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बलरामपुर-बारसोई : छूट गयी रुलाई… सिर्फ कमालुद्दीन ही मैदान में नहीं होते तब!

अशोक कुमार
24 दिसम्बर 2025

Purnia : 2010 में मुस्लिम मतों में विभाजन का लाभ दुलालचन्द्र यादव को मिल गया, तो 2015 में ठीक उसके उलट हिन्दू मतों में बिखराव भाकपा-माले (CPI-ML) प्रत्याशी महबूब आलम की जीत का आधार बन गया . उस चुनाव में जदयू (JDU) महागठबंधन का हिस्सा था. वामपंथी दलों का तब महागठबंधन से जुड़ाव नहीं हुआ था. महागठबंधन (Mahagathbandhan) में जदयू की उम्मीदवारी दुलालचन्द्र गोस्वामी को मिली थी. एनडीए (NDA) में सीट भाजपा (BJP) के हिस्से में गयी थी. उम्मीदवारी वरुण कुमार झा (Varun Kumar Jha) को मिली थी. इन दोनों के अलावा निरंजन दास (Niranjan Das) और हंसराज यादव (Hansraj Yadav) भी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में थे. वरुण कुमार झा को 42 हजार 094, दुलालचन्द्र गोस्वामी को 40 हजार 114, निरंजन दास को 14 हजार 033 तथा हंसराज यादव को 09 हजार 473 मत मिले. इन मतों का जोड़ 01 लाख 05 हजार 714 होता है. इसके विपरीत महबूब आलम (Mehboob Alam) को 62 हजार 513 मत मिले और वह 43 हजार 201 मतों के अंतर से निर्वाचित हो गये.

तीसरे स्थान पर अटक गये

2020 में 53 हजार 597 मतों के विशाल अंतर से विजय पताका लहराने वाले ‘जनता के नेता’ महबूब आलम का 2025 में खूंटा उखड़ गया. तीसरे स्थान पर अटक गये. जीत लोजपा (रामविलास) (LJP-R) की उम्मीदवार संगीता देवी (Sangeeta Devi) की हुई. संगीता देवी का मुकाबला एआईएमआईएम (AIMIM) के उम्मीदवार आदिल हसन (Adil Hassan) से हुआ. आदिल हसन 389 मतों के मामूली अंतर से पिछड़ गये. संगीता देवी को 80 हजार 459 मत मिले तो आदिल हसन को 80 हजार 070 मत. इस क्षेत्र में संभवतः पहली बार एआईएमआईएम का दम दिखा और लगभग बराबर का त्रिकोणीय मुकाबला हुआ. तीसरे स्थान पर लुढ़क गये भाकपा-माले के पूर्व विधायक महबूब आलम को 79 हजार 141 मत मिले. वह जीत से 01 हजार 318 मत पीछे रह गये.

नप गयी उनकी औकात

भाजपा के बागी वरुण कुमार झा भी तीसरी बार किस्मत आजमाने उतरे थे. उनकी औकात 05 हजार 372 मतों में नप गयी. चुनाव मैदान में 18 उम्मीदवार थे. उनमें 13 मुस्लिम और 05 हिन्दू थे. दूसरे और तीसरे स्थान पर रहने वाले मुस्लिम उम्मीदवारों को छोड़ दें, तो उस समुदाय के अन्य 11 उम्मीदवारों को कुल 24 हजार 383 मत मिल गये. निश्चय ही उनमें अधिसंख्य मत मुस्लिम समुदाय के रहे होंगे. सबसे कम 537 मत निर्दलीय मोहम्मद कमालुद्दीन (Md. Kalamuddin) को मिले. बिल्कुल साफ है कि सिर्फ मोहम्मद कमालुद्दीन ही मैदान में नहीं होते तो लोजपा (रामविलास) की उम्मीदवार संगीता देवी चुनाव नहीं जीत पातीं. संगीता देवी को छोड़ अन्य पांच हिन्दू उम्मीदवारों ने 09 हजार 936 मत बटोरे. उनमें भाजपा के बागी वरुण कुमार झा के 05 हजार 372 और जदयू के बागी रौशन अग्रवाल के 02 हजार 282 मत भी जुड़े हुए हैं.

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मिल गया उनका साथ

विश्लेषकों की समझ है कि एआईएमआईएम के पांव नहीं जमने देने के लिए सेक्यूलर मुसलमानों के उस एक हिस्से का साथ संगीता देवी को मिल गया जो वामपंथ (Leftism) विरोधी मानसिकता के माने जाते हैं. बारसोई (Barsoi) बाजार के सुल्तानपुर (Sultanpur) की रहने वाली संगीता देवी कटिहार (Katihar) जिला लोजपा (रामविलास) की अध्यक्ष हैं. वर्तमान में उन्हें लोजपा (रामविलास) विधायक दल के मुख्य सचेतक की महत्वपूर्ण जिम्मेवारी भी मिली है. संगीता देवी के पति राजेश कुमार साह शिक्षक हैं. जानकारों के मुताबिक जमीन का कारोबार भी करते हैं. उनके दादा हरिहर प्रसाद साह राजद (RJD) की राजनीति से जुड़े थे.

खटिया खड़ी हो गयी

संगीता देवी 2020 में भी लोजपा की उम्मीदवार थीं. 08 हजार 949 मत ही हासिल कर पायी थीं. उस चुनाव में एनडीए में बलरामपुर (Balrampur) की सीट वीआईपी (VIP) के हिस्से में गयी थी. उम्मीदवारी भाजपाई वरुण कुमार झा को मिली थी. भाकपा-माले प्रत्याशी महबूब आलम को प्राप्त 01 लाख 04 हजार 489 मतों के मुकाबले उन्हें 50 हजार 892 मत ही प्राप्त हो पाये थे. 2020 में एआईएमआईएम का उम्मीदवार नहीं था. मुसलमानों का समर्थन महबूब आलम को मिल गया. इस बार एआईएमआईएम का उम्मीदवार था. पूरी मजबूती से चुनाव लड़ा. महबूब आलम की खटिया खड़ी हो गयी.

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(अशोक कुमार सीमांचल के वरिष्ठ पत्रकार हैं.)

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