Bihar Politics : चिराग का चमत्कार! धरधरा के ढह गये… राजद के गढ़

2025 के चुनाव की महत्वपूर्ण बात यह रही कि लोजपा (रामविलास) ने कई वैसी सीटों पर अपना झंडा गाड़ दिया जहां पूर्व के चुनावों में महागठबंधन जीतता रहा है. लोजपा (रामविलास) की सबसे बड़ी जीत वैशाली जिले के महुआ विधानसभा क्षेत्र में हुई. वहां इसके उम्मीदवार संजय कुमार सिंह ने राजद के निर्वतमान विधायक डाॉ मुकेश कुमार रौशन को तो धूल चटायी ही, राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद के बड़े पुत्र तेजप्रताप यादव को भी मुंह की खानी पड़ गयी.

राजकिशोर सिंह
02 जनवरी 2026
Patna : 2024 के संसदीय चुनाव (Parliamentary Elections) में एनडीए (NDA) में रहते लोजपा (रामविलास) को पांच सीटों पर उम्मीदवार उतारने का अवसर मिला, पांचो पर जीत हुई. ‘पुश्तैनी सीट’ हाजीपुर (Hajipur) से निर्वाचित चिराग पासवान (Chirag Paswan) को केन्द्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिल गयी. इन उपलब्धियों से अहंकार फिर छाने लगा. लोगों ने देखा कि चिराग पासवान 2025 के विधानसभा चुनाव में अधिकाधिक सीटों के लिए पैंतरेबाजी करने लगे. प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की सरकार पर गंभीर सवाल उठाने लग गये. उससे लोजपा (रामविलास) के 2020 जैसे हश्र की आशंका आकार लेने लग गयी. पर, थोड़ा बहुत उछलने-कूदने के बाद इस बार उन्होंने खुद को नियंत्रित रखा. निर्णयों पर अहंकार को हावी नहीं होने दिया. सुखद परिणाम मिला. एनडीए में लोजपा (रामविलास) (LJP-R) के हिस्से में 29 सीटें गयीं. दुर्भाग्यवश मढ़ौरा (Madhaura) की उम्मीदवार भोजपुरी (Bhojpuri) फिल्म अभिनेत्री (Actress) सीमा सिंह (Seema Singh) का नामांकन रद्द हो गया. फलस्वरूप 28 सीटों पर ही लोजपा (रामविलास) के उम्मीदवार रह गये. उनमें 19 सीटों पर शानदार जीत हुई. ऐसी जीत कि इसे देख-सुन राजनीति दंग रह गयी.
दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
बिहार (Bihar) में पहली बार लोजपा के दो मंत्री भी बने. राजनीति का ध्यान गया कि दोनों ‘पासवान परिवार’ से बाहर के हैं. विधानसभा में सीटों के मामले में फरवरी 2005 के बाद लोजपा के अब तक केे इतिहास का यह सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है. फरवरी 2005 में इसने 29 सीटों पर जीत दर्ज की थी. हालांकि, उस चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के चलते सात माह बाद अक्तूबर 2005 में दोबारा चुनाव हुआ. उसमें लोजपा (LJP) 10 सीटों पर अटक गयी. यानी सीधे तौर पर 19 सीटों का नुकसान हो गया. उसके बाद के विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) में उसका ग्राफ निरंतर गिरता गया. 2010 में तीन, 2015 में दो और 2020 में सिर्फ एक सीट पर ही कामयाबी मिल पायी.
ढाह दिया राजद का गढ़
2025 के चुनाव की महत्वपूर्ण बात यह रही कि लोजपा (रामविलास) ने कई वैसी सीटों पर अपना झंडा गाड़ दिया जहां पूर्व के चुनावों में महागठबंधन जीतता रहा है. लोजपा (रामविलास) की सबसे बड़ी जीत वैशाली जिले के महुआ (Mahua) विधानसभा क्षेत्र में हुई. वहां इसके उम्मीदवार संजय कुमार सिंह (Sanjay Kumar Singh) ने राजद के निर्वतमान विधायक डा. मुकेश कुमार रौशन (Dr. Mukesh Kumar Raushan) को तो धूल चटायी ही, राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद (Lalu Prasad) के बड़े पुत्र तेजप्रताप यादव (Tejpratap Yadav) को भी मुंह की खानी पड़ गयी. गौरतलब है कि बिहार के जिन कुछ निर्वाचन क्षेत्रों को यादव बहुल माना जाता है, उनमें एक महुआ भी है. 2010 से 2020 तक के तीन चुनावों में वहां लगातार यादव उम्मीदवार की ही जीत हुई. 2010 में जदयू (JDU) के रवीन्द्र राय (Ravendra Rai) को जीत मिली थी.
चारो खाने चित हो गये
2015 में राजद उम्मीदवार के तौर पर तेजप्रताप यादव निर्वाचित हुए थे. इस बार वह खुद की पार्टी जनशक्ति जनता दल (Janshakti Janta Dal) के उम्मीदवार थे. 2020 में तेजप्रताप यादव हसनपुर (Hasanpur) से राजद का उम्मीदवार बन गये. महुआ में बाजी राजद के डा. मुकेश कुमार रौशन के हाथ लग गयी. 2025 में लोजपा (रामविलास) के क्षत्रिय समाज के उम्मीदवार संजय कुमार सिंह ने महुआ और यादव से जुड़े मिथक को तोड़ दिया. यहां जानने-समझने वाली बात यह भी है कि डा. मुकेश कुमार रौशन की हार तेजप्रताप यादव के मैदान में उतर जाने से नही, राजद समर्थक सामाजिक समूहों के मतों में विभाजन के चलते हुई. इन समूहों के मतों में तेजप्रताप यादव के अलावा एआईएमआईएम (AIMIM) के अमित कुमार (Amit Kumar) उर्फ बच्चा राय (Baccha Rai) और निर्दलीय आसमा परवीन (Asma Parveen) ने बड़ी सेंध लगा दी. डा. मुकेश कुमार रौशन चारो खाने चित हो गये.
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एक झटके में उखाड़ दिया खूंटा
महुआ की तरह ही यादवों के ‘अभेद्य गढ़’ की पहचान रखने वाले पटना जिले के बख्तियारपुर (Bakhtiyarpur) विधानसभा क्षेत्र में भी लोजपा (रामविलास) के उम्मीदवार ने चौंकाऊ जीत हासिल की. चौंकाऊ इस रूप में कि कभी-कभार भाजपा के यादव उम्मीदवार को तो वहां जीत मिलती रही है, लोजपा (रामविलास) के गैर यादव प्रत्याशी ने अरुण कुमार साह (Arun Kumar Sah) ने इस बार राजद के निवर्तमान यादव विधायक अनिरुद्ध कुमार (Anirudh Kumar) का खूंटा एक झटके में उखाड़ दिया. नवादा (Navada) जिले के गोविंदपुर (Govindpur) में लोजपा (रामविलास) की प्रत्याशी विनीता मेहता की जीत भी ऐसी ही श्रेणी में आती है. विनीता मेहता (Vinita Mehta) ने राजद की उस उम्मीदवार पूर्व विधायक पूर्णिमा यादव (Prrnima Yadav) को शिकस्त दी जिनकी यादव बहुल गोविंदपुर पुश्तैनी सीट मानी जाती है. इस सीट से पूर्णिमा यादव के सास-ससुर और पति भी निर्वाचित होते रहे हैं.
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यहां भी हुई बड़ी जीत
कटिहार (Katihar) जिले के बलरामपुर (Balrampur) और पूर्णिया (Purnia) जिले के कसबा में भी लोजपा (रामविलास) की बड़ी जीत हुई. दोनों स्थापित मुस्लिम बहुल क्षेत्र हैं. बलरामपुर से भाकपा-माले (CPI-ML) के पूर्व विधायक महबूब आलम (Mahboob Alam) निर्वाचित होते थे. इस बार तीसरे स्थान पर अटक गये. जीत लोजपा (रामविलास) की वैश्य बिरादरी की प्रत्याशी संगीता देवी (Sangeeta Devi) की हुई. मुकाबला उनका एआईएमआईएम (AIMIM) के आदिल हसन (Adil Hassan) से हुआ. हार-जीत का फैसला मात्र 389 मतों के अंतर से हुआ. कसबा (Kasba) में कांग्रेस (Congress) की दुर्गति हो गयी. पूर्व विधायक आफाक आलम (Afak Alam) की जगह कांग्रेस की उम्मीदवारी इरफान आलम (Irfan Alam) को मिली. लोजपा (रामविलास) के नितेश कुमार सिंह (Nitesh Kumar Singh) ने उन्हें 12 हजार 875 मतों से पछाड़ दिया.
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