संगठन में तकरार : नहीं बख्श रही सरकार

विष्णुकांत मिश्र
02 दिसंबर 2025
New Delhi : बात नक्सली संगठनों (Naxalite organizations) के संघर्ष विराम (Ceasefire) पर संवाद की, तो इस सवाल पर संगठन में तकरार के बीच सरकार ने फिर साफ कर दिया है कि हथियार डाले बिना माओवादियों (Maoists) से कोई बातचीत नहीं होगी. बिना शर्त बातचीत (Unconditional Conversation) की पेशकश को भी उसने सीधे तौर पर नकार दिया है. केन्द्रीय गृह मंत्री (Union Home Minister) अमित शाह (Amit Shah) ने स्पष्ट कह दिया है कि ‘हथियार डालो, नहीं तो गोली खाओ.’ सरकार के इस कड़े रुख पर भाकपा (माओवादी) की कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी है. पर, सशस्त्र संघर्ष (Armed Conflict) का रास्ता त्याग समाज की मुख्य धारा (Mainstream of Society) से जुड़ गये केन्द्रीय समिति के प्रवक्ता रहे मल्लोजुला वेणुगोपाल उर्फ अभय उर्फ सोनू ने जब ऐसी पेशकश की थी तब माओवादी संगठन में विवाद खड़ा हो गया था. संगठन की तेलंगाना राज्य कमेटी ने साफ शब्दों में कह दिया कि यह किसी का व्यक्तिगत विचार हो सकता है, निर्णय भाकपा (माओवादी) का नहीं है.
बेतुका बताया बयान को
तेलंगाना राज्य कमेटी (Telangana State Committee) के प्रवक्ता जगन ने पूर्व के रुख को दोहराते हुए कहा कि मार्च 2025 में लोकतांत्रिक समझ वाले कुछ बुद्धिजीवियों ने ‘शांति संवाद समिति’ का गठन किया था. प्रस्ताव रखा था कि सरकार और माओवादी संगठन (The Government and the Maoist Organization) के बीच शांति वार्ता (Peace Talks) हो. उस प्रस्ताव के संदर्भ में संगठन की केन्द्रीय समिति ने कहा था कि तलाशी अभियान (Search Operation) और नरसंहार (Genocide) बंद कर दिये जायें, सुरक्षा बलों के नये शिविरों का निर्माण रोक दिया जाये तो शांतिपूर्ण माहौल में बातचीत हो सकती है. कारण जो रहा हो, बात इससे आगे नहीं बढ़ पायी. मल्लोजुला वेणुगोपाल उर्फ अभय के संदर्भित बयान का सारांश यह था कि माओवादी बिना शर्त हथियार डालने को तैयार हैं. संगठन में सहमति कायम करने के लिए बस सरकार से एक महीने की मोहलत चाहते हैं. तेलंगाना राज्य कमेटी के प्रवक्ता जगन ने इस पर हैरानी जताते हुए इसे बेतुका बताया.

देवजी ने तब यह कहा…
19 सितम्बर 2025 को जारी बयान में जगन ने कहा कि संगठन का कोई भी जिम्मेदार नेता ऐसे फैसलों को सार्वजनिक कर मसले का हल नहीं तलाशता. वह भी एक ऐसे संगठन में, जो गोपनीय तरीके से काम करता हो. केन्द्रीकृत लोकतांत्रिक सिद्धांतों (Centralized Democratic Principles) के प्रति प्रतिबद्ध हो और कठोर दमन का सामना कर रहा हो. जगन ने यह भी कहा कि मल्लोजुला वेणुगोपाल उर्फ अभय सशस्त्र आंदोलन को छोड़ मुख्य धारा से जुड़ना चाहते हैं तो संगठन को सूचित कर वह ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं. इतने बड़े निर्णय की सार्वजनिक कर उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और क्रांतिकारी खेमे में भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है. इतना ही नहीं, उसी दरम्यान मल्लोजुला वेणुगोपाल उर्फ अभय को तिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी का संदेश मिला कि उसे हथियार डालने (Lay Down Arms) को मजबूर किया गया तो वह उसी हथियार से उसे मार देगा.
उसकी मौत भी तय
नक्सली प्रवक्ता जगन (Naxalite spokesperson Jagan) के उक्त बयान के बाद माओवादी खुले तौर पर दो खेमों में बंट गये . मल्लोजुला वेणुगोपाल उर्फ भूपिति का खेमा एकतरफा संघर्ष विराम और सरकार से संवाद (Communication with Government) के पक्ष में था तो दूसरा अतिवादी गुट हथियार नहीं डाल तथाकथित नये महासचिव तिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (Dandakaranya Special Zonal Committee) के नये सचिव माडवी हिड़मा की अगुवाई में सशस्त्र संघर्ष को आगे बढ़ाने को कटिबद्ध दिखा. इसी बीच मल्लोजुला वेणुगोपाल उर्फ भूपति ने हथियार डाल दिये. सैकड़ों माओवादियों ने उसका अनुसरण किया. दूसरी तरफ तिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी का सशस्त्र संघर्ष (Armed Conflict) माडवी हिड़मा के मारे जाने के बाद ठिठुर कर ठहर-सा गया है. तिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी भी प्राण रक्षा के लिए भागा-भाग फिर रहा है, सुरक्षित पनाह ढूंढ़ रहा है. हालात ऐसे हो गये हैं कि आत्मसमर्पण (surrender) नहीं करने की स्थिति में देर-सबेर उसकी भी ‘मुठभेड़ में मौत’ तय माना जा रहा है.
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