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FIFA World Cup 2026 : गोल पर गोल… टूट गये कई कीर्तिमान!

2026 का विश्वकप फुटबॉल साबित करता दिख रहा है कि फीफा अब खुद का ध्यान मुख्य रूप से ‘कमाई और विस्तार’ पर केन्द्रित कर रखा है. ज्यादा टीमें, ज्यादा मैच, ज्यादा राजस्व… यह मॉडल सफल रहता है या नहीं, यह अगले विश्वकप यानी 2030 में पता चल पायेगा. लेकिन, इतना तय है कि 2026 के विश्वकप ने फुटबॉल की दुनिया का इतिहास बदल दिया है. इस रूप में कि अब यह सिर्फ 32 देशों का खेल नहीं रहा, 48 देशों, तीन महाद्वीपों और करोड़ों फुटबॉल प्रेमियोें का उत्सव बन गया है.

परंपराएं टूटीं, नये कीर्तिमान स्थापित हुए
कई नये देशों को विश्वकप में खेलने का अवसर मिला
36 लाख से ज्यादा दर्शक स्टेडियमों में पहुंचे
एशिया और अफ्रीका में विस्तृत होगा फुटबॉल का बाजार

तापमान लाइव ब्यूरो
07 जुलाई 202़6

New Delhi: फुटबॉल का महाकुंभ यानी विश्वकप: 2026 का नये स्वरूप में आयोजन रिकार्डों को तोड़ते-गढ़ते चरम काल की ओर बढ़ रहा है. तमाम खेल प्रेमियों (Sports Enthusiasts) में फिलहाल फुटबॉल (Football) का ही नशा छाया हुआ है. विश्वकप फुटबॉल (Football World Cup) की शुरुआत इस बार 11 जून 2026 को हुई, समापन 19 जुलाई 2026 को होगा. इस टूर्नामेंट में परंपराए टूटी हैं. नये कीर्तिमान स्थापित हुए हैं. अमेरिका (United States), मेक्सिको (Mexico) और कनाडा (Canada) की संयुक्त मेजबानी इसकी सबसे बड़ी पहचान मानी जा रही है. टूर्नामेंट में पहली बार 48 देशों की टीमें भाग ले रही हैं और 16 शहरों में मैच हो रहे हैं. समापन तक कुल 104 मैच होंगे. इससे अभिभूत अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल महासंघ (FIFA) के अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो (Gianni Infantino) ने इसे फुटबॉल के वैश्वीकरण का नया अध्याय बताया है.

32 से 48 टीमों तक का सफर

विश्वकप फुटबॉल 28 वर्षों से 32 टीमों के प्रारूप में हो रहा था. इस बार प्रारूप बदल गया. टूर्नामेंट (Tournament) में कुल 48 टीमों की भागीदारी हो रही है. पहली बार 12 ग्रुप बनाये गये हैं. हर ग्रुप में चार टीमें. हर ग्रुप से श्रेष्ठ दो टीमों के साथ तीसरे स्थान वाली आठ श्रेष्ठ टीमें नॉकआउट (knockout) में पहुंचीं. इसी के साथ ‘राउण्ड ऑफ 32’ भी जुड़ गया. इस विस्तार का सीधा असर खिलाड़ियों पर पड़ा. अब फाइनल तक पहुंचनेवाली टीमों को आठ मैच खेलने होंगे जबकि पहले सात ही खेलने होते थे. टूर्नामेंट की अवधि भी 32 दिन से बढ़ाकर 39 दिन कर दी गयी है. फीफा का तर्क है कि इससे एशिया (Asia), अफ्रीका (Africa) और अन्य छोटे देशों को विश्वकप खेलने का मौका मिला है.

तीन देशों की संयुक्त मेजबानी

विश्वकप फुटबॉल में पहली बार तीन देशों ने संयुक्त रूप से मेजबानी की. यह भी एक इतिहास है. अमेरिका में 11, मेक्सिको में 03 और कनाडा में 02 शहरों में मैच खेले जा रहे हैं. 29 जुलाई 2026 को फाइनल मुकाबला (Final Match) न्यू जर्सी के मेटलाइफ स्टेडियम में खेला जायेगा. मेक्सिको का एस्टाडियो एज्टेका इतिहास का पहला स्टेडियम बन गया जिसमें 1970, 1986 के बाद 2026 में भी विश्वकप का मैच आयोजित हुआ. कनाडा और अमेरिका के लिए यह दूसरी बार मेजबानी थी. लेकिन, संयुक्त रूप से यह प्रयोग बिल्कुल नया है.

‘गोलों का विश्वकप’

2026 के विश्वकप फुटबॉल का एक रोचक तथ्य यह भी है कि यह ‘गोलों का विश्वकप’ भी बन गया है. टूर्नामेंट के 59वें मैच तक ही कुल 173 गोल हो गये. इससे 2022 के 172 गोलों का रिकार्ड टूट गया. 2022 में विश्वकप फुटबॉल कतर (Qatar) में आयोजित हुआ था. इसी तरह ग्रुप स्टेज में ही 137 गोल हो गये जिससे 2014 के ब्राजील (Brazil) विश्वकप का 136 गोलों का रिकार्ड ध्वस्त हो गया. दर्शकों के मामले में भी 2026 के विश्वकप ने बाजी मार ली. 36 लाख 05 हजार 357 दर्शक मैच देखने स्टेडियमों में पहुंचे. यह आंकड़ा 1994 में अमेरिका में हुए विश्वकप के साढ़े तीन मीलियन दर्शक के रिकार्ड को तोड़ दिया है.

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आर्थिक और सामाजिक असर

एक अनुमान के अनुसार फीफा को इस विश्वकप से 11 बिलियन डॉलर से ज्यादा की कमाई होने की उम्मीद है. 48 टीमों का मतलब है बारह सौ से ज्यादा खिलाड़ियों को मंच मिलना. इससे फुटबॉल का बाजार एशिया (Asia) और अफ्रीका (Africa) में और विस्तृत होगा. लेकिन, आलोचकों की मानें, तो मैचों की संख्या बढ़ने से खिलाड़ियों पर दबाब बढ़ सकता है और खेल की गुणवत्ता (Quality of the game) भी प्रभावित हो सकती है. एक विचार यह भी सामने आ रहा है कि 2026 का विश्वकप फुटबॉल साबित करता दिख रहा है कि फीफा अब खुद का ध्यान मुख्य रूप से ‘कमाई और विस्तार’ (Earnings and Expansion) पर केन्द्रित कर रखा है. ज्यादा टीमें, ज्यादा मैच, ज्यादा राजस्व… यह मॉडल सफल रहता है या नहीं, यह अगले विश्वकप यानी 2030 में पता चल पायेगा. लेकिन, इतना तय है कि 2026 के विश्वकप ने फुटबॉल की दुनिया का इतिहास बदल दिया है. इस रूप में कि अब यह सिर्फ 32 देशों का खेल नहीं रहा, 48 देशों, तीन महाद्वीपों और करोड़ों फुटबॉल प्रेमियोें (Football Enthusiasts) का उत्सव बन गया है.

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