भाजपा और नितिन नवीन : अंडमान में हुआ फैसला, इन्होंने रखा प्रस्ताव

लोग पूछ रहे हैं कि यह संघ का निर्णय है या नरेन्द्र मोदी-अमित शाह की रणनीति की उपज हैं? दोनो सवालों के अलग-अलग मायने होंगे. अगर यह संघ का निर्णय है तो क्या मोदी-शाह के प्रस्ताव-पसंद को नकार दिया गया है? अगर यह संघ और नरेन्द्र मोदी दोनों की सहमति से लिया गया फैसला है तो इसे एक नये युग की शुरुआत कहा जायेगा.

विभेष त्रिवेदी
01 जनवरी 2026
Patna : कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना. पटना से दिल्ली तक, अलग-अलग दृष्टिकोण से खूब व्याख्या-विश्लेषण हुआ. नितिन नवीन (Nitin Naveen) किसकी पसंद हैं? अचानक इतना बड़ा दायित्व कैसे सौंपा गया? क्या भाजपा (BJP) के राष्ट्रीय नेता सहजता से उनका नेतृत्व स्वीकार करेंगे? सबसे जूनियर नेता को अध्यक्ष क्यों बनाया गया? युवा चेहरा को ही बनाना था, तो भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या (Tejaswi Surya) को क्यों नहीं आजमाया गया? तेजस्वी सूर्या पेशे से अधिवक्ता और बेंगलुरू (Bengaluru) दक्षिण से भाजपा के सांसद हैं. केन्द्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर की राष्ट्रव्यापी पहचान है.
दूरदर्शी रणनीति
दरअसल, भाजपा में योग्य और अनुभवी चेहरों की कमी नहीं है. पिछले डेढ़ साल से एक दर्जन कद्दावर नेताओं के नाम की चर्चा चल रही थी. नितिन नवीन की ताजपोशी को एक दूरदर्शी रणनीति बताया जा रहा है. कुछ लोग पूछ रहे हैं कि यह संघ का निर्णय है या नरेन्द्र मोदी-अमित शाह की रणनीति की उपज हैं? दोनो सवालों के अलग-अलग मायने होंगे. अगर यह संघ का निर्णय है तो क्या मोदी-शाह के प्रस्ताव-पसंद को नकार दिया गया है? अगर यह संघ और नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) दोनों की सहमति से लिया गया फैसला है तो इसे एक नये युग की शुरुआत कहा जायेगा. अगर संघ की पृष्ठभूमि वाले किसी अनुभवी कायस्थ को बागडोर सौंपनी थी तो रविशंकर प्रसाद (Ravishankar Prasad) को क्यों नहीं आजमाया गया? जवाब सबको पता है, मोदी-शाह (Modi-Shah) रविशंकर प्रसाद पर भरोसा नहीं करते हैं. यह कहना गलत होगा कि मोदी-शाह की सहमति नहीं थी.
अंडमान में लगी मुहर
हाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rss) के सर संघचालक मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) और केन्द्रीय गृह मंत्री (Union Home Minister) अमित शाह (Amit Shah) ने अंडमान में वीर सावरकर प्रेरणा पार्क का उद्घाटन किया. इस मौके पर वीर सावरकर की प्रतिमा का भी अनावरण किया गया. हालांकि, विगत कई महीनों से संघ और भाजपा नेतृत्व नितिन नवीन समेत कई नामों पर मंथन कर रहा था. राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष (BL Santosh) ने ही संघ और मोदी-शाह के सामने नितिन नवीन का नाम प्रस्तावित किया. बीएल संतोष पिछले कुछ सालों से नितिन नवीन की मेहनत और उसका परिणाम देखते आ रहे थे.
कुशल रणनीतिकार की छवि
पांच बार के विधायक नितिन नवीन ने एक कर्मठ कार्यकर्ता के रूप में अपनी पहचान बनायी है. वह दो बार भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री बनाये गये. प्रदेश भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष रहे. सिक्किम (Sikkim) में भाजपा के चुनाव प्रभारी (Election Incharge) के रूप में काम करते हुए अपनी कार्यकुशलता का परिचय दिया. सिक्किम के संगठन प्रभारी भी रहे. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) का प्रभारी बनाये जाने पर भी उन्होंने बूथ लेवल मैनेजमेंट (Booth Level Management), संगठन विस्तार और कुशल रणनीतिकार वाली छवि अर्जित की.
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अनुभव-ऊर्जा का समन्वय
अब जो संकेत मिल रहे हैं, भाजपा में वरिष्ठ नेताओं के अनुभव और युवा नेताओं की ऊर्जा का समन्वय स्थापित किया जायेगा. यह कहना गलत होगा कि राष्ट्रीय कमेटी में दिग्गज और नितिन नवीन से कहीं अधिक वरिष्ठ नेताओं को काम करने में दिक्कत होगी. हां, इससे इनकार नहीं किया जा सकता है कि कुछ ऊर्जावान युवा चेहरों को भी अहम दायित्व सौंपने की तैयारी है. आने वाले समय में नितिन नवीन को सांस लेने की फुर्सत नहीं होगी. उन्हें काम करने आता है और दिन-रात काम करना पड़ेगा. उनकी पहली परीक्षा पश्चिम बंगाल (West Bangal) में होगी. वह अकेले नहीं होंगे, बिहार (Bihar) के स्वास्थ्य मंत्री (Health Minister) मंगल पाण्डेय (Mangal Panday) समेत कई कुशल रणनीतिकार उनकी टीम में होंगे.
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पटना में उत्तराधिकारी कौन
अब पटना में नयी अटकलबाजी शुरू हो गयी है. रविशंकर प्रसाद का कुछ उपयोग होगा या मार्गदर्शक मंडल को सुशोभित करेंगे? बिहार सरकार में कायस्थ समाज से नितिन नवीन का उत्तराधिकारी कौन बनेगा? बिहार के शाहाबाद (Shahabad) क्षेत्र में पार्टी को बड़ी बढ़त दिलाने वाले राष्ट्रीय मंत्री ऋतुराज सिन्हा (Rituraj Sinha) का क्या होगा? बिहार (Bihar) से कायस्थ समाज के नितिन नवीन जब राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बन गये हैं तो उन्हीं की जाति के ऋतुराज सिन्हा राष्ट्रीय मंत्री बने रहेंगे? दोनों एक ही शहर, समाज और महत्वाकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं. क्या नेतृत्व नितिन नवीन को राज्यसभा (Rajyasabha) में भेजकर बांकीपुर (Bankipur) विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव कराने की अनावश्यक जल्दबाजी करेगा? इस सवाल का जवाब भी भविष्य पर छोड़ देना चाहिये कि नितिन नवीन अगले लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections) में रविशंकर प्रसाद की जगह पटना साहिब (Patna Sahib) से भाजपा का उम्मीदवार बनाये जा सकते हैं या नहीं?
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