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एएमयू किशनगंज : ठग लिया किशनगंज की जनता को!

सांसद डा. जावेद आजाद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की किशनगंज विस्तारित शाखा के लिए स्वीकृत राशि आवंटित कराने, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से प्राध्यापकों के स्वीकृत पदों पर बहाली के लिए प्रयासरत हैं. निर्माण कार्य पर एनजीटी की रोक हटवाने के लिए भी. इस संदर्भ में कुछ दिनों पूर्व अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. नईमा खातून से उनकी मुलाकात हुई.

राजकिशोर सिंह
22 जनवरी 2026

Kishanganj: अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (Aligarh Muslim University) की विस्तारित शाखा के लिए अंततः किशनगंज के कोचाधामन (Kochadhaman) और बहादुरगंज (Bahadurganj) के बीच चकला में महानंदा नदी के समीप जमीन उपलब्ध करायी गयी, जो लगभग15 साल से यूं ही पड़ी हुई है. चहारदिवारी के अलावा और कोई निर्माण नहीं हुआ है. क्यों, इसका तथ्य आधारित जवाब किसी के पास नहीं है. सभी संबद्ध लोग यही कहते हैं कि नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (National Mission for Clean Ganga) के मद्देनजर राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) ने निर्माण कार्य पर रोक लगा रखी है. यह भी कि इसी की आड़ में केन्द्र की भाजपा सरकार (BJP Government) इसके लिए स्वीकृत राशि आवंटित नहीं कर रही है. 

नजरंदाज कर दिया

महानंदा (Mahananda) के प्रदूषित होने की आशंका के तहत निर्माण कार्य पर एनजीटी की कथित रोक की चर्चा के क्रम में लोग यह भी कहते हैं कि चकला में जहां अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की विस्तारित शाखा स्थापित होनी है, वह महानंदा नदी से लगभग ढाई किलोमीटर दूर है. ऐसे में उस पर निर्माण कार्य का दुष्प्रभाव असंभव है. बताया जाता है कि जमीनी हकीकत देखने के उपरांत सरकारी एजेंसी ने भी इसी आशय का मंतव्य दिया था. लेकिन, उसको नजरंदाज कर दिया गया.

इन पर रोक क्यों नहीं!

इन सब बातों के साथ यह भी जोड़ा जाता है कि जिस आधार पर विस्तारित शाखा (Extended Branch) के निर्माण से महानंदा के प्रदूषित होने की आशंका जतायी गयी है, वैसी ही स्थिति में विस्तारित शाखा की जमीन के बाजू में एपीजे अब्दुल कलाम कृषि कालेज (APJ Abdul Kalam Agricultural College) का निर्माण हुआ है. उसी के आसपास पुलिस लाइन (Policeline) भी बना है. इन निर्मार्णों को लेकर न तो केन्द्र सरकार ने कोई आपत्ति जतायी है और न एनजीटी ने विरोध किया है. लोग सवाल उठाते हैं कि इन दोनों के निर्माण से जब महानंदा प्रदूषित नहीं हुई, तो एएमयू  (AMU)की विस्तारित शाखा के निर्माण से प्रदूषित कैसे हो जायेगी?

करते रहे दोषारोपण

निर्माण पर एनजीटी की रोक और विस्तारित शाखा को राशि आवंटन के संदर्भ में जो बातें कही जा रही हैं वे अर्द्धसत्य हैं. निर्माण पर रोक का मामला अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और राज्य सरकार के क्षेत्राधिकार की बात है. रोक हटाने के प्रयास की बाबत दोनों एक दूसरे पर दोषारोपण ही करते रहे हैं. वोट के स्वार्थ में नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की सरकार थोड़ी गंभीर दिखती है, पर विश्वविद्यालय प्रशासन (University Administration) कान में तेल डाल सोया पड़ा है. सत्तारूढ़ जदयू के नेताओं का कहना है कि इस गतिरोध को खत्म कराने का प्रथम दायित्व विश्वविद्यालय का बनता है. इसे दुर्भाग्य ही कहा जायेगा कि वह बेफिक्र है. 

ठीक नहीं थी कांग्रेस की नीयत

जहां तक राशि आवंटन की बात है, तो इस मामले का संपूर्ण सच यह है कि केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय (Ministry of Human Resource Development) में इस विस्तारित शाखा के अस्तित्व का कोई साक्ष्य ही नहीं है. आल इंडिया मजलिस-ए- इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष विधायक (MLA) अख्तरुल ईमान (Akhtarul Iman) ने भी इसकी तस्दीक की है कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की विस्तारित शाखा खोलने के मामले में किशनगंज के साथ धोखा हुआ है. केन्द्र की कांग्रेस की सरकार ने अपने कार्यकाल में पहल अवश्य की, पर उसकी नीयत ठीक नहीं रही. 

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क्यों नहीं कर दिया आवंटन

किशनगंज के साथ धोखाधड़ी को वह इस रूप में व्याख्यायित करते हैं कि घोषणा कांग्रेस सरकार (Congress Government) की थी. अप्रैल 2014 तक उसकी सरकार रही. 2011 में जमीन हस्तांतरित हुई. 30 जनवरी 2014 को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी (Soniya Gandhi) ने उसका शिलान्यास किया. कांग्रेस (Congress) की सरकार ने 135.4 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की. जब किसी तरह की कोई अड़चन नहीं थी, तो  कांग्रेस के सत्ता में रहते अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को संपूर्ण राशि आवंटित क्यों नहीं कर दी गयी? विधायक अख्तरुल ईमान ने साफ शब्दों में कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की विस्तारित शाखा की स्थापना के नाम पर कांग्रेस की सरकार ने सीमांचल, विशेषकर किशनगंज की जनता को ठग लिया. वर्तमान में केन्द्र में भाजपा (BJP) की सरकार है. उससे उम्मीद व्यर्थ है.

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वोट की राजनीति

वैसे, सफलता भले नहीं मिली, राशि आवंटन के लिए प्रधानमंत्री (Prime Minister) नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) को ज्ञापन तसलीम उद्दीन (Tasleem Uddin) ने सौंपा था. अख्तरुल ईमान यह भी कहते हैं कि क्षेत्रीय कांग्रेस सांसद डा. जावेद आजाद (Dr. Javed Azad) सिर्फ राजनीति में बने रहने के लिए एएमयू का मुद्दा उठाते रहते हैं. क्षेत्र के वास्तविक विकास से उन्हें कोई मतलब नहीं रहता. अख्तरुल ईमान के इस अल्फाज में दम है. डा. जावेद आजाद ही नहीं, मरहूम कांग्रेस सांसद असरारुल हक कासमी ने भी सिर्फ वोट की राजनीति की थी, इसके अलावा कुछ नहीं. 

कुलपति से मुलाकात

वैसे, डा. जावेद आजाद का कहना है कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की किशनगंज विस्तारित शाखा के लिए स्वीकृत राशि आवंटित कराने तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से प्राध्यापकों के स्वीकृत पदों पर बहाली के लिए वह प्रयासरत हैं. निर्माण कार्य पर एनजीटी की रोक हटवाने के लिए भी. इस संदर्भ में कुछ दिनों पूर्व अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की कुलपति (Vice Chancellor) प्रो. नईमा खातून (Prof. Naima Khatoon) से उनकी मुलाकात हुई. इन तमाम मुद्दों पर हुई बातचीत का साकारात्मक परिणाम बहुत जल्द सामने आने की संभावना है. 

(राजकिशोर सिंह पटना के वरिष्ठ पत्रकार हैं.)

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