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सुन्दर सिंह महाविद्यालय, मेहुस: अधूरा कोरम… लापरवाही या गहरी साजिश?

समिति में पांच सदस्यों का प्रावधान है, जबकि वर्तमान में केवल तीन ही सदस्य हैं-विश्वविद्यालय प्रतिनिधि, शिक्षाविद और प्राचार्य. निर्णय यही तीनों ले रहे हैं. अनुमंडल पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि की उपस्थिति अनिवार्य है. दिलचस्प बात यह कि विधानसभा के 2025 के चुनाव के बाद नये जनप्रतिनिधि का मनोनयन भी नहीं किया गया है.

कथित अधूरे शासी निकाय को लेकर उठ रहे सवाल
तदर्थ समिति का भी कार्यकाल हो गया पूरा
बेफिक्र दिख रहे कुलपति और कुलसचिव!
कार्यसंचालन नियमानुकुल नहीं होने का आरोप

तापमान लाइव ब्यूरो
02 जुलाई 2026

Sheikhpura: मुंगेर विश्वविद्यालय के नियंत्रणाधीन संचालित शेखपुरा जिले के मेहुस स्थित सुन्दर सिंह महाविद्यालय के प्रशासनिक संचालन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. बताया जा रहा है कि महाविद्यालय प्रबंधन लगभग दो वित्तीय वर्षों से बिना पूर्ण कोरम के ही संचालित हो रहा है. आरोप उछल रहे हैं कि नियम के विरुद्ध वित्तीय एवं विकास संबंधी निर्णय लिये जा रहे हैं. सवाल विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली और मंशा पर भी उठ रहे हैं. इसको मजबूती इसलिए मिल रही है कि छह महीने का कार्यकाल पूरा हो जाने के बाद पुनः डा. अंजेश कुमार को ही विश्वविद्यालय प्रतिनिधि बना दिया गया है.

उठ रहे गंभीर सवाल?

जानकारों के मुताबिक किसी भी महाविद्यालय के संचालन के लिए विधिवत शासी निकाय (Governing Body) का गठन आवश्यक होता है. शासी निकाय में आमतौर पर सात सदस्य रहते हैं. उनमें प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि, विश्वविद्यालय प्रतिनिधि, शिक्षाविद, दाता सदस्य, शिक्षक प्रतिनिधि और प्राचार्य शामिल होते हैं. यदि शासी निकाय का गठन नहीं हो पाता है तो विश्वविद्यालय द्वारा तदर्थ समिति (Ad hoc committee) बनायी जाती है, जिसका कार्यकाल छह माह का होता है. इसके बाद इसे केवल एक बार छह माह के लिए बढ़ाया जा सकता है. लेकिन, सुन्दर सिंह महाविद्यालय (Sundar Singh College, Mehus) के मामले में यह समय सीमा भी समाप्त हो चुकी है. यदि जल्द ही शासी निकाय का गठन नहीं हुआ तब उसे नियमों की अवहेलना मानी जा सकती है.

हो गया कार्यकाल समाप्त

कहते हैं कि महाविद्यालय के दाता सदस्य और शिक्षक प्रतिनिधि का कार्यकाल मई 2025 में समाप्त हो चुका है. दाता सदस्य का चुनाव वर्ष 2022 में हुआ था. कार्यकाल तीन वर्ष का था. शिक्षक प्रतिनिधि का चुनाव वर्ष 2024 में हुआ था. उसका कार्यकाल एक वर्ष का था. नियमानुसार वर्ष 2025 में दोनों पदों पर पुनः चुनाव हो जाना चाहिए था, लेकिन संवाद लिखने तक नहीं कराया गया. मुंगेर विश्वविद्यालय (Munger University) के कुलपति प्रो. संजय कुमार और कुलसचिव प्रो. घनश्याम राय के संज्ञान में यह मामला है या नहीं, यह नहीं मालूम.

अधूरी तदर्थ समिति!

चुनाव नहीं होने की स्थिति में विश्वविद्यालय ने तदर्थ समिति का गठन किया. विश्वविद्यालय द्वारा नामित शिक्षाविद डा. अंजेश कुमार को अध्यक्ष और विश्वविद्यालय प्रतिनिधि प्रो. रंजन कुमार सिंह को सचिव बनाते हुए बरबीघा (Barbigha) के तत्कालीन विधायक सुदर्शन कुमार, शेखपुरा के अनुमंडल पदाधिकारी और सुन्दर सिंह महाविद्यालय के प्राचार्य डा. शिवकुमार प्रसाद सिंह को सदस्य मनोनीत किया गया था. लेकिन कहा जाता है कि यह समिति भी पूर्ण रूप से काम नहीं कर रही है. इसलिए कि इसका कार्यकाल भी समाप्त हो चुका है. समिति में पांच सदस्यों का प्रावधान है, जबकि वर्तमान में केवल तीन ही सदस्य हैं-विश्वविद्यालय प्रतिनिधि, शिक्षाविद और प्राचार्य. निर्णय यही तीनों ले रहे हैं. अनुमंडल पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि की उपस्थिति अनिवार्य है. दिलचस्प बात यह कि विधानसभा के 2025 के चुनाव के बाद नये जनप्रतिनिधि का मनोनयन भी नहीं किया गया है.

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अधिसूचना जारी नहीं

महाविद्यालय के सूत्रों के अनुसार मई 2026 तक शिक्षक प्रतिनिधि (Teacher Representative) और दाता सदस्य (Donor Member) के चुनाव के लिए अधिसूचना जारी हो जानी चाहिए थी, लेकिन अब तक यानी संवाद लिखने तक इस दिशा में कोई पहल नहीं हुई है. यही नहीं, समिति में बतौर सदस्य शिक्षाविद (Educationist) का मनोनयन विश्वविद्यालय द्वारा किया जाता है. पिछली बार डा. अंजेश कुमार को मनोनीत किया गया था. उनका कार्यकाल समाप्त होने पर विश्वविद्यालय ने उन्हें पुनः मनोनीत कर दिया है. इससे महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय (Colleges & Universities) प्रशासन की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता को लेकर सवाल गहरे हो गये हैं. इस पर मुंगेर विश्वविद्यालय की कुछ विवशता भी हो सकर्ती है.

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