्सकों एवं समाजसेवियों के लिए प्रेरणास्रोत है. अश्विनी चौबे ने उन्हें भारतीय संस्कृति, राष्ट्रवाद और समाज सेवा के प्रति समर्पित व्यक्तित्व बताते हुए कहा कि उनके आदर्शों का अनुसरण कर ही विकसित बिहार और सशक्त भारत का निर्माण संभव है.
मदनमोहन ठाकुर
02 जुलाई 2026
Patna: अक्षरपुरुष स्वर्गीय डा. बैद्यनाथ मिश्र की जयंती के अवसर पर बुधवार को बिहार विधान परिषद (Bihar Legislative Council) के सभागार में ‘स्मृति व्याख्यानमाला-सह-श्रद्धांजलि समारोह’ का आयोजन किया गया. व्याख्यानमाला (Lecture series) का विषय ‘नये एवं विकसित बिहार में भारतीय शिक्षा, भारतीय चिकित्सा और सामाजिक नेतृत्व की भूमिका’ था. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्म भूषण डा. सी. पी. ठाकुर थे. विशिष्ट अतिथियों में पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के क्षेत्र संपर्क प्रमुख अनिल ठाकुर, प्रांत संघचालक गजेंद्र देव शर्मा, पूर्व विधान पार्षद किरण घई, एस बी कालेज, आरा की प्राचार्य प्रो. मीना कुमारी थे. डा. बैद्यनाथ मिश्र (Dr. Baidyanath Mishra) के पुत्र डा. गौरव सुंदरम एवं ई. गौतम शिवम भी इस अवसर पर उपस्थित रहे.
व्यक्तित्व एवं कृतित्व
कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों ने डा. बैद्यनाथ मिश्र के व्यक्तित्व एवं कृतित्व (Personality and Works) पर विचार व्यक्त किये. वक्ताओं ने कहा कि मधवापुर ग्राम में जन्मे डा. बैद्यनाथ मिश्र ने चिकित्सा (Treatment), शिक्षा (Education) एवं समाजसेवा (Social Service) के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया. डा. सी. पी. ठाकुर (Dr. C. P. Thakur) ने कहा कि डा. बैद्यनाथ मिश्र का जीवन नयी पीढ़ी के चिकित्सकों एवं समाजसेवियों के लिए प्रेरणास्रोत है. अश्विनी चौबे (Ashwini Choubey) ने उन्हें भारतीय संस्कृति, राष्ट्रवाद और समाज सेवा के प्रति समर्पित व्यक्तित्व बताते हुए कहा कि उनके आदर्शों का अनुसरण कर ही विकसित बिहार और सशक्त भारत का निर्माण संभव है.
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प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला
अनिल ठाकुर ने भारतीय शिक्षा (Indian Education), सामाजिक नेतृत्व (Social Leadership) एवं राष्ट्र निर्माण (Rashtra Nirman) में डा. मिश्र के विचारों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला. किरण घई ने डा. बैद्यनाथ मिश्र के सामाजिक सरोकारों एवं जनकल्याणकारी कार्यों का स्मरण किया. वहीं प्रो. मीना कुमारी ने उनके पारिवारिक जीवन, सेवा, संघर्ष, शिक्षा एवं समाज के प्रति समर्पण को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि (Shraddhanjali) अर्पित की.


